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राजस्थान

नाहरगढ़ में बाघों का जन्मदिन: नाहरगढ़ में बाघिन रानी के 5 शावकों का जन्मदिन

मानवेन्द्र जैतावत

नाहरगढ़ बायोलॉजिकल पार्क में बाघिन रानी के पांच शावकों का पहला जन्मदिन धूमधाम से मनाया गया।

HIGHLIGHTS

  • जयपुर के नाहरगढ़ बायोलॉजिकल पार्क में बाघिन रानी के 5 शावकों का पहला जन्मदिन मनाया गया।
  • इन शावकों में सफेद बाघ 'विजय' पर्यटकों और पार्क प्रशासन के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र बना हुआ है।
  • पार्क में बाघों की कुल संख्या 15 हो गई है, जो किसी भी बायोलॉजिकल पार्क के लिए एक रिकॉर्ड उपलब्धि है।
  • जल्द ही इन पांचों शावकों को पर्यटकों के दीदार के लिए सार्वजनिक डिस्प्ले एरिया में लाया जाएगा।
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जयपुर | राजस्थान की राजधानी जयपुर के आमेर स्थित प्रसिद्ध नाहरगढ़ बायोलॉजिकल पार्क में इन दिनों उत्सव और उमंग का माहौल बना हुआ है। पार्क प्रशासन ने बाघिन ‘रानी’ के पांच शावकों का पहला जन्मदिन बड़े ही उत्साह और हर्षोल्लास के साथ मनाया।

इन पांचों शावकों का जन्म पिछले साल 27 अप्रैल को हुआ था। विजय, शौर्य, सूर्या, अंबे और वृंदा नाम के ये शावक अब एक वर्ष के हो चुके हैं और पार्क के वातावरण में पूरी तरह ढल चुके हैं।

सफेद बाघ 'विजय' बना आकर्षण का मुख्य केंद्र

पार्क के सहायक वन संरक्षक (एसीएफ) देवेंद्र सिंह राठौड़ ने बताया कि इन पांचों शावकों में सफेद बाघ 'विजय' सबसे ज्यादा आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। वह अपनी मां रानी के साथ अक्सर पार्क में अठखेलियां करता नजर आता है।

विजय के अलावा बाकी चार शावक पारंपरिक सुनहरे रंग के हैं। पार्क प्रशासन और वहां का समस्त स्टाफ इन नन्हे मेहमानों की दैनिक गतिविधियों को देखकर काफी उत्साहित रहता है और उनकी सुरक्षा का विशेष ध्यान रखता है।

वर्तमान में नाहरगढ़ बायोलॉजिकल पार्क में बाघों की कुल संख्या बढ़कर 15 हो गई है। इनमें दो सफेद बाघ शामिल हैं, जो देश के किसी भी अन्य बायोलॉजिकल पार्क की तुलना में एक बड़ी उपलब्धि है।

वन्यजीव संरक्षण और प्रजनन में मिली बड़ी सफलता

वरिष्ठ पशु चिकित्सक डॉ. अरविंद माथुर ने बताया कि देश में यह अपनी तरह का पहला दुर्लभ मामला है जब किसी बाघिन ने एक साथ पांच स्वस्थ शावकों को जन्म दिया और वे सभी सुरक्षित हैं।

इन सभी शावकों के बेहतर स्वास्थ्य के लिए उनका नियमित टीकाकरण किया गया है। उन्हें प्राकृतिक वातावरण में विकसित करने के लिए रोजाना कुछ समय खुले बाड़े में छोड़ा जाता है ताकि उनका मानसिक विकास भी हो सके।

"शावकों को प्राकृतिक रूप से विकसित करने के लिए हम उन्हें रोजाना खुले क्षेत्र में छोड़ते हैं, ताकि वे प्राकृतिक वातावरण को समझ सकें और उनका शारीरिक विकास बेहतर ढंग से हो सके।" - डॉ. अरविंद माथुर

पार्क प्रशासन की योजना है कि जल्द ही इन पांचों शावकों को पर्यटकों के दीदार के लिए सार्वजनिक डिस्प्ले में लाया जाए। इससे न केवल पर्यटकों को नया आकर्षण मिलेगा, बल्कि जयपुर के पर्यटन उद्योग को भी भारी बढ़ावा मिलेगा।

यह शानदार सफलता नाहरगढ़ बायोलॉजिकल पार्क को वन्यजीव संरक्षण और बाघों के सफल प्रजनन के क्षेत्र में वैश्विक स्तर पर एक अग्रणी पहचान दिलाती है। शावकों की बढ़ती उम्र के साथ पर्यटकों का उत्साह भी अब चरम पर है।

शावकों के इस पहले जन्मदिन ने न केवल पार्क के कर्मचारियों बल्कि समस्त वन्यजीव प्रेमियों के चेहरे पर भी खुशी की लहर दौड़ा दी है। आने वाले समय में यह पार्क वन्यजीव प्रेमियों के लिए राजस्थान का सबसे प्रमुख केंद्र बनकर उभरेगा।

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