रांची | झारखंड में दो राज्यसभा सीटों पर होने वाला चुनाव बेहद दिलचस्प हो गया है। यह चुनाव अब महागठबंधन और एनडीए, दोनों के लिए प्रतिष्ठा का सवाल बन चुका है। आंकड़ों में भले ही महागठबंधन मजबूत दिखे, लेकिन 25 सरप्लस वोटों का गणित और क्रॉस वोटिंग की आशंका ने मुकाबले को त्रिकोणीय और अप्रत्याशित बना दिया है।
झारखंड: राज्यसभा चुनाव 25 सरप्लस वोटों पर टिका पूरा खेल
झारखंड में दो राज्यसभा सीटों पर त्रिकोणीय मुकाबला। 25 सरप्लस वोट और क्रॉस वोटिंग का डर बढ़ा रहा रोमांच।
HIGHLIGHTS
- झारखंड में दो राज्यसभा सीटों के लिए त्रिकोणीय मुकाबला।
- जीत का समीकरण 25 सरप्लस वोटों पर निर्भर।
- निर्दलीय प्रत्याशी को जीत के लिए 4 और वोटों की जरूरत।
- क्रॉस वोटिंग रोकने के लिए कांग्रेस और JMM अलर्ट।
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क्या है 25 सरप्लस वोटों का गणित?
झारखंड की 81 सदस्यीय विधानसभा में जीत का जादुई आंकड़ा 28 वोटों का है। दो सीटों पर जीत सुनिश्चित करने के लिए कुल 56 वोटों की आवश्यकता होती है।
महागठबंधन के पास संख्या बल है, लेकिन दोनों उम्मीदवारों की जीत के बाद भी 25 वोट अतिरिक्त (सरप्लस) बचते हैं, जो पूरे खेल को बदलने की क्षमता रखते हैं।
एनडीए के पाले में 24 वोट
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इन 25 सरप्लस वोटों में से 24 वोट एनडीए के पास हैं, जिसमें भाजपा के 21 और 3 सहयोगी दलों के विधायक शामिल हैं। एक वोट निर्दलीय विधायक का है।
यही 25 वोटों का समीकरण है, जिस पर निर्दलीय अरबपति प्रत्याशी परिमल नाथवानी की उम्मीदें टिकी हुई हैं। एनडीए ने उन्हें अपना समर्थन दिया है।
निर्दलीय प्रत्याशी को 4 वोटों की दरकार
एनडीए के 24 विधायकों का समर्थन मिलने के बाद भी परिमल नाथवानी को जीत के लिए 4 और वोटों की जरूरत है। यह 4 वोट उन्हें महागठबंधन में सेंधमारी करके ही मिल सकते हैं।
राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि अगर कुछ विधायक क्रॉस वोटिंग करते हैं या किसी का वोट रद्द हो जाता है, तो परिणाम पूरी तरह से पलट सकता है।
राजनीतिक विश्लेषक भी इस चुनाव पर स्पष्ट राय देने से बच रहे हैं, क्योंकि अंतिम समय में द्वितीय वरीयता के वोट भी निर्णायक साबित हो सकते हैं।
कांग्रेस-JMM की एकजुटता की चुनौती
संभावित क्रॉस वोटिंग को रोकने के लिए कांग्रेस और जेएमएम पूरी तरह से सतर्क हो गए हैं। कांग्रेस ने अपने सभी विधायकों और मंत्रियों के साथ बैठक कर एकजुट रहने के सख्त निर्देश दिए हैं।
पार्टी किसी भी तरह के 'डैमेज कंट्रोल' से बचने के लिए हर संभव प्रयास कर रही है। वहीं, महागठबंधन के प्रत्याशी जेएमएम के बैजनाथ राम और कांग्रेस के प्रणव झा भी अपनी जीत को लेकर आश्वस्त हैं।
यह चुनाव न केवल उम्मीदवारों के भाग्य का फैसला करेगा, बल्कि झारखंड में दोनों प्रमुख गठबंधनों की एकजुटता और राजनीतिक प्रबंधन की भी कड़ी परीक्षा लेगा। अंतिम परिणाम अब पूरी तरह से विधायकों की वफादारी और वोटों के सटीक प्रबंधन पर निर्भर करता है।
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