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लोंगवा: एक घर, दो देश: नागालैंड का अनोखा गांव लोंगवा: जहां किचन भारत में और बेडरूम म्यांमार में है, जानें यहां पहुंचने का पूरा तरीका

बलजीत सिंह शेखावत

नागालैंड का लोंगवा गांव भारत-म्यांमार सीमा पर स्थित एक अनोखी जगह है, जहां ग्रामीणों के पास दोहरी नागरिकता है और ग्राम प्रमुख का घर दोनों देशों में बंटा हुआ है।

HIGHLIGHTS

  • लोंगवा गांव के निवासियों को भारत और म्यांमार दोनों देशों की दोहरी नागरिकता प्राप्त है।
  • गांव के मुखिया (आंग) का घर आधा भारत में और आधा म्यांमार की सीमा में स्थित है।
  • कोन्याक नागा जनजाति के लोग बिना पासपोर्ट और वीजा के दोनों देशों में आ-जा सकते हैं।
  • पर्यटकों के लिए यहां का नजदीकी हवाई अड्डा असम का डिब्रूगढ़ है, जो 140 किमी दूर है।
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मोन, नागालैंड | गर्मियों की छुट्टियां शुरू हो चुकी हैं और लोग अब भीड़भाड़ वाले हिल स्टेशनों के बजाय ऑफबीट जगहों की तलाश कर रहे हैं। अगर आप इस समर वेकेशन कुछ अलग अनुभव करना चाहते हैं, तो नागालैंड का लोंगवा गांव आपके लिए एक यादगार गंतव्य साबित हो सकता है। यह गांव अपनी भौगोलिक स्थिति और संस्कृति के कारण दुनिया भर में मशहूर है।

एक छत के नीचे दो देश

लोंगवा गांव भारत और म्यांमार की अंतरराष्ट्रीय सीमा पर स्थित है। यहाँ की सबसे रोमांचक बात यह है कि गांव के मुखिया, जिन्हें 'आंग' कहा जाता है, उनका घर ठीक सीमा रेखा पर बना है। उनके घर का किचन भारत में पड़ता है, जबकि सोने का कमरा (बेडरूम) म्यांमार की सीमा में आता है। यहाँ रहने वाले लोग एक ही छत के नीचे रहते हुए दो देशों की हवा में सांस लेते हैं।

दोहरी नागरिकता और अनोखी जनजाति

यहाँ रहने वाली कोन्याक नागा जनजाति के लोगों को भारत और म्यांमार दोनों देशों की नागरिकता मिली हुई है। फ्री मूवमेंट रेजिम (FMR) के तहत यहाँ के स्थानीय निवासियों को बिना वीजा और पासपोर्ट के सीमा पार करने की अनुमति है। वे दोनों देशों में काम कर सकते हैं और अपनी संस्कृति का निर्वाह बिना किसी रुकावट के करते हैं। यह भाईचारा और सांस्कृतिक एकता का एक अद्भुत उदाहरण है।

इतिहास और बंटवारे की कहानी

लोंगवा गांव का दो हिस्सों में बंटना ब्रिटिश शासन काल की देन है। जब भारत और बर्मा (अब म्यांमार) के बीच सीमा रेखा खींची गई, तो वह इस गांव के बिल्कुल बीच से होकर गुजरी। अंग्रेजों के इस फैसले के बावजूद ग्रामीणों ने अपनी एकता बनाए रखी। आज यहाँ के लोग दोनों देशों के त्योहारों को समान उत्साह के साथ मनाते हैं और दोनों देशों के पासपोर्ट रखने का अधिकार रखते हैं।

कैसे पहुंचें लोंगवा?

लोंगवा जाने के लिए सबसे नजदीकी हवाई अड्डा असम का डिब्रूगढ़ है। वहां से आप टैक्सी के जरिए मोन जिले तक पहुंच सकते हैं। रेल मार्ग से आने वाले यात्रियों के लिए तिनसुकिया रेलवे स्टेशन सबसे पास है। मोन टाउन से लोंगवा की दूरी लगभग 42 किलोमीटर है, जिसे स्थानीय वाहनों या निजी टैक्सी से तय किया जा सकता है। सड़क मार्ग का सफर पहाड़ी नजारों से भरपूर और रोमांचक होता है।

यात्रा के लिए जरूरी सुझाव

नागालैंड में प्रवेश करने के लिए भारतीय नागरिकों को इनर लाइन परमिट (ILP) लेना अनिवार्य है, जिसे आसानी से ऑनलाइन पोर्टल से प्राप्त किया जा सकता है। पहाड़ों में मौसम पल-पल बदलता है, इसलिए अपने साथ हल्की जैकेट और आरामदायक जूते जरूर रखें। यहाँ अधिकांश लेनदेन भारतीय रुपयों में होता है, लेकिन पहाड़ी क्षेत्र होने के कारण अपने साथ पर्याप्त नकद (Cash) रखना एक समझदारी भरा फैसला होगा।

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