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राजस्थान

किसानों की आय होगी दोगुनी!: सहजन की खेती से दोगुनी होगी आय: किसानों को मिला प्रशिक्षण

महेन्द्रसिंह शेखावत

बीकानेर में काजरी ने किसानों के लिए सहजन आधारित कृषि पर तीन दिवसीय प्रशिक्षण शुरू किया है। विशेषज्ञों का दावा है कि इस प्रणाली से किसानों की आय दोगुनी हो सकती है और उन्हें आर्थिक मजबूती मिलेगी।

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HIGHLIGHTS

  • बीकानेर में किसानों के लिए 'सहजन आधारित कृषि प्रणाली' पर तीन दिवसीय कौशल विकास प्रशिक्षण शुरू किया गया है।
  • मुख्य अतिथि डॉ. एन.के. शर्मा ने कहा कि सहजन की खेती अपनाकर किसान अपनी आय दोगुनी कर सकते हैं।
  • प्रशिक्षण में 25 किसान भाग ले रहे हैं, जिन्हें कार्यक्रम के बाद 100-100 सहजन के पौधे मुफ्त दिए जाएंगे।
  • विशेषज्ञों ने सहजन के बहुउपयोगी गुणों, मूल्य संवर्धन और विपणन पर महत्वपूर्ण जानकारी साझा की।
moringa based farming training to double farmers income in bikaner

बीकानेर |

भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) के केंद्रीय शुष्क क्षेत्र अनुसंधान संस्थान (काजरी) के क्षेत्रीय अनुसंधान केंद्र, बीकानेर में किसानों के लिए एक महत्वपूर्ण पहल की गई है। यहां 'सहजन आधारित कृषि प्रणाली' विषय पर तीन दिवसीय कृषक कौशल विकास प्रशिक्षण कार्यक्रम का शुभारंभ हुआ।

इस कार्यक्रम का आयोजन नाबार्ड द्वारा वित्त पोषित परियोजना के तहत किया जा रहा है। इसका मुख्य उद्देश्य किसानों को सहजन (मोरिंगा) आधारित कृषि प्रणाली अपनाने के लिए प्रोत्साहित करना है, ताकि वे सतत और आर्थिक रूप से सशक्त बन सकें।

सहजन आधारित कृषि से दोगुनी होगी आय

कार्यक्रम के उद्घाटन समारोह में स्वामी केशवानंद राजस्थान कृषि विश्वविद्यालय, बीकानेर के अनुसंधान निदेशक डॉ. एन.के. शर्मा मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। उन्होंने किसानों को संबोधित करते हुए कहा कि सहजन आधारित कृषि प्रणाली पश्चिमी राजस्थान के किसानों के लिए आय और पोषण सुरक्षा का एक मजबूत माध्यम बन सकती है।

डॉ. शर्मा ने जोर देकर कहा कि इस प्रणाली को अपनाकर किसान अपनी आय को दोगुना कर सकते हैं। उन्होंने सहजन को एक बहुउपयोगी और अत्यंत लाभकारी वृक्ष बताया, जिसके हर हिस्से का उपयोग होता है।

सहजन के विविध उपयोग

उन्होंने बताया कि सहजन के बीज, पत्तियां, जड़, तना, छाल और लकड़ी का उपयोग खाद्य, औषधि, कृषि, पशुपालन, जल शोधन और विभिन्न औद्योगिक कार्यों में किया जाता है। यह इसे एक बेहद मूल्यवान फसल बनाता है।

पशुओं के लिए भी फायदेमंद

डॉ. शर्मा ने यह भी बताया कि मोरिंगा की पत्तियां पशु आहार के रूप में भी बहुत उपयोगी हैं। इसके सेवन से न केवल पशुओं का स्वास्थ्य बेहतर होता है, बल्कि दूध और मांस उत्पादन में भी वृद्धि होती है। उन्होंने किसानों से सहजन के मूल्य संवर्धन पर विशेष ध्यान देने का आग्रह किया, ताकि वे इसके विभिन्न उत्पाद तैयार कर अतिरिक्त आय अर्जित कर सकें।

किसानों के लिए लाभकारी परियोजना

काजरी के अध्यक्ष डॉ. नवरत्न पंवार ने कहा कि यह परियोजना बीकानेर जिले के किसानों के लिए अत्यंत लाभकारी सिद्ध होगी। उन्होंने किसानों से इस प्रणाली को अपनाकर आर्थिक सुदृढ़ता की दिशा में आगे बढ़ने का आह्वान किया।

उन्होंने बताया कि मोरिंगा एक बहुउद्देशीय पौधा है, जिसका उपयोग भोजन और औषधि दोनों रूपों में होता है। यह अत्यधिक पौष्टिक होने के साथ-साथ अधिक बायोमास उत्पादन की क्षमता भी रखता है, जो इसे किसानों के लिए एक आदर्श विकल्प बनाता है।

किसानों को मिलेंगे मुफ्त पौधे

कार्यक्रम के मुख्य समन्वयक डॉ. वीरबल ने प्रशिक्षण की जानकारी देते हुए बताया कि इसमें बीकानेर जिले की विभिन्न तहसीलों से 25 किसान भाग ले रहे हैं। उन्होंने एक महत्वपूर्ण घोषणा करते हुए कहा कि प्रशिक्षण के बाद प्रत्येक प्रतिभागी किसान को 100 सहजन के पौधे निःशुल्क उपलब्ध कराए जाएंगे।

डॉ. वीरबल ने यह भी बताया कि इस परियोजना के तहत अब तक जिले के 500 से अधिक किसानों को प्रशिक्षित किया जा चुका है और इच्छुक किसानों को लगातार पौध वितरण भी किया जा रहा है। कार्यक्रम में किसानों को सहजन की उन्नत खेती, पौध उत्पादन, मूल्य संवर्धन और विपणन पर व्यावहारिक जानकारी भी दी गई। इस दौरान काजरी के वरिष्ठ तकनीकी अधिकारी डॉ. मनोज गोरा और डॉ. सीताराम जाट ने भी तकनीकी सहयोग प्रदान किया।

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