दिल्ली |
Politics: सोनम वांगचुक के समर्थन में उतरे उमर अब्दुल्ला, दिल्ली कूच का ऐलान
जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम उमर अब्दुल्ला ने NEET पेपर लीक के खिलाफ अनशन कर रहे सोनम वांगचुक का समर्थन किया है। उन्होंने 20 जुलाई को दिल्ली आने की बात कही है।
HIGHLIGHTS
- उमर अब्दुल्ला ने सोनम वांगचुक की भूख हड़ताल का समर्थन किया।
- वांगचुक NEET पेपर लीक को लेकर जंतर-मंतर पर 19 दिनों से अनशन पर हैं।
- अब्दुल्ला ने 20 जुलाई को दिल्ली आने और अपनी आवाज उठाने की बात कही।
- डॉक्टरों के अनुसार, वांगचुक का वजन 9 किलोग्राम से अधिक कम हो गया है।
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सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक दिल्ली के जंतर-मंतर पर नीट पेपर लीक और परीक्षाओं में गड़बड़ी के खिलाफ भूख हड़ताल कर रहे हैं। अब उनके समर्थन में जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला भी उतर आए हैं। उन्होंने वांगचुक की भूख हड़ताल को लेकर गहरी चिंता व्यक्त की है। गुरुवार को वांगचुक के अनशन का 19वां दिन था।
क्या 20 जुलाई को दिल्ली आएंगे अब्दुल्ला
इस दौरान उमर अब्दुल्ला ने 20 जुलाई को दिल्ली आने के संकेत दिए हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि उनका कार्यक्रम नहीं बदलेगा।
सीएम अब्दुल्ला ने कहा, 'हमारे प्रोग्राम की जगह और तरीका बदल सकता है, लेकिन दिल्ली जाने का हमारा प्लान नहीं बदलेगा। हम कोने में छिपकर काम नहीं करेंगे।'
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उन्होंने आगे कहा, 'हम दिल्ली जाएंगे और अपनी आवाज उठाएंगे। हम देखेंगे कि आगे क्या करना है।'
केंद्र सरकार से की अपील
उमर अब्दुल्ला ने केंद्र सरकार से इस मामले में हस्तक्षेप करने की अपील की है। उन्होंने कहा कि सरकार को राजनीति से ऊपर उठकर मानवता और संवेदनशीलता का परिचय देना चाहिए।
उनके अनुसार, केंद्र सरकार को अब तक सोनम वांगचुक से बातचीत कर उन्हें अनशन समाप्त करने का आग्रह करना चाहिए था।
अब्दुल्ला ने चिंता जताते हुए कहा कि सोनम वांगचुक की तबीयत लगातार बिगड़ रही है और उनका वजन भी काफी कम हो गया है, इसके बावजूद मोदी सरकार की ओर से कोई पहल नहीं की गई है।
‘धर्मेंद्र प्रधान को देना चाहिए इस्तीफा’
पत्रकारों से बातचीत में पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि सोनम वांगचुक की मुख्य मांग राष्ट्रीय परीक्षाओं, विशेषकर NEET परीक्षा में हुई कथित अनियमितताओं और पेपर लीक को लेकर है।
उन्होंने कहा कि इन घटनाओं से लाखों छात्रों का भविष्य अंधकार में है, इसलिए केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को या तो इस्तीफा दे देना चाहिए या उन्हें पद से हटा दिया जाना चाहिए।
अन्ना हजारे के आंदोलन से की तुलना
उमर अब्दुल्ला ने इस विरोध प्रदर्शन की तुलना अन्ना हजारे के जन लोकपाल आंदोलन से की।
उन्होंने याद दिलाया कि तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के नेतृत्व वाली यूपीए सरकार ने अन्ना हजारे से बातचीत के लिए अपने मंत्रियों को भेजा था, जबकि वर्तमान केंद्र सरकार सोनम वांगचुक के आंदोलन के प्रति उदासीन बनी हुई है।
डॉक्टरों ने सेहत को लेकर जताई चिंता
इस बीच, सोनम वांगचुक का इलाज कर रहे डॉक्टरों ने उनके स्वास्थ्य को लेकर गंभीर चिंताएं व्यक्त की हैं।
उनके चिकित्सक डॉ. सतीश लांबा के अनुसार, 19 दिनों से लगातार भोजन न करने के कारण वांगचुक का वजन 9 किलोग्राम से अधिक कम हो गया है और अब यह 56.9 किलोग्राम रह गया है।
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