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राज्य

24 घंटे ट्रैक्टर का पीछा, मूंगफली खरीद में बड़ा फर्जीवाड़ा उजागर

गणपत सिंह मांडोली गणपत सिंह मांडोली 53

राजस्थान (Rajasthan) के पाली (Pali) में मूंगफली खरीद में बड़े घोटाले का खुलासा हुआ है। भास्कर (Bhaskar) की 20 दिन की जांच में सामने आया कि गुजरात (Gujarat) की मंडियों से सस्ती मूंगफली खरीदकर राजस्थान के एमएसपी (Minimum Support Price) केंद्रों पर महंगे दाम में बेची जा रही है।

HIGHLIGHTS

  1. 1 24 घंटे ट्रैक्टर का पीछा कर मूंगफली खरीद घोटाले का खुलासा। गुजरात से लाई गई मूंगफली राजस्थान के एमएसपी केंद्रों पर बेची जा रही। अधिकारियों, व्यापारियों और फर्जी किसानों की मिलीभगत से चल रहा फर्जीवाड़ा। एमएसपी केंद्रों पर रिश्वत लेकर जल्दी तुलाई की जा रही।
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मूंगफली घोटाला: 24 घंटे की रेकी से खुलासा

पाली: राजस्थान (Rajasthan) के पाली (Pali) में मूंगफली खरीद में बड़े घोटाले का खुलासा हुआ है। भास्कर (Bhaskar) की 20 दिन की जांच में सामने आया कि गुजरात (Gujarat) की मंडियों से सस्ती मूंगफली खरीदकर राजस्थान के एमएसपी (Minimum Support Price) केंद्रों पर महंगे दाम में बेची जा रही है।

एमएसपी खरीद में बड़ा फर्जीवाड़ा उजागर

किसानों को उनकी उपज का सही दाम दिलाने के लिए सरकार समर्थन मूल्य (एमएसपी) की गारंटी देती है। लेकिन, कुछ फर्जी किसान और व्यापारी इस सरकारी व्यवस्था का दुरुपयोग कर रहे हैं।

दैनिक भास्कर की 20 दिन की ग्राउंड इन्वेस्टिगेशन में इस बड़े फर्जीवाड़े का पर्दाफाश हुआ है।

गुजरात से राजस्थान तक मूंगफली का अवैध व्यापार

जांच में सामने आया कि गुजरात की मंडियों में पहले ही बिक चुकी मूंगफली को व्यापारी और दलाल दोबारा खरीद रहे हैं।

वे इसे 55 से 60 रुपए प्रति किलो में खरीदकर राजस्थान के एमएसपी केंद्रों पर 72.63 रुपए प्रति किलो में सरकार को बेच रहे हैं।

इस तरह एक ट्रैक्टर (औसतन 35 क्विंटल) पर सीधा 42 हजार रुपए का फायदा कमाया जा रहा है।

यदि रोज 40-50 ट्रैक्टर इस तरह पहुंचते हैं, तो सीजन में यह आंकड़ा करोड़ों में जा सकता है।

24 घंटे की रेकी से खुला राज

जालोर जिले के सांचौर और रानीवाड़ा क्षेत्र के एमएसपी केंद्रों पर हो रही तुलाई में एक बड़ा घोटाला सामने आया है।

यहां तुलाई की जा रही 60 प्रतिशत मूंगफली न तो स्थानीय खेतों में पैदा हुई है और न ही स्थानीय किसानों की है।

यह सारी मूंगफली गुजरात की नेनावा मंडी से लाई जा रही है। भास्कर टीम ने एक ट्रैक्टर की 24 घंटे रेकी कर इस पूरे खेल को उजागर किया।

कैसे होती है अधिकारियों-व्यापारियों की मिलीभगत?

इस मूंगफली खरीद फर्जीवाड़े में फर्जी किसानों के सबसे बड़े मददगार पटवारी से लेकर समर्थन मूल्य खरीद केंद्रों के कर्मचारी तक हैं।

गिरदावरी में बिना फसल वाले खेतों में भी मूंगफली दर्ज कर दी जाती है। इसी फर्जी रिकॉर्ड के आधार पर पंजीयन होता है।

भुगतान किसानों के खातों में जाता है, जिसके बाद व्यापारी वह पैसा उनसे वापस ले लेते हैं।

मूंगफली की किस्म ने खोली पोल

इस घोटाले का एक बड़ा संकेत मूंगफली की किस्म है।

रानीवाड़ा और सांचौर क्षेत्र में आमतौर पर आरजी-37 किस्म की मूंगफली होती है, लेकिन एमएसपी केंद्रों पर आरजी-20 किस्म की तुलाई हो रही है।

आरजी-20 किस्म की पैदावार मुख्य रूप से बीकानेर क्षेत्र में होती है। यह बड़ी मात्रा में गुजरात की नेनावा मंडी पहुंचती है।

यह साफ दर्शाता है कि मूंगफली न तो स्थानीय खेत की है और न ही स्थानीय किसान की।

यह केवल एक घोटाला नहीं, बल्कि किसानों के नाम पर एमएसपी सिस्टम का हाईजैक है।

दो दिन में ऐसे हुआ फर्जीवाड़ा: एक ट्रैक्टर की कहानी

भास्कर टीम ने गुजरात की नेनावा मंडी से एक ट्रैक्टर की रेकी शुरू की थी, जिसमें मूंगफली भरी थी। इसे बाद में सांचौर में बेचा गया।

  • 11 दिसंबर (नेनवा मंडी, गुजरात): सुबह 8 बजे एक ट्रैक्टर मंडी के गोदाम में पहुंचा और उसमें मूंगफली भरी गई। सुबह 9.10 बजे ट्रैक्टर मंडी से भरकर निकला। सुबह 11.34 बजे यह ट्रैक्टर एमएसपी केंद्र सांचौर पहुंचा।
  • 12 दिसंबर (सांचौर केंद्र, राजस्थान): उसी ट्रैक्टर की सांचौर केंद्र पर तुलाई कर दी गई। रिपोर्टर ने इस दौरान 24 घंटे ट्रैक्टर की रेकी की, जिससे यह स्पष्ट हो गया कि गुजरात मंडी का माल राजस्थान में बिकने आ रहा है।

फर्जीवाड़े में शामिल आरोपी और रिश्वत का खेल

एमएसपी केंद्रों पर तुलाई पूरी तरह से सिस्टम के भरोसे नहीं, बल्कि रिश्वत के भरोसे चल रही है।

जल्दी नंबर चाहिए या फर्जी माल की तुलाई करवानी है, तो पैसा देना पड़ता है।

यदि पैसा नहीं दिया जाता, तो तुलाई का नंबर 2-3 दिन तक नहीं आता।

सांचौर एमएसपी केंद्र पर कर्मचारी मेहराराम को तुलाई के दौरान रिश्वत लेते हुए भास्कर ने कैमरे में कैद किया।

सामने आए कुछ नाम

  • रानाराम: इसने बातचीत में बताया कि वह ही ट्रैक्टर गुजरात की मंडी से भरकर लाया था।
  • गौतम जैन: इसने दावा किया कि इसके पास तुलाई का टोकन है।
  • भरत चौधरी (दुकानदार), कानाराम देवासी (मूंगफली लाने वाला) और दिनेश चौधरी: ये सभी इस फर्जीवाड़े के खेल में शामिल हैं।

यह घोटाला न केवल सरकारी खजाने को भारी नुकसान पहुंचा रहा है, बल्कि वास्तविक और मेहनती किसानों के हक पर भी सीधा डाका डाल रहा है। इस पूरे मामले की गहन जांच और दोषियों पर सख्त कार्रवाई की आवश्यकता है।

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