जयपुर | राजस्थान की राजधानी जयपुर के वाटिका रोड स्थित गुलमोहर गार्डन में एक बेहद अजीबोगरीब और रहस्यमयी मामला सामने आया है। यहाँ एक खाली फ्लैट से महज 4 घंटे के भीतर 200 से अधिक कैब बुक कर ली गईं।
जयपुर में 200 'घोस्ट कैब' का रहस्य: जयपुर: खाली फ्लैट से 200 कैब बुक, रहस्यमयी 'घोस्ट पिकअप'
जयपुर के गुलमोहर गार्डन में खाली फ्लैट से हुई 200 'घोस्ट बुकिंग', ड्राइवरों को लगा भारी चूना।
HIGHLIGHTS
- जयपुर के गुलमोहर गार्डन के फ्लैट नंबर W-166 से 4 घंटे में 200 से ज्यादा कैब बुक की गईं।
- दोपहर 3 से शाम 7 बजे के बीच लगातार बुकिंग होती रही, लेकिन मौके पर कोई सवारी नहीं मिली।
- सभी ड्राइवरों ने जब बुकिंग नंबर पर कॉल किया, तो किसी ने भी फोन नहीं उठाया और नंबर अमान्य मिले।
- यह घटना किसी संगठित साइबर फ्रॉड की ओर इशारा कर रही है, जिससे ड्राइवरों को आर्थिक नुकसान हुआ।
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शनिवार की दोपहर को गुलमोहर गार्डन अचानक चर्चा का केंद्र बन गया। दोपहर 3 बजे से शाम 7 बजे के बीच फ्लैट नंबर W-166 से लगातार उबर ऐप पर बुकिंग होती रही।
हैरानी की बात यह है कि जब ड्राइवर लोकेशन पर पहुंचे, तो वहां उन्हें कोई सवारी नहीं मिली। ड्राइवरों को खाली हाथ लौटना पड़ा जिससे उन्हें काफी आर्थिक नुकसान हुआ है।
हैरान कर देने वाली 'घोस्ट बुकिंग' का रहस्य
सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि जिस फ्लैट से बुकिंग की जा रही थी, वह महीनों से खाली पड़ा है। वहां कोई भी व्यक्ति मौजूद नहीं था जो कैब बुक कर सके।
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मौके पर तैनात सुरक्षा गार्ड ने बताया कि दोपहर से ही टैक्सियों का तांता लगा रहा। हर 5-10 मिनट में एक नई कैब गेट पर खड़ी नजर आती थी जिससे भीड़ लग गई।
ड्राइवरों ने बताया कि ऐप में पिकअप लोकेशन गुलमोहर गार्डन ही दिखाई दे रही थी। लेकिन ड्रॉप लोकेशन हर बार अलग-अलग और बहुत दूर-दराज के इलाकों की दिखाई गई थी।
जब ड्राइवरों ने बुकिंग वाले नंबरों पर कॉल करने की कोशिश की, तो किसी ने फोन नहीं उठाया। कुछ नंबर तो स्विच ऑफ थे और कुछ पूरी तरह से अमान्य बता रहे थे।
साइबर शरारत या संगठित फ्रॉड?
एक ही लोकेशन से लगातार सैकड़ों बुकिंग होना सामान्य घटना नहीं मानी जा रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह किसी संगठित साइबर फ्रॉड का हिस्सा हो सकता है।
संभावना जताई जा रही है कि फेक अकाउंट या लोकेशन स्पूफिंग सॉफ्टवेयर के जरिए कैब एग्रीगेटर सिस्टम को चकमा दिया गया है। यह तकनीकी सुरक्षा पर एक बड़ा सवाल है।
बिना किसी मजबूत वेरिफिकेशन के इतनी बड़ी संख्या में बुकिंग होना चिंताजनक है। इससे न केवल ड्राइवरों का समय बर्बाद हुआ, बल्कि उनका महंगा ईंधन भी काफी खर्च हो गया।
"हमें लगा कि शायद वहां कोई बड़ा फंक्शन है, इसलिए इतनी गाड़ियां बुलाई गई हैं। लेकिन वहां पहुंचने पर सिर्फ सन्नाटा और खाली फ्लैट मिला।" - एक पीड़ित कैब ड्राइवर
पीड़ित ड्राइवरों ने इस घटना पर गहरा रोष व्यक्त किया है। उनका कहना है कि कंपनी को ऐसे फर्जी अकाउंट्स और संदिग्ध बुकिंग्स पर तुरंत रोक लगाने के लिए कदम उठाने चाहिए।
तकनीकी सुरक्षा और जांच की जरूरत
इस 'घोस्ट बुकिंग' कांड ने कैब सेवा की तकनीकी सुरक्षा और वेरिफिकेशन सिस्टम की कमजोरियों को उजागर कर दिया है। इससे ड्राइवरों को सीधा आर्थिक और मानसिक नुकसान पहुंचा है।
स्थानीय साइबर सेल को इस मामले की जानकारी दी गई है। जांच के बाद ही पता चल सकेगा कि यह किसी की शरारत थी या इसके पीछे कोई बड़ा गिरोह काम कर रहा है।
निष्कर्ष के तौर पर, यह घटना डिजिटल प्लेटफॉर्म्स की सुरक्षा खामियों की ओर इशारा करती है। भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए कंपनियों को सख्त वेरिफिकेशन प्रक्रिया अपनानी होगी।
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