नोएडा | उत्तर प्रदेश के नोएडा में हुई भीषण श्रमिक हिंसा के मामले में पुलिस को एक बड़ी कामयाबी मिली है। यूपी एसटीएफ ने इस पूरी साजिश के मास्टरमाइंड आदित्य आनंद को तमिलनाडु से गिरफ्तार कर लिया है।
आदित्य आनंद पर नोएडा पुलिस ने एक लाख रुपये का इनाम घोषित किया था। वह पिछले काफी समय से पुलिस की आंखों में धूल झोंककर फरार चल रहा था। उसकी गिरफ्तारी से इस केस में कई बड़े खुलासे होने की उम्मीद है।
noida Violence: नोएडा हिंसा का मास्टरमाइंड आदित्य आनंद गिरफ्तार: NIT जमशेदपुर से पढ़ा सॉफ्टवेयर इंजीनियर कैसे बना ₹1 लाख का इनामी?
यूपी एसटीएफ ने नोएडा में हुई श्रमिक हिंसा के मास्टरमाइंड आदित्य आनंद को तमिलनाडु से गिरफ्तार किया है। बिहार का रहने वाला यह सॉफ्टवेयर इंजीनियर एक लाख रुपये का इनामी था और लंबे समय से फरार चल रहा था।
HIGHLIGHTS
- आदित्य आनंद बिहार के हाजीपुर का रहने वाला है और एनआईटी जमशेदपुर से बीटेक कर चुका है।
- नोएडा पुलिस ने आदित्य पर एक लाख रुपये का नकद इनाम घोषित किया था।
- आदित्य ने 13 अप्रैल की हिंसा से पहले गुप्त बैठकें कर तोड़फोड़ का ब्लूप्रिंट तैयार किया था।
- यूपी एसटीएफ ने तकनीकी सर्विलांस के जरिए उसे तमिलनाडु से दबोचने में सफलता पाई है।
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कौन है आदित्य आनंद?
आदित्य आनंद मूल रूप से बिहार के वैशाली जिले के हाजीपुर का रहने वाला है। वह हाजीपुर सदर थाने के छोटी मढैया मोहल्ला निवासी अमित कुमार का बेटा है। उसकी उम्र करीब 28 वर्ष बताई जा रही है।
आदित्य की शिक्षा की बात करें तो उसने वैशाली के आरआर इंटर कॉलेज से 12वीं तक की पढ़ाई की। इसके बाद वह पटना चला गया और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने लगा। उसकी शैक्षणिक पृष्ठभूमि काफी मजबूत रही है।
वर्ष 2020 में उसने प्रतिष्ठित संस्थान एनआईटी (NIT) जमशेदपुर से बीटेक की डिग्री हासिल की। कैंपस प्लेसमेंट के जरिए उसका चयन एक निजी कंपनी में सॉफ्टवेयर इंजीनियर के तौर पर हुआ था। लेकिन उसका मन कहीं और ही था।
इंजीनियर से मास्टरमाइंड बनने का सफर
सॉफ्टवेयर इंजीनियर के रूप में काम करते हुए आदित्य 'मजदूर बिगुल' नाम के एक संगठन से जुड़ गया। धीरे-धीरे वह श्रमिकों के हक की लड़ाई के नाम पर उग्र गतिविधियों में शामिल होने लगा।
नोएडा पुलिस के मुताबिक, आदित्य ने अपनी तकनीकी सूझबूझ का इस्तेमाल हिंसा की साजिश रचने में किया। वह वर्तमान में नोएडा के सेक्टर-37 स्थित अरुण विहार में छिपकर रह रहा था और मजदूरों को भड़काने का काम करता था।
एसटीएफ के अधिकारियों ने बताया कि आदित्य ने ही डिजिटल माध्यमों का उपयोग करके मजदूरों को एकजुट किया। उसने गुप्त बैठकों के जरिए उपद्रव का पूरा ब्लूप्रिंट तैयार किया था, ताकि पुलिस को इसकी भनक न लगे।
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हिंसा की पूरी कहानी
13 अप्रैल को नोएडा के औद्योगिक क्षेत्र में श्रमिकों का आंदोलन अचानक उग्र हो गया था। यह विरोध प्रदर्शन वेतन वृद्धि, छंटनी और काम की खराब परिस्थितियों को लेकर शुरू हुआ था।
जांच में सामने आया कि इस हिंसा से पहले आदित्य ने 30 मार्च से 1 अप्रैल के बीच कई संगठनों के साथ बैठकें की थीं। इन्हीं बैठकों में आंदोलन को हिंसक रूप देने की रणनीति तय की गई थी।
प्रदर्शन के दौरान उपद्रवियों ने कई फैक्ट्रियों में तोड़फोड़ की और वाहनों को आग के हवाले कर दिया। इस घटना में नोएडा के औद्योगिक हब को भारी वित्तीय नुकसान हुआ और सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े हो गए।
कैसे हुई गिरफ्तारी?
एसटीएफ नोएडा के अपर पुलिस अधीक्षक राजकुमार मिश्रा ने बताया कि आदित्य आनंद का नाम फोटो और वीडियो फुटेज की जांच के बाद सामने आया। वह मजदूरों के बीच भड़काऊ भाषण देता हुआ दिखाई दिया था।
पुलिस ने जब उसकी तलाश शुरू की, तो वह अपना ठिकाना बदलकर भाग गया। तकनीकी सर्विलांस और खुफिया जानकारी की मदद से एसटीएफ ने उसका पीछा किया। आखिरकार उसे तमिलनाडु से गिरफ्तार कर लिया गया।
आदित्य के साथ इस साजिश में रूपेश रॉय और मनीषा चौहान भी शामिल थे। पुलिस इन दोनों को पहले ही गिरफ्तार कर चुकी है। मनीषा गोपालगंज की रहने वाली है, जबकि रूपेश छपरा का निवासी है।
पुलिस की सख्त कार्रवाई
नोएडा हिंसा मामले में पुलिस अब तक कई लोगों को जेल भेज चुकी है। आदित्य की गिरफ्तारी को इस मामले की सबसे बड़ी सफलता माना जा रहा है। पुलिस अब उससे पूछताछ कर रही है कि उसके पीछे और कौन से चेहरे थे।
इस गिरफ्तारी ने यह साफ कर दिया है कि कानून से कोई भी बच नहीं सकता। चाहे वह कितना भी पढ़ा-लिखा क्यों न हो। फिलहाल आदित्य को ट्रांजिट रिमांड पर नोएडा लाया जा रहा है, जहां उसे कोर्ट में पेश किया जाएगा।
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