जयपुर | जयपुर के सार्वजनिक परिवहन को एक नई और तेज रफ्तार मिलने वाली है। केंद्रीय आवासन एवं शहरी कार्य मंत्रालय ने जयपुर मेट्रो फेज-2 परियोजना के लिए 13,037.66 करोड़ की औपचारिक मंजूरी दे दी है। यह उत्तर-दक्षिण कॉरिडोर करीब 41 किलोमीटर लंबा होगा जो प्रहलादपुरा से टोडी मोड़ तक विस्तृत रहेगा। इस रूट पर कुल 36 मेट्रो स्टेशन विकसित किए जाएंगे जिससे शहर की कनेक्टिविटी और आवागमन बेहतर होगा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में 8 अप्रेल को हुई कैबिनेट बैठक में इस प्रस्ताव को मंजूरी मिली थी। महज 20 दिनों के भीतर औपचारिक आदेश जारी होना परियोजना की त्वरित गति को दर्शाता है।
जयपुर मेट्रो फेज-2: जयपुर मेट्रो 13,037 करोड़ की परियोजना को मिली मंजूरी
जयपुर मेट्रो फेज-2 के लिए केंद्र सरकार ने 13,037 करोड़ रुपये की औपचारिक स्वीकृति जारी की है।
HIGHLIGHTS
- केंद्र सरकार ने जयपुर मेट्रो फेज-2 के लिए 13,037.66 करोड़ रुपये के बजट को औपचारिक मंजूरी दे दी है।
- यह कॉरिडोर 41 किलोमीटर लंबा होगा और प्रहलादपुरा से टोडी मोड़ तक कुल 36 स्टेशन बनाए जाएंगे।
- परियोजना में केंद्र और राज्य सरकार की 50-50 प्रतिशत की हिस्सेदारी रहेगी जिससे वित्तीय भार कम होगा।
- वर्ष 2031 तक पूरा होने वाले इस प्रोजेक्ट से मेट्रो यात्रियों की संख्या 60 हजार से बढ़कर 30 लाख होगी।
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परियोजना का विस्तार और कार्यान्वयन
मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के निरंतर प्रयासों से इस महत्वपूर्ण और महत्वाकांक्षी योजना को गति मिली है। प्रथम पैकेज में प्रहलादपुरा से पिंजरापोल गौशाला तक के 12 किलोमीटर के कॉरिडोर पर काम शुरू होगा। इस शुरुआती हिस्से के लिए कार्यादेश अतिशीघ्र जारी करने की तैयारी की जा रही है। परियोजना के शेष पैकेज के लिए निविदाएं भी आगामी कुछ दिनों में जारी करने की दिशा में कार्य जारी है।
स्टेशनों की संरचना और रूट मैप
इस 41 किलोमीटर लंबे कॉरिडोर में कुल 36 मेट्रो स्टेशन बनाए जाएंगे। इनमें से 34 स्टेशन एलीवेटेड होंगे जबकि शहर के घने क्षेत्रों को देखते हुए 2 स्टेशनों को अंडरग्राउंड बनाया जाएगा। मेट्रो फेज-2 के जरिए जयपुर के उत्तर और दक्षिण छोर एक-दूसरे से सीधे जुड़ जाएंगे। इससे न केवल समय की भारी बचत होगी बल्कि यात्रियों को सुरक्षित और सुगम सफर का अनुभव मिलेगा।
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वित्तीय मॉडल और 50-50 की हिस्सेदारी
मेट्रो रेल नीति 2017 के तहत इस विशाल परियोजना का खर्च केंद्र और राज्य सरकार मिलकर उठाएंगे। दोनों ही सरकारों की इसमें 50-50 फीसदी की बराबर इक्विटी हिस्सेदारी तय की गई है। इस वित्तीय व्यवस्था से राजस्थान सरकार पर आर्थिक बोझ कम होगा और निर्माण कार्यों में तेजी आएगी। राजस्थान मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन लिमिटेड (RMRCL) इस पूरी परियोजना के क्रियान्वयन की जिम्मेदारी संभालेगा।
"जयपुर मेट्रो का यह विस्तार शहर के बुनियादी ढांचे को वैश्विक स्तर पर ले जाएगा। इससे न केवल यातायात सुगम होगा बल्कि स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी नई मजबूती मिलेगी।"
2031 तक पूरा करने का लक्ष्य
परियोजना को पूरी तरह से संचालित करने के लिए वर्ष 2031 का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। वर्तमान में जयपुर मेट्रो में प्रतिदिन लगभग 60 हजार यात्री सफर करते हैं जो एक सीमित आंकड़ा है। फेज-2 के शुरू होने के बाद यात्रियों की यह दैनिक संख्या बढ़कर 30 लाख से अधिक होने का अनुमान है। यह जयपुर की परिवहन व्यवस्था में एक क्रांतिकारी और ऐतिहासिक बदलाव लेकर आने वाला है।
विकसित राजस्थान का विजन
यह परियोजना 'विकसित भारत' और 'विकसित राजस्थान' के विजन को धरातल पर उतारने की दिशा में अहम है। इससे शहर में निजी वाहनों का दबाव कम होगा और प्रदूषण के स्तर में गिरावट आएगी। मेट्रो के विस्तार से जयपुर के पर्यटन क्षेत्र को भी जबरदस्त लाभ मिलेगा। पर्यटक आसानी से शहर के एक कोने से दूसरे कोने तक सुरक्षित यात्रा कर सकेंगे जिससे पर्यटन राजस्व में वृद्धि होगी। जयपुर मेट्रो फेज-2 न केवल यातायात के भारी दबाव को कम करेगी बल्कि शहर की आधुनिक पहचान को मजबूती देगी। 13 हजार करोड़ का यह निवेश जयपुर को भविष्य के महानगरों की श्रेणी में लाएगा।
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