thinQ360
🏠 टॉप 🔥 राजनीति 📍 राज्य 📰 लाइफ स्टाइल 🏏 खेल 🎬 मनोरंजन 📰 जालोर 👤 शख्सियत 💻 तकनीक ✍️ Blog ⭐ सफलता की कहानी 🚨 क्राइम 📰 मनचाही ▶️ YouTube
भारत

तस्करी का सोना: 10 लाख रुपये किलो सस्ता मिल रहा सोना

जोगेन्द्र सिंह शेखावत

आयात शुल्क बढ़ने से खाड़ी देशों, नेपाल और बांग्लादेश से सोने की तस्करी में भारी इजाफा हुआ है।

+Follow us
thinQ360 को गूगल पर फेवरेट बनाएँ

HIGHLIGHTS

  • तस्करी का सोना बाजार भाव से 8 से 10 लाख रुपये प्रति किलो सस्ता मिल रहा है।
  • सोने की तस्करी के लिए खाड़ी देश, नेपाल और बांग्लादेश प्रमुख रूट बन गए हैं।
  • आयात शुल्क में बढ़ोतरी को तस्करी बढ़ने का मुख्य कारण माना जा रहा है।
  • तस्कर भारी छूट देने के बाद भी प्रति किलो 15-17 लाख रुपये का मुनाफा कमा रहे हैं।
gold smuggling surges in india due to high import duty

मुंबई | भारत में सोने पर आयात शुल्क बढ़ने का असर अब खुलकर सामने आने लगा है, जिससे सोने की तस्करी के मामलों में भारी उछाल देखा जा रहा है। अवैध रास्तों से देश में लाया जा रहा सोना बाजार कीमत के मुकाबले 8 से 10 लाख रुपये प्रति किलो तक सस्ता मिल रहा है, जो ग्रे मार्केट को बढ़ावा दे रहा है।

आयात शुल्क बना तस्करी की वजह?

सर्राफा कारोबार से जुड़े विशेषज्ञों का मानना है कि जब भी सरकार सोने पर आयात शुल्क बढ़ाती है, तस्करी का कारोबार अपने पैर पसारने लगता है। ऊंची ड्यूटी के कारण कानूनी तौर पर सोना आयात करना महंगा हो जाता है, जिससे तस्करों के लिए एक बड़ा अवसर पैदा होता है।

यह स्थिति सरकार के लिए दोहरी चुनौती पेश करती है। एक तरफ जहां उसे राजस्व का भारी नुकसान होता है, वहीं दूसरी ओर देश की अर्थव्यवस्था में काले धन का प्रवाह भी बढ़ जाता है।

कैसे काम करता है तस्करी का नेटवर्क?

इंडिया बुलियन एंड ज्वैलर्स एसोसिएशन (IBJA) के राष्ट्रीय सचिव सुरेंद्र मेहता के अनुसार, तस्करी के इस खेल में खाड़ी देशों से आने वाले यात्री एक महत्वपूर्ण कड़ी हैं।

"अनौपचारिक चैनलों से आने वाले ज्यादातर सोने का सोर्स गल्फ कंट्रीज हैं। कई यात्री सोने को आभूषण के रूप में पहनकर लाते हैं और जांच से बचकर निकल जाते हैं।"

ये यात्री एयरपोर्ट पर ग्रीन चैनल का फायदा उठाकर बिना किसी घोषणा के बाहर निकल जाते हैं, जिससे कस्टम अधिकारियों को चकमा देना आसान हो जाता है।

मुनाफे का बड़ा खेल

तस्करी के सोने का अर्थशास्त्र बेहद चौंकाने वाला है। मुंबई के एक बुलियन कारोबारी ने बताया कि कानूनी तौर पर एक किलो सोने की लैंडेड कॉस्ट लगभग 1.65 करोड़ रुपये पड़ती है।

इसमें सोने की असल कीमत करीब 1.40 करोड़ रुपये होती है, जबकि बाकी 25 लाख रुपये आयात शुल्क और जीएसटी के रूप में चुकाने पड़ते हैं। यही भारी-भरकम टैक्स तस्करों के लिए मुनाफे का दरवाजा खोलता है।

तस्करों को कितना फायदा?

तस्कर अवैध रूप से लाए गए सोने को बाजार भाव से 8 से 10 लाख रुपये प्रति किलो सस्ता बेचते हैं। इस बड़ी छूट के बावजूद, वे टैक्स के रूप में बचाए गए 25 लाख रुपये में से आसानी से 15 से 17 लाख रुपये प्रति किलो का मुनाफा कमा लेते हैं। यह भारी मुनाफा इस अवैध कारोबार को और भी आकर्षक बनाता है।

खाड़ी देशों के अलावा ये हैं नए रूट्स

पहले जहां सिर्फ खाड़ी देश ही तस्करी के लिए बदनाम थे, वहीं अब नेपाल और बांग्लादेश भी नए और महत्वपूर्ण रूट्स के तौर पर उभरे हैं। इन देशों की खुली सीमाएं तस्करों के काम को और आसान बना देती हैं।

महाराष्ट्र, तमिलनाडु, गुजरात और पश्चिम बंगाल जैसे राज्यों में तस्करी के सबसे ज्यादा मामले सामने आ रहे हैं। हाल ही में मुंबई के छत्रपति शिवाजी महाराज अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर दुबई से आए दो यात्रियों से 4.19 करोड़ रुपये का सोना जब्त किया गया था।

क्यों मुश्किल है इसे रोकना?

वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल की रिसर्च प्रमुख कविता चाको का कहना है कि एक बार तस्करी का नेटवर्क स्थापित हो जाए तो उसे खत्म करना बेहद मुश्किल हो जाता है। ये नेटवर्क इतने मजबूत होते हैं कि ड्यूटी स्थिर रहने के बावजूद अवैध सोने का प्रवाह जारी रहता है।

आंकड़े क्या कहते हैं?

वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल के आंकड़े इस बात की पुष्टि करते हैं कि आयात शुल्क और तस्करी के बीच सीधा संबंध है। साल 2013 से 2026 के बीच जब-जब ड्यूटी बढ़ाई गई, अवैध सोने का आयात भी बढ़ा।

उदाहरण के लिए, 2013 में जब आयात शुल्क में 4% की बढ़ोतरी हुई, तो तस्करी से आने वाला सोना 10 टन से बढ़कर लगभग 70 टन तक पहुंच गया था। यह दिखाता है कि टैक्स नीतियां ग्रे मार्केट पर कितना गहरा असर डालती हैं।

वायदा बाजार में सोने का हाल

इस बीच, घरेलू वायदा बाजार में सोने की कीमतों में गिरावट देखने को मिली। बुधवार को एमसीएक्स एक्सचेंज पर सोने का वायदा भाव 0.28% की गिरावट के साथ 1,58,900 रुपये प्रति 10 ग्राम पर कारोबार कर रहा था। वहीं, चांदी में भी 0.93% की गिरावट दर्ज की गई।

कुल मिलाकर, सोने पर बढ़ा हुआ आयात शुल्क भले ही सरकार के राजस्व को बढ़ाने के उद्देश्य से लगाया गया हो, लेकिन यह अनजाने में एक समानांतर अवैध अर्थव्यवस्था को बढ़ावा दे रहा है। इससे न केवल सरकारी खजाने को नुकसान हो रहा है, बल्कि यह देश की आंतरिक सुरक्षा के लिए भी एक गंभीर चुनौती पेश करता है।

*Edit with Google AI Studio

शेयर करें: