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राजस्थान

ईसरदा बांध: जुलाई तक होगा पूरा: राजस्थान के ईसरदा बांध का काम जुलाई तक होगा पूरा, सवाई माधोपुर और दौसा के लाखों लोगों को मिलेगा पीने का पानी

जोगेन्द्र सिंह शेखावत

मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास ने ईसरदा बांध परियोजना की समीक्षा की और अधिकारियों को जुलाई तक काम पूरा करने के निर्देश दिए। इससे दौसा और सवाई माधोपुर के 1256 गांवों को पेयजल मिलेगा।

HIGHLIGHTS

  • ईसरदा बांध का निर्माण कार्य इस वर्ष जुलाई तक हर हाल में पूरा कर लिया जाएगा।
  • परियोजना से दौसा और सवाई माधोपुर जिलों के 1256 गांवों को पेयजल की आपूर्ति होगी।
  • 1,038.65 करोड़ रुपये की लागत वाली यह परियोजना पूर्वी राजस्थान के लिए मील का पत्थर है।
  • दूसरे चरण के पूरा होने पर बांध की कुल भंडारण क्षमता 10.77 टीएमसी तक बढ़ जाएगी।
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जयपुर | राजस्थान के सवाई माधोपुर और दौसा जिलों के ग्रामीण क्षेत्रों के लिए एक बहुत बड़ी और सुखद खबर सामने आई है। इन क्षेत्रों में पेयजल की किल्लत को जड़ से खत्म करने वाले ईसरदा बांध का निर्माण कार्य इसी साल जुलाई तक पूरा हो जाएगा। मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास ने शनिवार को परियोजना की प्रगति की गहन समीक्षा की। उन्होंने स्पष्ट किया कि प्रोजेक्ट का काम अब अपने अंतिम चरण में पहुंच चुका है। अधिकारियों को प्रथम चरण के शेष कार्यों को समय पर पूरा करने के सख्त निर्देश दिए गए हैं।

सरकार की प्राथमिकता में है प्रोजेक्ट

मुख्य सचिव ने बताया कि मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा और राज्य सरकार इस बांध परियोजना को समय पर पूरा करने के लिए पूरी तरह संकल्पबद्ध है। सरकार का लक्ष्य है कि प्रदेश के हर घर तक स्वच्छ पेयजल की पहुंच सुनिश्चित की जा सके। इसी क्रम में धरातल पर काम कर रहे अधिकारियों के साथ विस्तृत चर्चा की गई है। जल्द ही यह महत्वाकांक्षी योजना धरातल पर पूरी तरह क्रियान्वित होगी। इससे लाखों लोगों के जीवन स्तर में बड़ा सुधार देखने को मिलेगा।

पेयजल के साथ भूजल में सुधार

यह परियोजना न केवल पीने का पानी उपलब्ध कराएगी, बल्कि टोंक जिले के गिरते भूजल स्तर में भी सुधार लाएगी। 1,038.65 करोड़ रुपये की भारी-भरकम लागत से तैयार हो रहा यह बांध पूर्वी राजस्थान के लिए जीवन रेखा साबित होगा। यह बांध परियोजना राम जल सेतु लिंक का एक अत्यंत महत्वपूर्ण घटक है। मुख्य सचिव ने निर्माण स्थल का दौरा कर कार्यों की वास्तविक प्रगति, गुणवत्ता और तकनीकी मानकों का बारीकी से अवलोकन किया। उन्होंने साइट इंजीनियर्स को आवश्यक दिशा-निर्देश भी दिए।

तकनीकी मजबूती पर विशेष ध्यान

मुख्य सचिव ने बांध पर लिफ्ट, इनटेक वेल और पम्प सिस्टम की जानकारी ली। जल प्रबंधन को आधुनिक बनाने के लिए स्काडा (SCADA) सिस्टम के उपयोग पर भी चर्चा की गई। इन्स्पेक्शन टनल के कार्यों को भी जल्द पूरा करने को कहा गया है। उन्होंने कहा कि इस परियोजना में कार्यरत इंजीनियरों के पास आम जनता की सेवा करने का एक बड़ा अवसर है। अधिकारियों का उत्साहवर्धन करते हुए उन्होंने कहा कि वे पूरे समर्पण के साथ इस काम को अंतिम रूप दें।

लाखों की आबादी को मिलेगा लाभ

परियोजना के प्रथम चरण में 256 मीटर तक जल संग्रहण किया जाएगा। इसके माध्यम से दौसा जिले के 1079 गांवों और 5 शहरों को पानी मिलेगा। वहीं सवाई माधोपुर के 177 गांवों और एक शहर की प्यास बुझेगी। कुल मिलाकर लगभग 35.13 लाख की आबादी को इस योजना से सीधा लाभ पहुंचने वाला है। दूसरे चरण के पूरा होने के बाद बांध की भंडारण क्षमता 10.77 टीएमसी तक पहुंच जाएगी, जो भविष्य की जरूरतों के लिए पर्याप्त होगी।

अधिकारियों के साथ उच्च स्तरीय बैठक

मुख्य सचिव ने सवाई माधोपुर जिला कलेक्टर काना राम और टोंक कलेक्टर टीना डाबी के साथ बैठक की। उन्होंने पुलिस अधीक्षकों के साथ कानून व्यवस्था पर भी चर्चा की। जून माह में वे एक बार फिर प्रोजेक्ट का निरीक्षण करेंगे। इसके अलावा टोंक सर्किट हाउस में भी विभिन्न जन कल्याणकारी योजनाओं की प्रगति जांची गई। सरकार का पूरा ध्यान विकास कार्यों की गुणवत्ता और उन्हें तय समय सीमा में पूरा करने पर केंद्रित है।

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