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जबलपुर क्रूज हादसा: चश्मदीदों की आपबीती: जबलपुर क्रूज हादसा: "मम्मी का हाथ छूट गया", चश्मदीदों की जुबानी मौत का मंजर

प्रदीप बीदावत

जबलपुर के बरगी डैम में हुए क्रूज हादसे में 9 लोगों की मौत, चश्मदीदों ने बताया कैसे मौत को करीब से देखा।

HIGHLIGHTS

  • जबलपुर के बरगी डैम में क्रूज पलटने से 9 लोगों की मौत हो गई और 4 अब भी लापता हैं।
  • हादसे में 13 साल की सिया ने अपनी मां, छोटे भाई और नानी को हमेशा के लिए खो दिया।
  • रोशन आनंद ने बताया कि कर्मचारियों ने मदद नहीं की और उन्हें खुद लाइफ जैकेट निकालनी पड़ी।
  • तूफान के कारण क्रूज अनियंत्रित हुआ और लाइफ बोट पहुंचने में आधे घंटे की देरी हुई।
jabalpur bargi dam cruise accident survivors eyewitness account

जबलपुर | मध्य प्रदेश के जबलपुर में बरगी डैम में हुआ क्रूज हादसा किसी डरावने सपने से कम नहीं था। इस हादसे में अब तक 9 लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है।

हादसे के समय क्रूज पर करीब 50 लोग सवार थे। अचानक आए तूफान ने सब कुछ तहस-नहस कर दिया। बचाव कार्य अभी भी जारी है और लापता लोगों की तलाश की जा रही है।

मौत के मंजर की खौफनाक दास्तां

हादसे में बचे रोशन आनंद बताते हैं कि वह अपने परिवार के सात सदस्यों के साथ क्रूज पर सवार थे। शुरुआत में सब कुछ सामान्य था और लोग नजारे देख रहे थे।

लेकिन लौटते वक्त अचानक मौसम ने करवट ली और तेज आंधी चलने लगी। देखते ही देखते डैम की लहरें समुद्र की तरह ऊंची उठने लगीं और क्रूज डगमगाने लगा।

रोशन बताते हैं कि उन्होंने मौत को बहुत करीब से देखा। वह और उनकी पत्नी किसी तरह बाहर निकल पाए, लेकिन उनके लिए वह पल बेहद डरावना और अनिश्चित था।

कर्मचारियों की बड़ी लापरवाही

रोशन के मुताबिक, क्रूज पर महिलाएं और बच्चे ज्यादा थे। जब स्थिति बिगड़ी, तो वहां मौजूद कर्मचारियों ने यात्रियों की कोई मदद नहीं की। वे मूकदर्शक बने रहे।

हैरानी की बात यह है कि यात्रियों को खुद लाइफ जैकेट केबिन से ढूंढकर निकालनी पड़ी। रोशन कहते हैं, "अगर हम खुद जैकेट नहीं पहनते, तो शायद कोई नहीं बचता।"

स्टाफ की इस बेरुखी ने कई लोगों की जान जोखिम में डाल दी। क्रूज में पानी भरने लगा था और लोगों के पास बचने का कोई रास्ता नजर नहीं आ रहा था।

साढ़े तीन घंटे की वो दहशत

पानी में गिरने के बाद रोशन अपने 11 साल के बच्चे को ढूंढते रहे। उन्होंने बताया कि लाइफ बोट आने में काफी देर हो गई, जिससे हालात और ज्यादा बिगड़ गए।

"साढ़े तीन घंटे तक हम बच्चे को ढूंढते रहे। हमने उम्मीद छोड़ दी थी, लेकिन वो मिल गया। आज उसका जन्मदिन है, ये दिन हम कभी नहीं भूलेंगे।"

रोशन की आंखों में उस शाम की दहशत साफ देखी जा सकती है। वह बताते हैं कि अगर लाइफ बोट आधा घंटा पहले आ जाती, तो कई और जानें बच सकती थीं।

सिया की अधूरी रह गई छुट्टियां

दिल्ली से आई 13 साल की सिया के लिए यह छुट्टियां मातम में बदल गईं। उसने इस हादसे में अपनी मां, छोटे भाई और नानी को हमेशा के लिए खो दिया।

सिया बताती है कि क्रूज पर लोग बॉलीवुड गानों का मजा ले रहे थे। तभी अचानक ऊंची लहरें उठीं और पानी क्रूज के ऊपरी फ्लोर तक तेजी से आने लगा।

मां और भाई का साथ छूटा

सिया ने बताया कि उसकी मां ने छोटे भाई त्रिशान को लाइफ जैकेट से अपने साथ बांध लिया था। सिया भगवान से बस सबकी सलामती की प्रार्थना कर रही थी।

अगली सुबह जब मां और भाई के शव मिले, तो वे एक-दूसरे से लिपटे हुए थे। इस हादसे ने सिया के हंसते-खेलते परिवार को पूरी तरह से तबाह कर दिया है।

प्रशासन और सुरक्षा पर सवाल

इस हादसे ने डैम पर्यटन की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। लाइफ जैकेट की उपलब्धता और इमरजेंसी रिस्ंस को लेकर लोगों में भारी गुस्सा है।

फिलहाल रेस्क्यू ऑपरेशन जारी है और लापता लोगों की तलाश की जा रही है। पूरा जबलपुर इस वक्त शोक में डूबा हुआ है और घायलों का अस्पताल में इलाज चल रहा है।

इस घटना ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि सुरक्षा नियमों की अनदेखी कितनी भारी पड़ सकती है। प्रशासन अब इस पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच में जुटा हुआ है।

*Edit with Google AI Studio

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