जालोर | रामसीन क्षेत्र में अतिक्रमण हटाने के नाम पर घुमंतू परिवारों के आशियाने उजाड़ दिए गए। कस्बे में अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई की गई। इस दौरान गाड़लिया लोहार परिवार के कच्चे-पक्के मकानों को तोड़ा गया है। कार्रवाई के बाद कई परिवार बेघर हो गए। वहीं, बच्चों के सपने भी मलबे में दब गए। कहने को राज्य सरकार घुमंतू परिवारों को बसाने के लिए भूखंड आवंटित कर रही है, लेकिन यहां उलटा काम हो रहा है।
Jalore: अतिक्रमण हटाने के नाम पर उजाड़े घुमंतू परिवारों के आशियाने
जालोर के रामसीन में अतिक्रमण हटाने के नाम पर गाड़लिया लोहार परिवारों के आशियाने उजाड़ दिए गए। बिना किसी पूर्व सूचना के हुई इस कार्रवाई से कई परिवार खुले आसमान के नीचे आ गए हैं और न्याय की गुहार लगा रहे हैं।
HIGHLIGHTS
- जालोर के रामसीन में बिना नोटिस के गाड़लिया लोहार परिवारों के घर तोड़े गए।
- पीडि़तों के पास बिजली कनेक्शन और राशन कार्ड जैसे वैध दस्तावेज मौजूद थे।
- पूर्व विधायक पूराराम चौधरी के कोष से यहाँ हैंडपंप और लाइटें लगवाई गई थीं।
- पीडि़त परिवारों ने भूमाफिया की मिलीभगत का आरोप लगाते हुए कलेक्टर से न्याय मांगा।
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बगैर सूचना ध्वस्त कर दिए मकान
पीडि़तों ने बताया कि खसरा संख्या-2680 स्थित इस बस्ती में वे लोग वर्षों से निवासरत हैं। उनके पास बिजली कनेक्शन, जन आधार कार्ड और राशन कार्ड जैसे दस्तावेज भी मौजूद हैं, जो उनके निवास को प्रमाणित करते हैं। बावजूद इसके प्रशासन पुलिस बल और कुछ निजी व्यक्तियों के साथ जेसीबी मशीन लेकर मौके पर पहुंचे तथा बिना किसी पूर्व सूचना के मकानों को ध्वस्त कर दिया।
विधायक कोष से मिले थे बिजली-पानी
पीडि़तों का कहना है कि पूर्व विधायक पूराराम चौधरी ने विधायक कोष से इस क्षेत्र में हैंडपंप और सोलर लाइट भी लगवाई थी, जो यह दर्शाता है कि बस्ती लंबे समय से आबाद थी। इस सम्बंध में पीडि़त परिवारों ने जिला कलक्टर से मुलाकात कर न्याय की गुहार लगाई है। मांग रखी कि उनके लिए तत्काल वैकल्पिक आवास उपलब्ध कराया जाए एवं दोषियों पर सख्त कार्रवई की भी मांग रखी। मांगे पूरी नहीं होने पर धरना-प्रदर्शन की चेतावनी दी है।
भूमाफिया के इशारे पर कार्रवाई का आरोप
समाज के लोगों ने आरोप लगाया कि इस कार्रवाई में भूृमाफिया की मिलीभगत है। इसके बावजूद भूमाफिया के इशारे पर पुलिस-प्रशासन ने अतिक्रमण के नाम पर बस्ती को उजाड़ दिया। कार्रवाई का सबसे ज्यादा असर उन छोटे-छोटे बच्चों पर पड़ा है, जिनके सिर से छत छिन गई है। कल तक अपने आंगन में खेलने वाले बच्चों के सपने खुले आसमां में बिखरे पड़े हैं। भविष्य की अनिश्चितता से बीच उनके मन में एक ही सवाल है कि उनका कसूर क्या था।
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