जयपुर | राजस्थान की राजधानी जयपुर के रसोई गैस उपभोक्ताओं के लिए प्रशासन ने एक बहुत ही महत्वपूर्ण और बड़ा फैसला सुनाया है।
जयपुर के जिला कलेक्टर संदेश नायक ने शहर में 'एक घर-एक गैस कनेक्शन' की नीति को कड़ाई से लागू करने के निर्देश दिए हैं।
इस नए आदेश के बाद अब उन परिवारों की मुश्किलें बढ़ सकती हैं जो घर में पीएनजी और एलपीजी दोनों का इस्तेमाल कर रहे हैं।
जयपुर: सरेंडर करना होगा गैस सिलेंडर: जयपुर कलेक्टर का बड़ा आदेश: अब एक घर में नहीं रहेंगे दो गैस कनेक्शन, 3 महीने में सरेंडर करना होगा सिलेंडर
जयपुर में 'एक घर-एक गैस कनेक्शन' नीति लागू कर दी गई है। जिन घरों में पीएनजी कनेक्शन है, उन्हें 3 महीने के भीतर अपना एलपीजी सिलेंडर सरेंडर करना अनिवार्य होगा।
HIGHLIGHTS
- जयपुर में 'एक घर-एक गैस कनेक्शन' की नीति को कड़ाई से लागू करने के निर्देश दिए गए हैं।
- पीएनजी कनेक्शन वाले घरों को 3 महीने के भीतर अपना एलपीजी सिलेंडर सरेंडर करना होगा।
- तेल कंपनियों के सर्वर ठप होने से सप्लाई चेन प्रभावित हुई है, जिसे सुधारने के प्रयास जारी हैं।
- गैस कंपनियां अब घर-घर जाकर लोगों को पीएनजी के फायदे और सुरक्षा के प्रति जागरूक करेंगी।
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3 महीने की समय सीमा तय
कलेक्टर ने स्पष्ट किया है कि जिन घरों में पाइप वाली गैस यानी पीएनजी (PNG) पहुंच चुकी है, उन्हें अपना पुराना सिलेंडर सरेंडर करना होगा।
प्रशासन ने इसके लिए उपभोक्ताओं को 3 महीने का समय दिया है। इस अवधि के बाद दो कनेक्शन रखना नियमों का उल्लंघन माना जाएगा।
शुक्रवार को हुई एक उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक में कलेक्टर ने गैस कंपनियों के अधिकारियों को इस संबंध में सख्त निर्देश जारी किए।
सरकार का मानना है कि एक ही घर में दो अलग-अलग प्रकार के गैस कनेक्शन होने से संसाधनों की बर्बादी होती है और वितरण प्रणाली प्रभावित होती है।
क्यों लिया गया यह बड़ा फैसला?
सरकार की मंशा है कि राज्य के संसाधनों का सही और समान वितरण हो सके। एक ही घर में दो कनेक्शन होने से जरूरतमंदों को दिक्कत होती है।
वर्तमान में रूस-यूक्रेन युद्ध और मध्य पूर्व के हालातों के कारण वैश्विक स्तर पर एलपीजी की सप्लाई में कुछ बाधाएं आ रही हैं।
ऐसे समय में पीएनजी को बढ़ावा देना सरकार की प्राथमिकता बन गई है ताकि गैस की किल्लत को कम किया जा सके और निर्भरता घटाई जा सके।
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सर्वर की समस्या से उपभोक्ता परेशान
जयपुर में यह आदेश ऐसे समय में आया है जब तेल कंपनियों के सर्वर में तकनीकी खराबी के कारण बुकिंग में काफी दिक्कतें आ रही हैं।
सर्वर ठप होने की वजह से उपभोक्ताओं को गैस बुकिंग के मैसेज नहीं मिल रहे हैं और बिलिंग की प्रक्रिया भी काफी धीमी हो गई है।
हालांकि, कलेक्टर ने आश्वस्त किया है कि राज्य में गैस सिलेंडरों की कोई वास्तविक कमी नहीं है, बस सप्लाई चेन में तकनीकी सुधार की जरूरत है।
कंपनियों को निर्देश दिया गया है कि वे अपने सर्वर को जल्द से जल्द ठीक करें ताकि आम जनता को सिलेंडर रिफिल करवाने में कोई परेशानी न हो।
कंपनियां अब खुद आएंगी आपके द्वार
कलेक्टर ने गैस कंपनियों को आदेश दिया है कि पीएनजी कनेक्शन देने की प्रक्रिया को बेहद सरल बनाया जाए ताकि आम जनता को परेशानी न हो।
अब कंपनियों के प्रतिनिधि खुद घर-घर जाकर लोगों को पीएनजी के फायदों और इसकी सुरक्षा मानकों के बारे में विस्तार से जानकारी देंगे।
कागजी कार्रवाई को कम करने के निर्देश दिए गए हैं ताकि लोग आसानी से एलपीजी से पीएनजी की ओर शिफ्ट हो सकें और सिलेंडर का बोझ कम हो।
पीएनजी के फायदे और सुरक्षा
पीएनजी यानी पाइप्ड नेचुरल गैस, एलपीजी के मुकाबले अधिक सुरक्षित और किफायती मानी जाती है। इसमें सिलेंडर खत्म होने का डर नहीं रहता।
यह चौबीसों घंटे उपलब्ध रहती है और उपभोक्ताओं को केवल उतनी ही राशि चुकानी होती है जितनी गैस उन्होंने वास्तव में उपयोग की है।
इसके साथ ही पीएनजी के उपयोग से रसोई में जगह की बचत होती है और भारी-भरकम सिलेंडर उठाने की झंझट से भी मुक्ति मिल जाती है।
क्या होगा अगर सिलेंडर सरेंडर नहीं किया?
प्रशासन अब डुप्लीकेट कनेक्शनों को खत्म करने के लिए घर-घर जाकर औचक निरीक्षण और चेकिंग अभियान चलाने की योजना बना रहा है।
अगर तय समय सीमा के भीतर सिलेंडर सरेंडर नहीं किया गया, तो भविष्य में उपभोक्ता की गैस बुकिंग को पूरी तरह से ब्लॉक किया जा सकता है।
इसके अलावा नियमों का उल्लंघन करने पर कानूनी कार्रवाई या भारी जुर्माना भी लगाया जा सकता है, इसलिए समय रहते सरेंडर करना ही बेहतर है।
उपभोक्ताओं के लिए जरूरी सलाह
यदि आपके घर में पीएनजी लाइन लग चुकी है, तो तुरंत अपनी नजदीकी गैस एजेंसी पर जाएं और सिलेंडर सरेंडर करने की प्रक्रिया पूरी करें।
एजेंसी से सरेंडर की रसीद लेना न भूलें, क्योंकि यह भविष्य में आपके पास एक महत्वपूर्ण कानूनी दस्तावेज के रूप में सुरक्षित रहेगी।
इस पहल से न केवल आपकी रसोई सुरक्षित होगी, बल्कि जयपुर की गैस वितरण प्रणाली में भी पारदर्शिता आएगी और कालाबाजारी पर रोक लगेगी।
प्रशासन की इस मुहिम का उद्देश्य हर घर तक स्वच्छ और सुलभ ईंधन पहुंचाना है, जिसमें आम जनता का सहयोग अत्यंत आवश्यक है।
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