लंदन | इंग्लैंड की महिला रग्बी टीम, जिसे दुनिया 'रेड रोजेज' के नाम से जानती है, इस समय खेल जगत में सफलता की नई इबारत लिख रही है। फ्रांस के बॉरदॉ में मिली हालिया जीत ने उनकी वैश्विक बादशाहत पर मुहर लगा दी है।
इंग्लैंड महिला रग्बी की बादशाहत: इंग्लैंड महिला रग्बी: 38 जीत और 8 खिताबों का ऐतिहासिक सफर
इंग्लैंड की रेड रोजेज ने लगातार 8वीं बार सिक्स नेशंस खिताब जीतकर रग्बी की दुनिया में तहलका मचाया।
HIGHLIGHTS
- इंग्लैंड की महिला रग्बी टीम ने लगातार आठवीं बार प्रतिष्ठित विमंस सिक्स नेशंस का खिताब अपने नाम किया है।
- टीम ने पिछले 38 मैचों से अपनी जीत का सिलसिला बरकरार रखा है, जो खेल जगत में एक मिसाल है।
- 2022 वर्ल्ड कप फाइनल में न्यूजीलैंड से मिली करीबी हार के बाद टीम ने खुद को पूरी तरह बदल लिया है।
- रग्बी फुटबॉल यूनियन ने पिछले साल महिला रग्बी के विकास के लिए करीब 195 करोड़ रुपए का भारी निवेश किया।
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फ्रांस के बॉरदॉ शहर में मैच खत्म होते ही इंग्लैंड की महिला रग्बी टीम की खिलाड़ी एक-दूसरे से गले मिल रही थीं। उनके चेहरों पर जीत की वो चमक थी जो अथक परिश्रम से आती है।
मैच के अंत में स्कोरबोर्ड पर 43-28 का स्कोर चमक रहा था। यह जीत इंग्लैंड के लिए बहुत खास थी क्योंकि इसने उन्हें लगातार आठवीं बार विमंस सिक्स नेशंस का चैंपियन बना दिया था।
इतना ही नहीं, इस जीत के साथ इंग्लैंड ने लगातार पांचवां ग्रैंड स्लैम भी अपने नाम किया। दिलचस्प बात यह है कि टीम की कई खिलाड़ियों को अपनी जीत का सटीक आंकड़ा भी याद नहीं था।
टीम की जीत का यह सिलसिला अब 38 मैचों तक पहुंच चुका है। यह एक ऐसा रिकॉर्ड है जिसे तोड़ना किसी भी टीम के लिए एक बड़ी चुनौती साबित होने वाला है।
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हार से सीखा सबक और किया जबरदस्त पलटवार
यह वही टीम है, जिसने 2022 महिला रग्बी वर्ल्ड कप फाइनल में न्यूजीलैंड से आखिरी मिनटों में हार झेली थी। 31-34 की वह हार आज भी खिलाड़ियों के जहन में एक सबक की तरह जिंदा है।
लेकिन उसी हार के बाद रेड रोजेज ने अपनी रणनीति और मानसिकता को ऐसे बदला कि अब उन्हें रोकना लगभग नामुमकिन लगने लगा है। उन्होंने अपनी कमजोरियों को अपनी सबसे बड़ी ताकत बना लिया।
पिछले सात वर्षों के लंबे समय में इंग्लैंड ने सिर्फ एक मैच गंवाया है। यह आंकड़ा उनकी निरंतरता और खेल के प्रति उनके समर्पण को साफ तौर पर बयां करता है।
शायद यही वजह है कि यह टीम सिर्फ जीत नहीं रही, बल्कि रग्बी के खेल में एक नया वैश्विक मानक स्थापित कर रही है। वे हर मैच को एक नई शुरुआत मानते हैं।
इंग्लैंड की स्टार खिलाड़ी सारा बर्न कहती हैं कि अगर यह टीम एक बार हारती भी है, तो दोबारा हारना नहीं चाहेगी। हम हमेशा खुद को कल से बेहतर बनाने की कोशिश करते हैं।
सारा के मुताबिक टीम का लक्ष्य सिर्फ मैच जीतना नहीं है। उनका असली मकसद दुनिया की सबसे बेहतरीन और अनुशासित खेल टीम के रूप में अपनी पहचान बनाना है।
चुनौतियों के बावजूद नहीं रुकी टीम की रफ्तार
हैरानी की बात यह है कि इंग्लैंड की मौजूदा टीम अपनी पूरी क्षमता और सभी मुख्य खिलाड़ियों के साथ भी नहीं खेल रही है। इसके बावजूद उनका दबदबा कायम है।
टीम के कई अहम खिलाड़ी चोट के कारण मैदान से बाहर हैं। वहीं, टीम की चार मुख्य खिलाड़ी फिलहाल मैटरनिटी लीव पर हैं। इसके बावजूद टीम की रफ्तार में कोई कमी नहीं आई।
फ्रांस की चुनौती और इंग्लैंड का संयम
फ्रांस ने हाल के वर्षों में इंग्लैंड को कड़ी चुनौती देना शुरू किया है। इस मुकाबले में भी फ्रांस ने दूसरे हाफ में वापसी की भरपूर कोशिश की और मैच को रोमांचक बना दिया था।
लेकिन इंग्लैंड की टीम ने भारी दबाव की स्थिति में भी अपना आपा नहीं खोया। उन्होंने संयम के साथ खेलते हुए मैच को अपने हाथ से निकलने नहीं दिया और जीत सुनिश्चित की।
हम रिकॉर्ड नहीं गिनते। हम सिर्फ अगले मैच और खुद को बेहतर बनाने पर ध्यान देते हैं। सूरज अगली सुबह फिर उगेगा, और हम वही रहेंगे। - कप्तान मेग जोन्स
निवेश और प्रोफेशनल सिस्टम का बड़ा कमाल
इस शानदार सफलता के पीछे सिर्फ खिलाड़ियों की प्रतिभा ही नहीं, बल्कि एक बहुत मजबूत प्रशासनिक सिस्टम भी काम कर रहा है। यह बदलाव एक सोची-समझी रणनीति का हिस्सा है।
2019 में इंग्लैंड ने महिला खिलाड़ियों को फुल-टाइम प्रोफेशनल कॉन्ट्रैक्ट देना शुरू किया था। यह महिला रग्बी के इतिहास में एक क्रांतिकारी और साहसी कदम साबित हुआ जिसने सब कुछ बदल दिया।
पिछले साल रग्बी फुटबॉल यूनियन ने महिला रग्बी के बुनियादी ढांचे को मजबूत करने के लिए करीब 195 करोड़ रुपए का निवेश किया था। इस निवेश ने खिलाड़ियों को विश्व स्तरीय सुविधाएं दीं।
इसके उलट, पिछले वर्ल्ड कप की फाइनलिस्ट कनाडा की टीम को टूर्नामेंट में हिस्सा लेने के लिए क्राउडफंडिंग का सहारा लेना पड़ा था। यह संसाधनों की कमी को दर्शाता है।
यही बड़ा अंतर बताता है कि सही समय पर किया गया निवेश और आधुनिक सुविधाएं किसी भी टीम की किस्मत और प्रदर्शन को किस हद तक बदल सकती हैं।
क्या इंग्लैंड की इस टीम को कोई रोक पाएगा?
अब खेल जगत में सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर इंग्लैंड के इस विजय रथ को कौन रोकेगा? उनकी अगली बड़ी चुनौती फिर से न्यूजीलैंड की शक्तिशाली टीम हो सकती है।
लेकिन अगर कभी यह टीम हार भी गई, तो शायद उनकी सोच और जीतने का जज्बा नहीं बदलेगा। वे गिरकर फिर से उठने और जीतने की कला में माहिर हो चुके हैं।
इंग्लैंड की महिला रग्बी टीम आज केवल एक खेल टीम नहीं रह गई है। वे महिला सशक्तिकरण और पेशेवर उत्कृष्टता का एक वैश्विक प्रतीक बन चुकी हैं।
उनका सफर दुनिया भर की उभरती हुई महिला एथलीटों के लिए प्रेरणा है। वे दिखा रही हैं कि अगर सही समर्थन मिले तो महिलाएं खेल के मैदान में क्या हासिल कर सकती हैं।
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