जयपुर | जयपुर में बेटियों को सशक्त और जागरूक बनाने के लिए एक सराहनीय पहल की जा रही है। महिला अधिकारिता विभाग के पन्नाधाय सुरक्षा एवं सम्मान केन्द्र द्वारा 'जागृति सप्ताह' का आयोजन किया जा रहा है।
इस अभियान के तहत शहर के विभिन्न स्कूलों में जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। हाल ही में चौड़ा रास्ता और महावीर मार्ग स्थित राजकीय विद्यालयों में छात्राओं को उनके अधिकारों की जानकारी दी गई।
बेटियों की सुरक्षा और जागरूकता की पहल: जयपुर में ‘जागृति सप्ताह’ के जरिए बेटियों को किया जा रहा सशक्त, बाल विवाह रोकने और सुरक्षा के लिए दी गई विशेष ट्रेनिंग
जयपुर में महिला अधिकारिता विभाग द्वारा आयोजित 'जागृति सप्ताह' के तहत छात्राओं को उनके अधिकारों, सुरक्षा कानूनों और सरकारी योजनाओं के बारे में विस्तार से जानकारी दी गई। इस कार्यक्रम का उद्देश्य बालिकाओं को आत्मनिर्भर और जागरूक बनाना है।
HIGHLIGHTS
- जयपुर के स्कूलों में 'जागृति सप्ताह' के तहत जागरूकता कार्यक्रमों का आयोजन किया गया।
- बालिकाओं को बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम और उसके दुष्परिणामों के बारे में बताया गया।
- आत्मरक्षा, प्राथमिक उपचार और आपातकालीन हेल्पलाइन नंबरों की जानकारी साझा की गई।
- साइबर अपराधों से बचने के लिए डिजिटल सुरक्षा और कौशल विकास पर जोर दिया गया।
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बाल विवाह के खिलाफ हुंकार
कार्यक्रम में बालिकाओं को बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम, 2006 के कड़े प्रावधानों के बारे में बताया गया। विशेषज्ञों ने समझाया कि बाल विवाह न केवल कानूनी अपराध है, बल्कि यह भविष्य के लिए भी घातक है।
इसके साथ ही राज्य सरकार द्वारा संचालित विभिन्न महिला एवं बालिका कल्याणकारी योजनाओं की जानकारी दी गई। छात्राओं को बताया गया कि वे किस प्रकार इन योजनाओं का लाभ उठाकर आगे बढ़ सकती हैं।
सुरक्षा और हेल्पलाइन नंबर
किसी भी आपात स्थिति में मदद के लिए बालिकाओं को हेल्पलाइन नंबर 1098, 112, 1090, 181 और 1930 को याद रखने की सलाह दी गई। ये नंबर उनकी सुरक्षा के लिए एक मजबूत कवच का काम करते हैं।
आजकल बढ़ते साइबर अपराधों को देखते हुए डिजिटल सुरक्षा पर भी विशेष सत्र आयोजित किया गया। उन्हें सिखाया गया कि सोशल मीडिया और इंटरनेट की दुनिया में खुद को कैसे सुरक्षित रखा जाए।
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आत्मनिर्भरता की ओर कदम
परामर्शदात्री सलोनी रावत ने छात्राओं को कौशल विकास और स्वरोजगार के प्रति प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि जब बेटियाँ हुनरमंद बनेंगी, तभी वे समाज में अपनी एक अलग और सशक्त पहचान बना पाएंगी।
कार्यक्रम के दौरान छात्राओं को आत्मरक्षा की तकनीकें और प्राथमिक उपचार के बारे में भी विस्तार से जानकारी दी गई। इस पूरी पहल का मुख्य उद्देश्य बेटियों को हर परिस्थिति के लिए मानसिक और शारीरिक रूप से तैयार करना है।
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