दिल्ली | शाहदरा के गोरखा पार्क स्थित श्री राजमाता झंडेवाला मंदिर में एक ऐतिहासिक आध्यात्मिक समागम का आयोजन किया गया। यहाँ जूना अखाड़ा के अंतरराष्ट्रीय प्रवक्ता और दिल्ली संत महामंडल के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्रीमहंत नारायण गिरि महाराज का भव्य अभिनंदन हुआ।
सिक्कों से तुले श्रीमहंत नारायण गिरि: जूना अखाड़ा: 13 मढ़ी के अध्यक्ष नारायण गिरि का भव्य सम्मान
दिल्ली में स्वामी राजेश्वरानंद ने श्रीमहंत नारायण गिरि को सिक्कों से तौलकर सम्मानित किया।
HIGHLIGHTS
- श्रीमहंत नारायण गिरि महाराज को जूना अखाड़ा की 13 मढ़ी का अध्यक्ष बनाया गया है।
- दिल्ली के शाहदरा स्थित श्री राजमाता झंडेवाला मंदिर में भव्य सम्मान समारोह आयोजित हुआ।
- स्वामी राजेश्वरानंद महाराज ने नारायण गिरि महाराज को सिक्कों से तौलकर अभिनंदन किया।
- सम्मान में प्राप्त सिक्कों की राशि को बेटियों के सामूहिक विवाह में दान किया जाएगा।
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जूना अखाड़ा की 13 मढ़ी के अध्यक्ष का भव्य स्वागत
सिद्धपीठ श्री दूधेश्वर नाथ मठ महादेव मंदिर गाजियाबाद के पीठाधीश्वर श्रीमहंत नारायण गिरि महाराज को जूना अखाड़ा की 13 मढ़ी का अध्यक्ष नियुक्त किया गया है। उनकी इस नई जिम्मेदारी पर पूरे संत समाज में खुशी की लहर है।
मंदिर समूह के परमाध्यक्ष स्वामी राजेश्वरानंद महाराज के पावन सानिध्य में आयोजित इस समारोह में नारायण गिरि महाराज का स्वागत पुष्प वर्षा और इत्र की खुशबू के साथ किया गया। भक्तों ने उन पर फूलों की मालाओं की झड़ी लगा दी।
समारोह का सबसे विशेष आकर्षण महाराजश्री का 'तुलादान' रहा। सनातन धर्म और संतों के जयकारों के बीच स्वामी राजेश्वरानंद महाराज ने उन्हें सिक्कों से तौलकर सम्मानित किया। यह दृश्य देख श्रद्धालु भाव-विभोर हो उठे।
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पद और प्रतिष्ठा के साथ बढ़ती है जिम्मेदारी
इस अवसर पर स्वामी राजेश्वरानंद महाराज ने समाज और संतों के बीच के अटूट रिश्ते पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि जब समाज किसी को उच्च पद प्रदान करता है, तो वह केवल सम्मान नहीं होता।
स्वामी जी ने जोर देकर कहा कि पद मिलने के साथ ही व्यक्ति का समाज के प्रति कर्तव्य बोध और जिम्मेदारी भी कई गुना बढ़ जाती है। नारायण गिरि महाराज इस जिम्मेदारी को निभाने में पूरी तरह सक्षम हैं।
उन्होंने आगे कहा कि नारायण गिरि महाराज केवल संतों की ही सेवा नहीं कर रहे, बल्कि वे समाज के दबे-कुचले और पिछड़े वर्ग के उत्थान के लिए भी निरंतर कार्य कर रहे हैं।
महाराजश्री द्वारा शिक्षा, स्वास्थ्य और सनातन संस्कृति के प्रचार-प्रसार हेतु अनेक कल्याणकारी प्रकल्प चलाए जा रहे हैं। उनकी सेवा की मिसाल आज हर भक्त और संत के लिए प्रेरणादायक बनी हुई है।
बेटियों के कन्यादान में समर्पित होगी सम्मान राशि
सम्मान के प्रत्युत्तर में श्रीमहंत नारायण गिरि महाराज ने अपनी उदारता का परिचय दिया। उन्होंने घोषणा की कि उन्हें सम्मान स्वरूप जिन सिक्कों से तौला गया है, वे उनका व्यक्तिगत उपयोग नहीं करेंगे।
"स्वामी राजेश्वरानंद महाराज द्वारा मुझे प्रदान किए गए ये सभी सिक्के कल होने वाले सामूहिक विवाह समारोह में बेटियों को उपहार स्वरूप भेंट किए जाएंगे।"
नारायण गिरि महाराज ने विनम्रतापूर्वक कहा कि वे स्वयं को भगवान और सनातन धर्म का एक छोटा सा सेवक मानते हैं। इस सम्मान ने समाज के प्रति उनके समर्पण भाव को और अधिक दृढ़ कर दिया है।
उन्होंने स्वामी राजेश्वरानंद महाराज की भी प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि स्वामी जी एक ऐसे संत हैं जो सदैव दीन-दुखियों की सेवा में लगे रहते हैं और उन्हें किसी पद की लालसा नहीं है।
संत समाज ने जताई प्रसन्नता और गर्व
दिल्ली संत महामंडल के संगठन मंत्री और जूना अखाड़ा के सचिव श्रीमहंत कंचन गिरि महाराज ने इस आयोजन को गौरवपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि यह सम्मान पूरे संत समाज की गरिमा को बढ़ाता है।
महामंडल के कोषाध्यक्ष महंत स्वामी धीरज पूरी महाराज ने भी अपने विचार व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि श्रीमहंत नारायण गिरि महाराज का जीवन हम सभी के लिए एक आदर्श मार्गदर्शिका के समान है।
सद्गुरु राजदरबार के प्रबंधक राम वोहरा ने बताया कि मंदिर परिसर में महाराजश्री के आगमन पर भक्तों का उत्साह चरम पर था। विभिन्न शहरों से आए संतों ने भी महाराजश्री को शुभकामनाएं दीं।
इस समारोह ने यह संदेश दिया कि सनातन धर्म में संतों का सम्मान उनके त्याग और सेवा भाव के कारण होता है। अंत में आरती और प्रसाद वितरण के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ।
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