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अब पानी की भाप से दौड़ेगी रेल: भारत ने रचा इतिहास जींद से रवाना हुई देश की पहली हाइड्रोजन फ्यूल सेल ट्रेन

बलजीत सिंह शेखावत
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india makes history the countrys first hydrogen fuel cell train flagged off from jind

जींद/नई दिल्ली: भारत ने रेलवे के इतिहास में एक नया अध्याय जोड़ते हुए देश की पहली हाइड्रोजन फ्यूल सेल ट्रेन को लॉन्च कर दिया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हरियाणा के जींद रेलवे स्टेशन से इस अत्याधुनिक ट्रेन को हरी झंडी दिखाई। इसके साथ ही भारत उन चुनिंदा देशों की सूची में शामिल हो गया है, जहां हाइड्रोजन ईंधन से ट्रेनें संचालित की जाती हैं। इस सूची में चीन, जापान, जर्मनी, अमेरिका और अब भारत का नाम भी जुड़ गया है।

भारतीय रेलवे के लिए यह उपलब्धि न केवल तकनीकी आत्मनिर्भरता की दिशा में बड़ा कदम है, बल्कि पर्यावरण संरक्षण और स्वच्छ परिवहन व्यवस्था की ओर भी एक महत्वपूर्ण पहल मानी जा रही है। सबसे खास बात यह है कि इस ट्रेन को भारत में ही डिजाइन और विकसित किया गया है।

क्या है हाइड्रोजन फ्यूल सेल ट्रेन?

यह ट्रेन हाइड्रोजन फ्यूल सेल तकनीक पर आधारित है। इसमें हाइड्रोजन गैस को फ्यूल सेल के माध्यम से बिजली में परिवर्तित किया जाता है और यही बिजली ट्रेन के मोटर को चलाती है। इस पूरी प्रक्रिया में कार्बन डाइऑक्साइड का उत्सर्जन नहीं होता। ट्रेन के इंजन से केवल पानी की भाप निकलती है, इसलिए इसे जीरो-एमिशन ट्रेन भी कहा जाता है।

दुनिया की सबसे शक्तिशाली हाइड्रोजन ट्रेनों में शामिल

भारतीय रेलवे की यह ट्रेन कई मायनों में खास है। इसमें 10 कोच लगाए गए हैं और यह करीब 2,600 यात्रियों को ले जाने में सक्षम है। ट्रेन में 3,200 हॉर्सपावर का प्रोपल्शन सिस्टम लगाया गया है, जो इसे दुनिया की सबसे शक्तिशाली हाइड्रोजन ट्रेनों में शामिल करता है।

यात्रियों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए ट्रेन में अत्याधुनिक मल्टी-लेयर सेफ्टी सिस्टम लगाए गए हैं। इनमें हाइड्रोजन लीक, आग, धुआं और अत्यधिक तापमान का पता लगाने वाली आधुनिक तकनीक शामिल है।

कैसे चलती है हाइड्रोजन ट्रेन?

हाइड्रोजन ट्रेन को चलाने के लिए अलग रेलवे ट्रैक की आवश्यकता नहीं होती। यह सामान्य रेल पटरियों पर ही संचालित होती है। इसके लिए केवल हाइड्रोजन ईंधन की व्यवस्था की जाती है।

हरियाणा के जींद में इसके लिए विशेष ग्रीन हाइड्रोजन उत्पादन संयंत्र स्थापित किया गया है। यहां पानी को इलेक्ट्रोलिसिस प्रक्रिया के जरिए हाइड्रोजन और ऑक्सीजन में अलग किया जाता है। तैयार हाइड्रोजन को हाई-प्रेशर टैंकों में सुरक्षित रखा जाता है और विशेष फ्यूलिंग स्टेशन के माध्यम से ट्रेन में भरा जाता है।

इसके बाद हाइड्रोजन फ्यूल सेल गैस को बिजली में बदलता है, जिससे ट्रेन के मोटर संचालित होते हैं। इस पूरी प्रक्रिया में धुआं नहीं निकलता और केवल पानी की भाप बनती है, जिससे यह तकनीक पूरी तरह पर्यावरण के अनुकूल मानी जाती है।

पर्यावरण संरक्षण की दिशा में बड़ा कदम

भारतीय रेलवे का मानना है कि हाइड्रोजन आधारित रेल तकनीक भविष्य में स्वच्छ और टिकाऊ परिवहन व्यवस्था की मजबूत नींव बनेगी। इससे डीजल पर निर्भरता कम होगी, कार्बन उत्सर्जन में कमी आएगी और भारत हरित ऊर्जा के क्षेत्र में नई पहचान स्थापित करेगा।

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