झुंझुनूं | वीरों की भूमि झुंझुनूं ने शनिवार को अपने अमर सपूत और देश के सर्वोच्च वीरता सम्मान 'परमवीर चक्र' से सम्मानित कंपनी हवलदार मेजर पीरू सिंह शेखावत को उनके 78वें बलिदान दिवस पर श्रद्धांजलि अर्पित की। इस अवसर को शहर में 'शौर्य दिवस' के रूप में पूरी गरिमा के साथ मनाया गया।
झुंझुनूं: परमवीर पीरू सिंह का 78वां बलिदान दिवस, 51 वीरांगनाएं सम्मानित
झुंझुनूं में 'शौर्य दिवस' पर अमर शहीद को नमन किया गया, 51 वीरांगनाओं और वीर सपूतों के परिजनों का भव्य सम्मान हुआ।
HIGHLIGHTS
- झुंझुनूं में परमवीर पीरू सिंह का 78वां बलिदान दिवस 'शौर्य दिवस' के रूप में मनाया गया।
- समारोह में 51 वीरांगनाओं और कीर्ति व वीर चक्र विजेताओं सहित वीर सपूतों के परिजनों को सम्मानित किया गया।
- वक्ताओं ने युवाओं से सैनिकों को अपना आदर्श मानने और समाज से जातिवाद खत्म करने का आह्वान किया।
- पीरू सिंह को 1948 के भारत-पाक युद्ध में टीथवाल सेक्टर में अदम्य साहस के लिए मरणोपरांत परमवीर चक्र मिला था।
संबंधित खबरें
शहीद स्मारक पर भव्य आयोजन
लायंस क्लब के तत्वावधान में झुंझुनूं शहर स्थित शहीद पीरू सिंह सर्किल पर पुष्पांजलि कार्यक्रम आयोजित किया गया। इसके बाद शहीद स्मारक पर एक भव्य शौर्य दिवस समारोह हुआ, जिसमें जिला कलेक्टर डॉ. अरुण गर्ग सहित कई गणमान्य नागरिकों ने पुष्प अर्पित कर अमर वीर को श्रद्धांजलि दी।
51 वीरांगनाओं और परिजनों का सम्मान
समारोह के दौरान राष्ट्र के लिए सर्वोच्च बलिदान देने वाले वीरों के परिवारों का सम्मान किया गया। इनमें शहीद पीरू सिंह शेखावत के परिजनों के साथ कीर्ति चक्र विजेता महेंद्र सिंह और वीर चक्र विजेता कैप्टन अयूब खान के परिजन भी शामिल थे।
संबंधित खबरें
इसके अतिरिक्त, 51 वीरांगनाओं को शॉल ओढ़ाकर और स्मृति चिह्न भेंट कर उनके त्याग और समर्पण के लिए सम्मानित किया गया।
वक्ताओं ने दिए प्रेरणादायक संदेश
कार्यक्रम में कई वक्ताओं ने अपने विचार रखे और युवाओं को प्रेरित किया।
'सैनिकों को मानें आदर्श, अपराधियों को नहीं'
यशवर्धन सिंह शेखावत ने युवाओं को संबोधित करते हुए कहा, "हमारे आदर्श वो वीर सैनिक होने चाहिए जो देश के लिए छाती पर गोली खाते हैं, न कि कोई अपराधी।" उन्होंने साइबर क्राइम और 'डिजिटल अरेस्ट' जैसे खतरों से बचने के लिए भी टिप्स दिए।
'समाज से खत्म हो जातिवाद'
शौर्य चक्र विजेता ब्रिगेडियर (रिटायर्ड) जितेंद्र सिंह शेखावत ने कहा, "जिस तरह भारतीय सेना में कोई जातिवाद नहीं होता, उसी तरह हमें समाज से भी जातिवाद को खत्म करना होगा।" उन्होंने घोषणा की कि उनका फाउंडेशन पूर्व सैनिकों को आरएएस मेन्स परीक्षा के लिए कोचिंग भी प्रदान करेगा।
'शहीद कभी मरते नहीं'
पूर्व आईएएस राजेंद्र सिंह शेखावत ने कहा कि शहीद अपने विचारों और शौर्य गाथाओं के रूप में पीढ़ियों के दिलों में हमेशा जीवित रहते हैं। जिला कलेक्टर डॉ. अरुण गर्ग ने भी झुंझुनूं की वीर भूमि को नमन किया।
टीथवाल के रणबांकुरे का अदम्य साहस
झुंझुनूं के बेरी गांव में जन्मे पीरू सिंह 1936 में 6 राजपूताना राइफल्स में भर्ती हुए थे। 18 जुलाई 1948 को जम्मू-कश्मीर के टीथवाल सेक्टर में दुश्मन के बंकरों पर हमला करते हुए वे गंभीर रूप से घायल हो गए। इसके बावजूद, उन्होंने कई पाकिस्तानी सैनिकों को मार गिराया और सिर में गोली लगने से वीरगति को प्राप्त हुए।
वक्ताओं ने इस बात पर भी गर्व व्यक्त किया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा अंडमान-निकोबार के एक द्वीप का नाम 'पीरू सिंह द्वीप' रखा गया है, जो इस अमर बलिदानी को एक सच्ची श्रद्धांजलि है।
*Edit with Google AI Studio