thinQ360
thinQ360
🏠 टॉप 🔥 राजनीति 📍 राज्य 📰 लाइफ स्टाइल 🏏 खेल 🎬 मनोरंजन 📰 जालोर 👤 शख्सियत 💻 तकनीक ✍️ Blog ⭐ सफलता की कहानी 🚨 क्राइम 📰 मनचाही ▶️ YouTube
लाइफ स्टाइल

रात की ओवरथिंकिंग कैसे रोकें?: रात में आने वाले विचारों से हैं परेशान? 'डिफॉल्ट मोड नेटवर्क' हो सकता है इसकी बड़ी वजह, जानें ओवरथिंकिंग रोकने के 5 आसान तरीके

thinQ360

रात में बिस्तर पर जाते ही विचारों का सैलाब आना एक गंभीर मानसिक समस्या बन रही है। विशेषज्ञों के अनुसार, यह दिमागी सक्रियता नींद और स्वास्थ्य को प्रभावित कर रही है।

HIGHLIGHTS

  • रात के समय दिमाग का 'डिफॉल्ट मोड नेटवर्क' अधिक सक्रिय हो जाता है, जिससे पुराने विचार और यादें ताजा होने लगती हैं।
  • ओपीडी में आने वाले लगभग 30 से 40 प्रतिशत मरीज अब रात की ओवरथिंकिंग और नींद न आने की समस्या से जूझ रहे हैं।
  • लगातार सोचते रहने से व्यक्ति में चिड़चिड़ापन, थकान और आत्मविश्वास की कमी जैसे लक्षण दिखाई देने लगते हैं।
  • विशेषज्ञों ने प्राणायाम, माइंडफुलनेस और रचनात्मक कार्यों को इस समस्या से निपटने का सबसे प्रभावी तरीका बताया है।
how to stop overthinking at night tips and causes

भोपाल | दिनभर की भागदौड़ के बाद जब हम सुकून की तलाश में बिस्तर पर लेटते हैं, तो अक्सर शांति मिलने के बजाय दिमाग में विचारों का एक तूफान शुरू हो जाता है।

यह स्थिति कई लोगों के लिए इतनी गंभीर हो जाती है कि वे घंटों तक करवटें बदलते रहते हैं और सुबह थकान के साथ उठते हैं।

विशेषज्ञों का कहना है कि रात के समय आने वाले ये विचार केवल एक सामान्य आदत नहीं हैं, बल्कि यह एक जटिल मानसिक प्रक्रिया का हिस्सा हैं।

बढ़ रही है मरीजों की संख्या



मनोचिकित्सक डॉ. सत्यकांत त्रिवेदी के अनुसार, पिछले कुछ वर्षों में रात की ओवरथिंकिंग के मामलों में भारी उछाल देखा गया है।

पहले जहां ओपीडी में ऐसे इक्का-दुक्का मामले ही आते थे, वहीं अब लगभग 30 से 40 प्रतिशत मरीज इसी परेशानी को लेकर पहुंच रहे हैं।

मरीजों की मुख्य शिकायत यह होती है कि वे चाहकर भी अपने दिमाग को शांत नहीं कर पा रहे हैं, जिससे उनकी नींद पूरी नहीं हो रही।

क्या है डिफॉल्ट मोड नेटवर्क?



डॉक्टर बताते हैं कि जब हम दिन में काम करते हैं, तो हमारा दिमाग बाहरी कार्यों, मोबाइल और बातचीत में पूरी तरह व्यस्त रहता है।

लेकिन जैसे ही रात की शांति होती है, बाहरी गतिविधियां बंद हो जाती हैं और दिमाग का एक खास हिस्सा सक्रिय हो जाता है।

इस हिस्से को वैज्ञानिक भाषा में 'डिफॉल्ट मोड नेटवर्क' (DMN) कहा जाता है, जो आत्म-चिंतन और यादों से गहराई से जुड़ा होता है।

जब हम खाली होते हैं, तो यह नेटवर्क सक्रिय होकर पुरानी बातों, भविष्य की चिंताओं और दिनभर की घटनाओं को कुरेदने लगता है।

यही कारण है कि छोटी-छोटी बातें भी रात के अंधेरे में बहुत बड़ी और डरावनी लगने लगती हैं, जिससे तनाव का स्तर बढ़ जाता है।

मानसिक स्वास्थ्य पर गहरा असर



लगातार ओवरथिंकिंग केवल नींद ही नहीं खराब करती, बल्कि यह आपके संपूर्ण व्यक्तित्व और स्वास्थ्य को प्रभावित करने लगती है।

डॉ. रुचि सोनी का कहना है कि जब व्यक्ति रात भर सोचता रहता है, तो उसका दिमाग कभी भी 'डीप स्लीप' मोड में नहीं जा पाता है।

इसका परिणाम यह होता है कि अगले दिन व्यक्ति को चिड़चिड़ापन महसूस होता है और उसकी निर्णय लेने की क्षमता कमजोर होने लगती है।

लंबे समय तक इस स्थिति में रहने से आत्मविश्वास में कमी आती है और नकारात्मक सोच का एक चक्र बन जाता है जिसे तोड़ना मुश्किल होता है।

रोकने का पहला तरीका: स्वीकार करें



रात के विचारों को रोकने का सबसे पहला और प्रभावी तरीका है उन्हें स्वीकार करना और उनसे लड़ना बंद कर देना।

जब आप खुद से कहते हैं कि 'मैं सोच सकता हूं, यह मेरी शक्ति है', तो आप उन विचारों के प्रति अपना प्रतिरोध कम कर देते हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि जब हम विचारों को जबरदस्ती दबाने की कोशिश करते हैं, तो वे और भी अधिक शक्तिशाली होकर वापस लौटते हैं।

इसलिए, विचारों को आने दें और खुद को याद दिलाएं कि यह केवल दिमाग की एक प्रक्रिया है, कोई वास्तविक खतरा नहीं है।

दूसरा तरीका: शरीर के जरिए मन को शांत करें



मन को शांत करने का सबसे सीधा रास्ता आपके शरीर और आपकी सांसों से होकर गुजरता है।

सोने से ठीक पहले 5 से 10 मिनट तक गहरी सांस लेने का अभ्यास या प्राणायाम करना बहुत फायदेमंद साबित होता है।

जब आप अपनी सांसों पर ध्यान केंद्रित करते हैं, तो आपका पैरासिम्पेथेटिक नर्वस सिस्टम सक्रिय हो जाता है, जो शरीर को आराम देता है।

सांस को धीरे-धीरे अंदर लें और उससे भी अधिक धीरे बाहर छोड़ें, इससे दिमाग को संकेत मिलता है कि अब आराम करने का समय है।

तीसरा तरीका: माइंडफुलनेस का अभ्यास



माइंडफुलनेस का अर्थ है वर्तमान क्षण में पूरी तरह उपस्थित रहना और अपने शरीर के प्रति जागरूक होना।

बिस्तर पर लेटकर अपने पैर की उंगलियों से लेकर सिर तक के हर हिस्से को महसूस करने की कोशिश करें और वहां के तनाव को ढीला छोड़ें।

विचारों को एक सड़क पर चलते ट्रैफिक की तरह देखें, जहां आप केवल एक दर्शक हैं और उन गाड़ियों (विचारों) में सवार नहीं हो रहे हैं।

जैसे ही आप विचारों से दूरी बनाना शुरू करते हैं, उनकी पकड़ आपके दिमाग पर अपने आप ढीली पड़ने लगती है और शांति महसूस होती है।

चौथा तरीका: रचनात्मकता को दें स्थान



दिन के समय अपनी ऊर्जा को सही दिशा में मोड़ना भी रात की शांति के लिए बहुत आवश्यक होता है।

लेखन, पेंटिंग, संगीत सुनना या बागवानी जैसे रचनात्मक कार्य आपके दिमाग को सकारात्मक रूप से व्यस्त रखते हैं।

जब आप दिन में कुछ सृजनात्मक करते हैं, तो रात में आपका 'डिफॉल्ट मोड नेटवर्क' नकारात्मक यादों के बजाय संतोषजनक अनुभवों पर ध्यान देता है।

पढ़ना भी एक बेहतरीन विकल्प है, जो दिमाग को एक काल्पनिक दुनिया में ले जाकर वास्तविक चिंताओं से दूर करने में मदद करता है।

पांचवां तरीका: छोटी खुशियों पर ध्यान दें



अक्सर हम बड़ी सफलताओं के इंतजार में दिनभर की छोटी-छोटी खुशियों और उपलब्धियों को नजरअंदाज कर देते हैं।

सोने से पहले उन तीन चीजों के बारे में सोचें जिनके लिए आप आज आभारी हैं, चाहे वह किसी का मुस्कुराना ही क्यों न हो।

कृतज्ञता (Gratitude) का भाव दिमाग में डोपामाइन और सेरोटोनिन जैसे 'फील-गुड' हार्मोन रिलीज करता है, जो तनाव को कम करते हैं।

जब आप सकारात्मकता के साथ अपनी आंखें बंद करते हैं, तो रात के डरावने विचार अपने आप पीछे छूट जाते हैं और गहरी नींद आती है।

विशेषज्ञों की सलाह



डॉक्टरों का यह भी सुझाव है कि सोने से कम से कम एक घंटा पहले मोबाइल और लैपटॉप जैसे इलेक्ट्रॉनिक गैजेट्स का उपयोग बंद कर दें।

इन उपकरणों से निकलने वाली नीली रोशनी मेलाटोनिन हार्मोन के उत्पादन को रोकती है, जो नींद के लिए जिम्मेदार होता है।

यदि इन उपायों के बाद भी समस्या बनी रहती है, तो किसी पेशेवर काउंसलर या मनोचिकित्सक से परामर्श लेने में संकोच न करें।

मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करना और समय पर मदद लेना किसी भी बड़ी बीमारी को रोकने का सबसे सही कदम है।

याद रखें, एक अच्छी नींद आपके आने वाले कल की नींव है, इसलिए अपने दिमाग को शांत रखना आपकी प्राथमिकता होनी चाहिए।

शेयर करें:

ताज़ा खबरें