thinQ360
thinQ360
🏠 टॉप 🔥 राजनीति 📍 राज्य 📰 लाइफ स्टाइल 🏏 खेल 🎬 मनोरंजन 📰 जालोर 👤 शख्सियत 💻 तकनीक ✍️ Blog ⭐ सफलता की कहानी 🚨 क्राइम 📰 मनचाही ▶️ YouTube
राज्य

जैसलमेर: EWS आरक्षण सुधार के लिए बड़ा आंदोलन, उठी मांग

बलजीत सिंह शेखावत

जैसलमेर में ईडब्ल्यूएस आरक्षण की विसंगतियों को दूर करने और पात्रता नियमों में बदलाव की मांग तेज हुई।

HIGHLIGHTS

  • जैसलमेर में ईडब्ल्यूएस जन जागृति मंच के नेतृत्व में पात्रता मानदंडों में संशोधन के लिए विशाल जनआंदोलन आयोजित किया गया।
  • पूर्व मंत्री धर्मेंद्र सिंह राठौड़ ने पांच एकड़ कृषि भूमि की सीमा को अव्यावहारिक बताते हुए इसे हटाने की पुरजोर मांग की।
  • आंदोलनकारियों ने चेतावनी दी कि वर्तमान आवास और भूमि संबंधी शर्तों के कारण जरूरतमंद युवा आरक्षण के लाभ से वंचित हो रहे हैं।
  • मंच ने केंद्र और राज्य स्तर की आरक्षण नीतियों में एकरूपता लाने और लचीला मॉडल अपनाने पर विशेष जोर दिया।
jaisalmer ews reservation reform protest rajasthan

जैसलमेर | राजस्थान के जैसलमेर जिले में आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS) के आरक्षण सुधार को लेकर एक विशाल जनआंदोलन ने जोर पकड़ लिया है। इस आंदोलन में बड़ी संख्या में युवाओं, किसानों और विभिन्न वर्गों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया। ईडब्ल्यूएस जन जागृति मंच के नेतृत्व में आयोजित इस कार्यक्रम में केंद्र सरकार से मौजूदा पात्रता मानदंडों में तत्काल संशोधन की मांग की गई है। आंदोलनकारियों का मानना है कि वर्तमान नियम जमीनी हकीकत से दूर हैं।

आरक्षण पात्रता मानदंडों में संशोधन की पुरजोर मांग

पूर्व मंत्री धर्मेंद्र सिंह राठौड़ ने सभा को संबोधित करते हुए कहा कि 2019 में लागू 10 प्रतिशत ईडब्ल्यूएस आरक्षण एक ऐतिहासिक निर्णय था। हालांकि, इसकी जटिल शर्तों ने इसके लाभ को काफी सीमित कर दिया है। उन्होंने जोर देकर कहा कि वर्तमान में लागू कई विसंगतिपूर्ण शर्तें वास्तविक जरूरतमंदों को इस आरक्षण के दायरे से बाहर कर रही हैं। इससे समाज के एक बड़े वर्ग में भारी असंतोष और रोष व्याप्त हो गया है। सरकारी भर्तियों और प्रतियोगी परीक्षाओं में ईडब्ल्यूएस वर्ग की भागीदारी उम्मीद के मुताबिक नहीं रही है। यह व्यवस्था की खामियों को उजागर करता है जिसे युवाओं के भविष्य के लिए तुरंत ठीक करने की आवश्यकता है। धर्मेंद्र सिंह राठौड़ ने विशेष रूप से पांच एकड़ कृषि भूमि की सीमा पर अपनी कड़ी आपत्ति दर्ज कराई। उन्होंने कहा कि आज की बदलती आर्थिक स्थिति और महंगाई में यह सीमा पूरी तरह से अव्यावहारिक हो चुकी है।

किसानों और युवाओं के लिए बढ़ती चुनौतियां

किसानों की आय खेती की बढ़ती लागत और कम उत्पादन के कारण लगातार घट रही है। इसके बावजूद, भूमि की पुरानी और सख्त शर्तों के कारण उनके बच्चे आरक्षण के लाभ से पूरी तरह वंचित रह जाते हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले परिवारों के पास जमीन तो है, लेकिन उससे होने वाली आय जीवनयापन के लिए पर्याप्त नहीं है। ऐसे में भूमि आधारित पात्रता मानदंड युवाओं के साथ अन्यायपूर्ण प्रतीत होते हैं। आवास से जुड़ी शर्तों को भी सामाजिक और पारिवारिक दृष्टि से अत्यंत चिंताजनक बताया गया है। इन नियमों के कारण संयुक्त परिवारों के टूटने का खतरा पैदा हो गया है जो हमारी संस्कृति के लिए हानिकारक है।

पारिवारिक संरचना पर आरक्षण नियमों का प्रभाव

पात्रता हासिल करने के लिए कई युवा अपने माता-पिता और संयुक्त परिवार से अलग रहने को मजबूर हो रहे हैं। यह स्थिति हमारी पारंपरिक सामाजिक व्यवस्था और पारिवारिक प्रेम पर गहरा प्रहार कर रही है। मंच ने स्पष्ट किया कि आरक्षण का उद्देश्य आर्थिक सहायता देना होना चाहिए, न कि परिवारों को विभाजित करना। इसलिए आवास संबंधी शर्तों में ढील देना वर्तमान समय की सबसे बड़ी और जायज मांग है। पूर्व मंत्री ने केंद्र और राज्य स्तर की नीतियों में मौजूद बड़ी असंगति का मुद्दा भी प्रमुखता से उठाया। उन्होंने बताया कि कई समुदाय राज्य में ओबीसी श्रेणी में हैं पर केंद्र में सामान्य श्रेणी में आते हैं।

"मौजूदा ईडब्ल्यूएस आरक्षण की शर्तें व्यावहारिक नहीं हैं। हमें एक ऐसे समावेशी मॉडल की आवश्यकता है जो वास्तव में गरीब और जरूरतमंद युवाओं को आगे बढ़ने का समान अवसर प्रदान कर सके।"

व्यावहारिक नीति और एकरूपता की आवश्यकता

राजस्थान में पूर्व में अपनाए गए लचीले मॉडल का उदाहरण देते हुए राष्ट्रीय स्तर पर भी वैसी ही नीति की मांग की गई। इससे पात्रता मानदंडों में एकरूपता आएगी और पारदर्शिता को बढ़ावा मिलेगा। मंच ने सरकार से भूमि और आवास संबंधी शर्तों को पूरी तरह समाप्त करने का आग्रह किया है। उनका मानना है कि केवल वार्षिक आय को ही पात्रता का मुख्य और एकमात्र आधार बनाया जाना चाहिए। नीति में एकरूपता आने से उन समुदायों को बड़ी राहत मिलेगी जो केंद्र और राज्य की अलग-अलग श्रेणियों के कारण भ्रमित रहते हैं। यह कदम सामाजिक न्याय की दिशा में एक मील का पत्थर साबित होगा। इस कार्यक्रम की शुरुआत छात्रसंघ अध्यक्ष जसवंतसिंह तेजमालता के स्वागत संबोधन से हुई। उन्होंने युवाओं से एकजुट होकर अपने अधिकारों के लिए संघर्ष करने का आह्वान किया और उपस्थित जनसमूह का आभार प्रकट किया। जैसलमेर से उठी यह आवाज अब प्रदेश के अन्य हिस्सों में भी पहुंचने लगी है। यदि सरकार ने समय रहते इन मांगों पर ध्यान नहीं दिया, तो आने वाले समय में यह आंदोलन और उग्र रूप ले सकता है।

*Edit with Google AI Studio

शेयर करें: