नागौर | राजस्थान की वीर धरा और नागौर जिले को अपनी समृद्ध संस्कृति, गौरवशाली इतिहास और अनोखी परंपराओं के लिए दुनिया भर में जाना जाता है। यहाँ के मायरे अक्सर अपनी भव्यता और करोड़ों के दान के कारण सुर्खियों में रहते हैं। लेकिन इस बार नागौर के हरसोलाव गांव से जो खबर सामने आई है, उसने भव्यता से कहीं अधिक मानवीय संवेदनाओं और आपसी भाईचारे के महत्व को रेखांकित किया है। यहाँ एक हिंदू भाई ने अपनी मुस्लिम बहन के घर मायरा भरकर रिश्तों की एक नई मिसाल पेश की है। यह घटना न केवल क्षेत्र में चर्चा का विषय बनी हुई है, बल्कि सोशल मीडिया पर भी लोग इस कदम की जमकर सराहना कर रहे हैं। इस हृदयस्पर्शी घटना ने स्पष्ट कर दिया है कि आपसी प्रेम और विश्वास की डोर मजहब की दीवारों से कहीं अधिक मजबूत होती है।
नागौर: हिंदू भाई ने मुस्लिम बहन को भरा भात: नागौर में हिंदू-मुस्लिम एकता की मिसाल: जाट भाई ने मुस्लिम बहन शबाना के घर भरा मायरा, 11 साल पुराने धर्म के रिश्ते ने जीता सबका दिल
नागौर के हरसोलाव गांव में सांप्रदायिक सौहार्द की एक अनोखी तस्वीर सामने आई है, जहां एक हिंदू भाई ने अपनी मुस्लिम बहन के बच्चों की शादी में मायरा भरकर भाईचारे का संदेश दिया। 11 साल पहले बने इस धर्म के रिश्ते ने आज समाज के सामने एक बड़ी मिसाल पेश की है।
HIGHLIGHTS
- नागौर के हरसोलाव में परसाराम जाट ने मुस्लिम बहन शबाना बानो के घर पहुंचकर भरा मायरा।
- 11 साल पहले शबाना ने परसाराम को बनाया था धर्म भाई, तब से निरंतर निभा रहे हैं यह पवित्र रिश्ता।
- शबाना के बेटे और बेटी की शादी में भाई ने नकद राशि और उपहार भेंट कर निभाई समाज में भाईचारे की रस्म।
- पूरे गांव और सोशल मीडिया पर हिंदू-मुस्लिम एकता के इस अनूठे और प्रेरणादायक उदाहरण की हो रही है जमकर तारीफ।
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11 साल पुराना है धर्म का यह रिश्ता
जानकारी के अनुसार, नारधणियों की ढाणी के निवासी परसाराम जाट और हरसोलाव निवासी कमाल खान की पत्नी शबाना बानो के बीच यह रिश्ता करीब 11 साल पहले शुरू हुआ था। उस समय शबाना ने परसाराम को अपना धर्म भाई बनाया था। तब से लेकर आज तक, परसाराम ने एक सगे भाई की तरह अपनी जिम्मेदारी निभाई है। रक्षाबंधन हो या कोई अन्य त्यौहार, दोनों परिवारों के बीच प्रेम का आदान-प्रदान निरंतर जारी रहा। मजहब कभी भी उनके स्नेह के बीच आड़े नहीं आया।
धूमधाम से भरा गया मायरा
हाल ही में शबाना बानो के बेटे और बेटी की शादी का अवसर आया। इस खास मौके पर परसाराम अपने साथियों और समाजबंधुओं के साथ हरसोलाव गांव पहुंचे। वे अपनी बहन के लिए मायरा (भात) लेकर आए थे। परसाराम और उनके साथ आए जाट समाज के लोगों ने शबाना बानो को 7,100 रुपए नकद, कपड़े और विभिन्न उपहार भेंट किए। उन्होंने शादी के सभी कार्यक्रमों में बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया और एक बड़े भाई का फर्ज पूरी शिद्दत से निभाया।
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मुस्लिम परिवार में गूंजे भाईचारे के स्वर
जब हिंदू भाई अपनी मुस्लिम बहन के घर भात भरने पहुंचा, तो वहां मौजूद हर शख्स की आंखें खुशी से नम हो गईं। शबाना के परिवार ने परसाराम और उनके साथियों का भव्य स्वागत किया। यह दृश्य सांप्रदायिक सौहार्द का जीवंत उदाहरण था। परसाराम के छोटे भाई सुखदेव नारधणियां ने इस मौके पर कहा कि उन्हें एक पल के लिए भी यह महसूस नहीं हुआ कि वे किसी दूसरे मजहब के परिवार में आए हैं। उनके लिए शबाना उनकी अपनी बहन है और यह रिश्ता दिल से जुड़ा है।
शबाना बानो ने दी भावुक प्रतिक्रिया
शबाना बानो ने अपनी खुशी जाहिर करते हुए कहा कि उनके धर्म भाई परसाराम ने हमेशा उनका साथ दिया है। उन्होंने कहा, "हमारे रिश्ते में कभी मजहब बीच में नहीं आया। भाई-बहन का प्यार ही हमारे लिए सबसे बड़ा धर्म है।" शबाना का ससुराल इग्यास गांव में है, लेकिन वर्तमान में उनका परिवार हरसोलाव में निवास कर रहा है। इस विवाह समारोह में गांव के कई गणमान्य लोग जैसे रामनिवास जांणी, धर्मेंद्र नारधणियां और कादर खान भी मौजूद रहे।
नागौर के मायरों की अनोखी परंपरा
नागौर जिला राजस्थान में अपने 'मायरा' भरने की परंपरा के लिए विशेष रूप से प्रसिद्ध है। यहाँ भाई अपनी बहन के बच्चों की शादी में अपनी सामर्थ्य से बढ़कर योगदान देते हैं। कभी करोड़ों के मायरे तो कभी बैलगाड़ियों पर आने वाले भात चर्चा में रहते हैं। लेकिन हरसोलाव का यह मायरा पैसे की चमक-धमक के लिए नहीं, बल्कि दिलों को जोड़ने वाली अपनी सादगी और संदेश के लिए याद रखा जाएगा। इसने समाज को यह संदेश दिया है कि मानवता और प्रेम ही सबसे बड़े मूल्य हैं।
समाज के लिए एक बड़ी प्रेरणा
आज के दौर में जब कई बार सांप्रदायिक तनाव की खबरें विचलित करती हैं, तब हरसोलाव की यह पहल एक ठंडी हवा के झोंके की तरह है। जाट समाज के लोगों द्वारा एक मुस्लिम परिवार में मायरा भरना सामाजिक एकता का प्रतीक बन गया है। पूरे गांव में इस रिश्ते की सराहना हो रही है। स्थानीय लोगों का मानना है कि ऐसे उदाहरण ही समाज में शांति और भाईचारे को बनाए रखने में मदद करते हैं। यह मायरा आने वाली पीढ़ियों के लिए भी एक मिसाल के तौर पर देखा जा रहा है।
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