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ट्रेन बर्थ के नए नियम जारी: भारतीय रेलवे ने जारी किए बर्थ के नए नियम, अब नहीं होगा विवाद

बलजीत सिंह शेखावत

रेलवे ने मिडिल और लोअर बर्थ के उपयोग के समय में बदलाव किया है, जानें नए नियम।

HIGHLIGHTS

  • मिडिल बर्थ को रात 10 बजे से सुबह 6 बजे तक ही खोला जा सकता है।
  • सुबह 6 बजे के बाद मिडिल बर्थ को फोल्ड करना अनिवार्य होगा।
  • लोअर बर्थ पर दिन के समय सह-यात्रियों को बैठने की अनुमति देनी होगी।
  • अपर बर्थ का उपयोग यात्री पूरे समय सोने या आराम के लिए कर सकता है।
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जोधपुर | भारतीय रेलवे ने ट्रेनों में सफर के दौरान मिडिल और लोअर बर्थ को लेकर होने वाले विवादों पर अब सख्ती दिखाई है। रेलवे बोर्ड ने इसके लिए स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी किए हैं।

नियमों के अनुसार, अब मिडिल बर्थ का उपयोग केवल एक निश्चित समय सीमा के भीतर ही किया जा सकेगा। रेलवे की इस नई एडवाइजरी का उद्देश्य यात्रियों के बीच होने वाले विवादों को कम करना है।

मिडिल बर्थ के लिए समय सीमा निर्धारित

रेलवे बोर्ड द्वारा जारी परिपत्र के अनुसार, आरक्षित कोचों में मिडिल बर्थ को केवल रात 10 बजे से सुबह 6 बजे तक ही खोला जा सकता है। यह नियम सभी लंबी दूरी की ट्रेनों पर लागू होगा।

सुबह 6 बजे बजते ही मिडिल बर्थ को फोल्ड करना अनिवार्य होगा। ऐसा इसलिए किया गया है ताकि लोअर बर्थ पर बैठे यात्री आराम से अपनी यात्रा पूरी कर सकें और उन्हें बैठने में दिक्कत न हो।

अक्सर देखा गया है कि लंबी दूरी की ट्रेनों में यात्री दिन के समय भी मिडिल बर्थ खोलकर सो जाते हैं। इससे नीचे बैठने वाले बुजुर्गों और महिलाओं को काफी परेशानी का सामना करना पड़ता है।

टीटीई को दिए गए सख्त निर्देश

जोधपुर रेल मंडल के वरिष्ठ मंडल वाणिज्य प्रबंधक हितेश यादव ने बताया कि अक्सर यात्रियों के बीच मिडिल बर्थ को लेकर तीखी बहस होती है। अब ऐसे मामलों में टीटीई को विशेष अधिकार दिए गए हैं।

यदि कोई यात्री नियमों का उल्लंघन करता है, तो टीटीई को रेलवे के नियम लागू कराने का पूरा अधिकार है। यात्री अब नियमों की जानकारी के अभाव में आपस में नहीं उलझेंगे।

"यात्रियों के बीच मिडिल बर्थ को लेकर अक्सर बहस की स्थिति बन जाती है। ऐसे मामलों में टीटीई को रेलवे के नियम लागू कराने का अधिकार दिया गया है ताकि यात्रा सुखद रहे।"

लोअर और अपर बर्थ के लिए क्या हैं नियम?

रेलवे ने लोअर बर्थ के लिए भी नियम स्पष्ट किए हैं। दिन के समय लोअर बर्थ वाले यात्री को अपनी सीट सह-यात्रियों के साथ साझा करनी होगी। यह सामाजिक शिष्टाचार और रेलवे नियम दोनों है।

इससे अन्य यात्रियों को बैठने के लिए पर्याप्त जगह मिल सकेगी। हालांकि, रात 10 बजे के बाद लोअर बर्थ पूरी तरह से उसी यात्री की होगी जिसके नाम पर वह आरक्षित की गई है।

अपर बर्थ के यात्रियों के लिए नियम काफी सरल हैं। अपर बर्थ का यात्री पूरे सफर के दौरान अपनी सीट पर सो सकता है या आराम कर सकता है। उन्हें नीचे बैठने की बाध्यता नहीं है।

साइड बर्थ और आरएसी की स्थिति

साइड लोअर बर्थ के मामले में, दिन के सफर के दौरान सीट साझा करनी पड़ सकती है। यह स्थिति विशेष रूप से तब उत्पन्न होती है जब कोई आरएसी यात्री उसी कोच में सफर कर रहा हो।

रात के समय साइड लोअर सीट पर केवल उसी यात्री का अधिकार रहेगा जिसके नाम पर टिकट कंफर्म है। साइड अपर बर्थ वाला यात्री दिन में नीचे बैठ सकता है, लेकिन रात में उसे ऊपर जाना होगा।

रेलवे का मानना है कि इन स्पष्ट दिशा-निर्देशों से यात्रियों को अपने अधिकारों का पता चलेगा। इससे न केवल विवाद कम होंगे, बल्कि वरिष्ठ नागरिकों और दिव्यांगों की यात्रा भी आरामदायक बनेगी।

इन नियमों के सख्ती से पालन होने से ट्रेनों में अनुशासन बना रहेगा। रेलवे प्रशासन ने यात्रियों से अपील की है कि वे इन नियमों का पालन करें और सह-यात्रियों का सहयोग करें।

निष्कर्षतः, रेलवे के ये कदम ट्रेन यात्रा को अधिक व्यवस्थित और शांतिपूर्ण बनाने की दिशा में एक बड़ा बदलाव हैं। अब यात्री बिना किसी मानसिक तनाव के अपनी यात्रा का आनंद ले सकेंगे।

*Edit with Google AI Studio

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