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राजस्थान

नारीशक्ति वंदन: महिलाओं के सपनों की उड़ान: नारीशक्ति वंदन अधिनियम: लोकसभा और विधानसभाओं में 33% आरक्षण से सशक्त होगी देश की आधी आबादी, डॉ. भंड़ारी ने गिनाए लाभ

मानवेन्द्र जैतावत

भाजपा जिलाध्यक्ष डॉ. रक्षा भंड़ारी ने नारीशक्ति वंदन अधिनियम को महिला सशक्तिकरण की दिशा में ऐतिहासिक कदम बताया। उन्होंने इस अधिनियम के माध्यम से राजनीतिक भागीदारी और सामाजिक समानता पर जोर दिया।

HIGHLIGHTS

  • लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण का प्रावधान।
  • समर्थन के लिए विशेष मोबाइल नंबर 9667173333 पर मिस कॉल करने की अपील।
  • प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना के तहत 4.27 करोड़ महिलाओं को मिली सीधी नकद सहायता।
  • बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ अभियान से जन्म के समय लिंगानुपात में हुई महत्वपूर्ण वृद्धि।
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सिरोही | भाजपा जिलाध्यक्ष डॉ. रक्षा भंड़ारी ने सर्किट हाउस में आयोजित एक महत्वपूर्ण पत्रकार वार्ता के दौरान नारीशक्ति वंदन अधिनियम की सराहना की। उन्होंने इस अधिनियम को देश की करोड़ों महिलाओं के सपनों को नई उड़ान देने वाला एक क्रांतिकारी और ऐतिहासिक माध्यम करार दिया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में पारित यह अधिनियम महिला सशक्तिकरण और राजनीतिक भागीदारी को सुदृढ़ करने की दिशा में मील का पत्थर है।

ऐतिहासिक 33 प्रतिशत आरक्षण और नेतृत्व

डॉ. भंड़ारी ने बताया कि इस अधिनियम के माध्यम से लोकसभा एवं राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण सुनिश्चित किया गया है। यह कदम भारत की लोकतांत्रिक व्यवस्था को न केवल अधिक समावेशी बनाएगा, बल्कि निर्णय लेने की प्रक्रिया में महिलाओं की भूमिका भी बढ़ाएगा। लंबे समय से लंबित इस विधेयक के पारित होने से देश की आधी आबादी को अब उनका उचित और सम्मानजनक प्रतिनिधित्व मिल सकेगा।

समर्थन के लिए मिस कॉल अभियान

जिलाध्यक्ष ने आमजन और महिलाओं से इस ऐतिहासिक अधिनियम को अपना समर्थन देने की विशेष अपील की है। उन्होंने बताया कि मोबाइल नंबर 9667173333 पर मिस कॉल करके इस अभियान से जुड़ा जा सकता है और अपना समर्थन दर्ज कराया जा सकता है। डॉ. भंड़ारी ने इस दूरदर्शी पहल के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का आभार व्यक्त किया और इसे महिला नेतृत्व की नई शुरुआत बताया।

लैंगिक समानता और सामाजिक न्याय

डॉ. भंड़ारी के अनुसार, यह अधिनियम समाज में लैंगिक समानता को बढ़ावा देने और महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने में सहायक सिद्ध होगा। यह केवल एक कानूनी दस्तावेज नहीं है, बल्कि यह महिलाओं के दृष्टिकोण को राष्ट्रीय नीतियों में शामिल करने का एक सशक्त जरिया है। इससे ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों की महिलाओं को राजनीतिक नेतृत्व के शिखर तक पहुँचने का समान अवसर प्राप्त होगा।

सशक्त नारी से सशक्त राष्ट्र का निर्माण

भारत में महिला सशक्तिकरण के प्रति दृष्टिकोण अब पूरी तरह बदल चुका है, जो अब केवल सहायता तक सीमित नहीं रह गया है। अब ध्यान इस बात पर है कि महिलाओं के माध्यम से पूरे समाज और राष्ट्र को कैसे सशक्त और समृद्ध बनाया जाए। यह एक समग्र जीवनचक्र के निर्माण पर आधारित है, जहाँ बेटी के जन्म से लेकर उसकी शिक्षा और सुरक्षा तक का ध्यान रखा जाता है।

सरकारी योजनाओं के प्रभावशाली आंकड़े

वर्ष 2017 में शुरू हुई प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना (PMMVY) के तहत अब तक 4.27 करोड़ से अधिक महिलाओं को नकद सहायता मिली है। इस योजना के अंतर्गत लगभग 20,101 करोड़ रुपये की राशि सीधे लाभार्थियों के बैंक खातों में हस्तांतरित की जा चुकी है। पोषण 2.0 अभियान के तहत देश भर में 14 लाख आंगनवाड़ी केंद्र संचालित हैं, जो 9 करोड़ लोगों को प्रतिदिन सेवाएं दे रहे हैं।

बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ की सफलता

'बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ' पहल के कारण समाज की सोच में व्यापक बदलाव आया है और लिंगानुपात में सुधार देखा गया है। वर्ष 2015 में जन्म के समय जो लिंगानुपात 918 था, वह अब वर्ष 2025 तक बढ़कर 929 होने का अनुमान है। ये आंकड़े स्पष्ट करते हैं कि मोदी सरकार की नीतियां धरातल पर सकारात्मक सामाजिक परिवर्तन लाने में पूरी तरह सफल रही हैं।

विकास की नई दिशा और भविष्य

यह अधिनियम देश के सामाजिक-आर्थिक विकास में महिलाओं की भूमिका को और अधिक मजबूती प्रदान करने वाला साबित होगा। यह आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का एक बड़ा स्रोत बनेगा, जिससे बेटियां हर क्षेत्र में नेतृत्व करने के लिए प्रेरित होंगी। मोदी सरकार का यह कदम “सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास और सबका प्रयास” के मंत्र को चरितार्थ करता है।

उपस्थित गणमान्य जन

इस पत्रकार वार्ता के दौरान भाजपा जिला मीडिया प्रभारी रोहित खत्री और जिला उपाध्यक्ष हेमलता पुरोहित भी उपस्थित रहे। साथ ही महिला मोर्चा जिला अध्यक्ष दक्षा देवड़ा, कार्यालय मंत्री बाबूसिंह माकरोडा और मंजुला चारण सहित कई कार्यकर्ता मौजूद थे। सभी ने एक स्वर में नारीशक्ति वंदन अधिनियम को भारत के उज्ज्वल भविष्य की आधारशिला के रूप में स्वीकार किया।

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