जोधपुर | राजस्थान के जोधपुर जिले में स्वास्थ्य और परंपरा का अनूठा संगम देखने को मिला है। पशुपालन मंत्री जोराराम कुमावत ने मोकलावास स्थित गौ संवर्द्धन आश्रम में देश के पहले पंचगव्य चिकित्सा पाठ्यक्रम का शुभारंभ किया। यह पहल स्वदेशी चिकित्सा पद्धति को नई ऊंचाई प्रदान करेगी।
देश का पहला पंचगव्य चिकित्सा कोर्स: जोधपुर में देश का पहला पंचगव्य चिकित्सा कोर्स शुरू
पशुपालन मंत्री जोराराम कुमावत ने जोधपुर में पंचगव्य चिकित्सा पाठ्यक्रम का शुभारंभ किया।
HIGHLIGHTS
- जोधपुर के मोकलावास में देश के पहले पंचगव्य चिकित्सा पाठ्यक्रम की शुरुआत हुई।
- पशुपालन मंत्री जोराराम कुमावत ने विधिवत रूप से कक्षाओं का उद्घाटन किया।
- यह कोर्स आयुर्वेद विश्वविद्यालय और लक्ष्य संस्था के संयुक्त तत्वावधान में है।
- युवाओं को गौ-उत्पाद आधारित स्वरोजगार और औषधि निर्माण का प्रशिक्षण मिलेगा।
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स्वदेशी चिकित्सा और रोजगार के नए अवसर
मंत्री कुमावत ने कहा कि पंचगव्य चिकित्सा भारतीय परंपरा और आयुर्वेद का अभिन्न हिस्सा है। यह पाठ्यक्रम न केवल स्वास्थ्य क्षेत्र में नई संभावनाएं पैदा करेगा, बल्कि ग्रामीण विकास में भी सहायक होगा।
यह कोर्स डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन राजस्थान आयुर्वेद विश्वविद्यालय और लक्ष्य पर्यावरण एवं जन कल्याण संस्था के सहयोग से चलाया जा रहा है। इसका मुख्य उद्देश्य युवाओं के लिए रोजगार सृजित करना है।
पाठ्यक्रम में क्या होगा खास?
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छात्रों को पंचगव्य के सिद्धांत, औषधि निर्माण और विभिन्न रोगों के उपचार का गहन प्रशिक्षण दिया जाएगा। इसके साथ ही गौशाला प्रबंधन और गौ-उत्पाद आधारित स्वरोजगार के गुर भी सिखाए जाएंगे।
पंचगव्य चिकित्सा पद्धति न केवल पारंपरिक चिकित्सा को सशक्त बनाएगी, बल्कि पर्यावरण संरक्षण और स्वास्थ्य के नए आयाम भी स्थापित करेगी।
आश्रम का अवलोकन और सम्मान
कार्यक्रम के दौरान मंत्री ने आश्रम के विभिन्न प्रकल्पों का जायजा लिया और गायों को लापसी खिलाई। उन्होंने क्षेत्र की ग्रामीण प्रतिभाओं को सम्मानित कर उनका उत्साहवर्धन भी किया।
इस ऐतिहासिक पहल से राजस्थान अब पंचगव्य चिकित्सा के क्षेत्र में देश का नेतृत्व करेगा। यह पाठ्यक्रम भविष्य में गौ-वंश के संरक्षण और आयुर्वेद के प्रसार में मील का पत्थर साबित होने की उम्मीद है।
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