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राजस्थान

रामदेवरा मारवाड़ महासम्मेलन का शंखनाद: रामदेवरा में मारवाड़ महासम्मेलन: 'सर्वोदय कलश' से जातिवाद मिटाने का संकल्प, मेघराज सिंह रॉयल ने दिया बेरोजगारी खत्म करने का सोलर मॉडल

प्रदीप बीदावत

जैसलमेर के रामदेवरा में आयोजित ऐतिहासिक मारवाड़ महासम्मेलन में सर्व समाज ने एकजुट होकर जातिवाद के खात्मे का संकल्प लिया। उद्योगपति मेघराज सिंह रॉयल ने बेरोजगारी दूर करने के लिए सौर ऊर्जा और शिक्षा पर आधारित एक क्रांतिकारी विजन पेश किया।

HIGHLIGHTS

  • रामदेवरा में आयोजित 'मारवाड़ महासम्मेलन' में सर्व समाज ने 'सर्वोदय कलश' में जल प्रवाहित कर जातिवाद के खात्मे की शपथ ली।
  • उद्योगपति मेघराज सिंह रॉयल ने राजस्थान की 10% बंजर भूमि से 45 लाख युवाओं को रोजगार देने का सोलर मॉडल पेश किया।
  • सम्मेलन में एआई (AI) और बड़ी कॉर्पोरेट रिटेल कंपनियों को 'ईस्ट इंडिया कंपनी 2.0' बताते हुए स्थानीय व्यापार बचाने का आह्वान किया गया।
  • यूनाइटेड ग्लोबल पीस फाउंडेशन के माध्यम से मेधावी छात्रों को आईएएस और आईपीएस की तैयारी के लिए निशुल्क संसाधनों की घोषणा की गई।

रामदेवरा |  जैसलमेर के पावन तीर्थ स्थल रामदेवरा की धरा पर रविवार को एक नया इतिहास रचा गया। सामाजिक एकता मंच के तत्वावधान में आयोजित 'मारवाड़ महासम्मेलन' ने न केवल जनसैलाब को आकर्षित किया, बल्कि समाज की कुरीतियों के खिलाफ एक निर्णायक युद्ध का बिगुल भी फूंक दिया।
इस भव्य आयोजन का मुख्य केंद्र 'जल समागम' रहा। मारवाड़ के विभिन्न क्षेत्रों से आए लोगों ने अपने घरों से लाए जल को एक विशाल 'सर्वोदय कलश' में अर्पित किया। यह दृश्य समरसता का जीता-जागता उदाहरण था, जहां जाति और वर्ण की दीवारें ढहती नजर आईं।
सम्मेलन का उद्देश्य स्पष्ट था—जातिवाद का समूल नाश, बेरोजगारी का समाधान और पर्यावरण का संरक्षण। मारवाड़ की धरती पर बिना किसी राजनीतिक झंडे या जातीय पहचान के इतनी बड़ी संख्या में लोगों का जुटना एक बड़े सामाजिक बदलाव का संकेत है।

ऐतिहासिक 'जल समागम' और एकता का संकल्प

दोपहर के समय जब 'जल समागम' की प्रक्रिया शुरू हुई, तो पूरा वातावरण भावुकता से भर गया। समाज के हर वर्ग के व्यक्ति ने एक ही पात्र में जल प्रवाहित किया। इसे 'सर्वोदय कलश' का नाम दिया गया, जो सबके उदय और कल्याण का प्रतीक है।
उपस्थित जनसमूह ने संकल्प लिया कि वे अब जाति के आधार पर भेदभाव नहीं करेंगे। वक्ताओं ने कहा कि जिस तरह जल मिलकर एक हो जाता है, उसी तरह समाज को भी एकजुट होना होगा। यह आयोजन मारवाड़ की नई पहचान बनने की ओर अग्रसर है।

मेघराज सिंह रॉयल का बेरोजगारी उन्मूलन विजन

प्रख्यात उद्योगपति और यूनाइटेड ग्लोबल पीस फाउंडेशन के चेयरमैन मेघराज सिंह रॉयल ने सम्मेलन को संबोधित करते हुए एक क्रांतिकारी आर्थिक मॉडल प्रस्तुत किया। उन्होंने कहा कि मारवाड़ की सबसे बड़ी चुनौती बेरोजगारी है, जिसका समाधान हमारी अपनी धरती पर ही मौजूद है।
रॉयल ने सौर ऊर्जा की अपार संभावनाओं पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने सुझाव दिया कि यदि राजस्थान की मात्र 10 प्रतिशत बंजर भूमि का उपयोग सौर ऊर्जा के लिए किया जाए, तो प्रदेश की अर्थव्यवस्था पूरी तरह बदल सकती है। यह मॉडल सीधे तौर पर लाखों युवाओं को आत्मनिर्भर बना सकता है।
उन्होंने आंकड़ों के साथ समझाया कि 4 एकड़ जमीन पर 1 मेगावाट बिजली का उत्पादन किया जा सकता है। इससे सालाना लगभग 50 लाख रुपये की आय संभव है। इस मॉडल से मारवाड़ के 45 लाख युवाओं को सीधे तौर पर रोजगार से जोड़ा जा सकता है।

शिक्षा और प्रशासनिक सेवाओं पर जोर

मेघराज सिंह रॉयल ने शिक्षा के गिरते स्तर और संसाधनों के अभाव पर चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि मारवाड़ के बच्चे 90 प्रतिशत से अधिक अंक लाने के बावजूद संसाधनों की कमी के कारण प्रशासनिक सेवाओं में नहीं पहुंच पाते हैं।
यूनाइटेड ग्लोबल पीस फाउंडेशन ने ऐसे मेधावी बच्चों की जिम्मेदारी उठाने का निर्णय लिया है। फाउंडेशन अब प्रतिभावान युवाओं को आईएएस और आईपीएस की तैयारी के लिए सभी आवश्यक संसाधन उपलब्ध कराएगा, ताकि शासन-प्रशासन में योग्य नेतृत्व पहुंच सके।

तकनीक की सुनामी और 'ईस्ट इंडिया कंपनी 2.0'

युवाओं को भविष्य की चुनौतियों के प्रति सचेत करते हुए रॉयल ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) को एक बड़ी चुनौती बताया। उन्होंने कहा कि आने वाले समय में तकनीक कई पारंपरिक नौकरियों को खत्म कर देगी, इसलिए कौशल विकास अनिवार्य है।
उन्होंने बड़ी कॉर्पोरेट रिटेल चेन्स और ऑनलाइन शॉपिंग कंपनियों की तुलना 'ईस्ट इंडिया कंपनी' से की। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि हमने अपने स्थानीय व्यापारियों और भाइयों का समर्थन नहीं किया, तो आने वाली पीढ़ियां आर्थिक गुलामी की ओर बढ़ेंगी।

जातिवाद की वैज्ञानिक व्याख्या

जातिवाद पर प्रहार करते हुए उन्होंने कहा कि प्राचीन समय में जाति केवल कार्य करने की शैली थी। कुम्हार, नाई या माली होना किसी के हुनर की पहचान थी, न कि ऊंच-नीच का पैमाना। इसे अंग्रेजों और स्वार्थी राजनेताओं ने जहर में बदल दिया।
उन्होंने समाज से आह्वान किया कि वे इस 'खारे पानी' रूपी जातिवाद को त्यागें। मेहनत और तकनीक के माध्यम से अपने जीवन को 'मीठा' बनाएं। समाज को बांटने वाली राजनीति से ऊपर उठकर राष्ट्र निर्माण और लोकनीति पर ध्यान केंद्रित करने की आवश्यकता है।

डॉ. विक्रांत सिंह तोमर: इंसानियत का संदेश

प्रसिद्ध मोटिवेटर डॉ. विक्रांत सिंह तोमर ने 'यूनाइटेड ग्लोबल पीस फाउंडेशन' के दर्शन को समझाया। उन्होंने कहा कि भारत की संस्कृति ने हमेशा सबको साथ लेकर चलने का काम किया है। उन्होंने अंधे और लंगड़े व्यक्ति की कहानी से समझाया कि संकट में एकता ही एकमात्र सहारा है। 

उन्होंने जांभोजी महाराज के पर्यावरण प्रेम और करणी माता की भक्ति को कर्म में ढालने की बात कही। डॉ. तोमर ने बताया कि फाउंडेशन न केवल भारत में बल्कि ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों में भी रोजगार के अवसर तलाश रहा है, ताकि राजस्थानी युवा वैश्विक मंच पर चमक सकें।

सांस्कृतिक विरासत और भाईचारा

जोधपुर विश्वविद्यालय के छात्रसंघ अध्यक्ष अरविंद सिंह भाटी ने मारवाड़ की 'अपनायत' पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि मारवाड़ का सामाजिक ढांचा हमेशा से परस्पर सहयोग पर आधारित रहा है। हर मांगलिक कार्य में सभी जातियों की भागीदारी इसकी खूबसूरती है। 
भाटी ने युवाओं को 'डिजिटल कोकीन' यानी सोशल मीडिया के दुरुपयोग से बचने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि युवाओं को सही को सही और गलत को गलत कहने का साहस जुटाना होगा। कर्म की प्रधानता ही समाज को सर्वोच्च स्थान दिला सकती है।

जमीनी स्तर पर बदलाव: मुकेश मेघवाल

यूजीपीएफ के मैनेजर मुकेश मेघवाल ने पिछले तीन महीनों के संघर्ष को साझा किया। उन्होंने बताया कि कैसे गांव-ढाणी जाकर 36 कौमों को इस मंच पर लाया गया। उन्होंने मेघराज सिंह रॉयल द्वारा किए जा रहे सामाजिक कार्यों जैसे कन्यादान और निशुल्क शिक्षा का विवरण दिया। 
उन्होंने बताया कि सूर्यगढ़ में 100 युवाओं को होटल मैनेजमेंट की ट्रेनिंग दी जा रही है, जहां उन्हें 25 हजार रुपये प्रतिमाह स्टाइपेंड भी मिल रहा है। यह इस बात का प्रमाण है कि मंच केवल बातें नहीं कर रहा, बल्कि धरातल पर समाधान दे रहा है।

संतों का आशीर्वाद और प्रेरणा

संत ओमदास महाराज ने अपने संबोधन में पुरुषार्थ को ही असली प्रतिष्ठा बताया। उन्होंने मेघवाल समाज के उन पूर्वजों को याद किया जिन्होंने ऐतिहासिक जलाशयों और किलों के निर्माण के लिए अपने प्राणों की आहुति दी। उन्होंने नफरत की दीवारें गिराने का आह्वान किया। 

युवा नेता मोती सिंह जोधा ने ऐतिहासिक उदाहरण देते हुए कहा कि भगवान राम से लेकर महाराणा प्रताप तक, सभी महान नायकों ने सर्व समाज को साथ लेकर युद्ध जीते थे। उन्होंने कहा कि जो मंच शिक्षा और रोजगार की बात करे, युवाओं को उसके साथ मजबूती से खड़ा होना चाहिए।

विरासत और आधुनिकता का संगम

कार्यक्रम की विधिवत शुरुआत उमराव सिंह जोधा और रईस अहमद मलिक द्वारा की गई। यहां 'मारवाड़ डॉक्यूमेंट्री' और 'सोच डॉक्यूमेंट्री' का प्रभावशाली प्रदर्शन किया गया। युवा लोकेंद्र सिंह भाटी ने मारवाड़ के गौरवशाली इतिहास पर अपना वक्तव्य दिया।  वहीं, माधो सिंह ने 'विरासत और संस्कृति' पर गहन चर्चा की, जिसके बाद बाबू खान जीनावती ने अपनी शानदार 'लोक कविता' की प्रस्तुति से उपस्थित लोगों में नई ऊर्जा का संचार कर दिया।

श्रीमती आशा मेघवंशी ने सामाजिक एकीकरण में महिलाओं की महत्वपूर्ण भूमिका पर प्रकाश डाला। वहीं, शिक्षाविद् प्रो. अमरीका सिंह ने समाज के उत्थान के लिए आधुनिक शिक्षा और तकनीकी ज्ञान को अनिवार्य बताया।

वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से जुड़े दिग्गज

पूर्व आईएएस ललित के. पंवार और प्रो. शकील परवेज ने वीडियो संदेश के माध्यम से सम्मेलन की सराहना की। उन्होंने कहा कि बेरोजगारी, जातिवाद और पर्यावरण जैसे विषयों पर यह मंथन राजस्थान के भविष्य के लिए मील का पत्थर साबित होगा।
सम्मेलन के अंत में एक विशेष पुस्तिका का वितरण किया गया, जिसने सबका ध्यान खींचा। इस पुस्तिका में सोलर कंपनियों की हकीकत और बेरोजगारी उन्मूलन के विस्तृत प्रोजेक्ट्स का खाका पेश किया गया था।

एक नई शुरुआत

रामदेवरा के इस महासम्मेलन ने यह सिद्ध कर दिया कि मारवाड़ का समाज अब जागरूक हो चुका है। 'एकात्म मानववाद' से 'सर्वोदय' की ओर बढ़ने का यह सफर अब रुकने वाला नहीं है।
रोजगार, शिक्षा और समरसता के त्रिकोण पर आधारित इस आंदोलन ने राजस्थान की राजनीति और सामाजिक ताने-बाने को एक नई दिशा दे दी है। कार्यक्रम का समापन दुर्जन सिंह के धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ, लेकिन यहां से निकले विचार अब हर गांव तक पहुंचेंगे।

 

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