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ज़िंदगानी

अनियंत्रित बीपी से लकवा का खतरा, SMS में रोज 15 मरीज

प्रदीप बीदावत प्रदीप बीदावत 30

अनियंत्रित उच्च रक्तचाप (Uncontrolled High Blood Pressure) लकवा (Paralysis) का एक प्रमुख कारण बन रहा है। जयपुर (Jaipur) के एसएमएस अस्पताल (SMS Hospital) में रोजाना 15 से अधिक मरीज लकवा के साथ पहुंच रहे हैं। डॉक्टरों ने इसे 'साइलेंट किलर' बताया है और लापरवाही न बरतने की सलाह दी है।

HIGHLIGHTS

  1. 1 अनियंत्रित बीपी लकवा का प्रमुख कारण है, जिसे डॉक्टर 'साइलेंट किलर' कहते हैं। एसएमएस अस्पताल में रोजाना 15 से अधिक लकवा के मरीज बीपी की वजह से पहुंच रहे हैं। लकवा के लक्षण दिखते ही 3 घंटे के भीतर डॉक्टरी सलाह लेना अत्यंत महत्वपूर्ण है। बदलती जीवनशैली और ठंड के मौसम में बीपी को नियंत्रित रखना बेहद जरूरी है।
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अनियंत्रित बीपी से लकवा: साइलेंट किलर

जयपुर: अनियंत्रित उच्च रक्तचाप (Uncontrolled High Blood Pressure) लकवा (Paralysis) का एक प्रमुख कारण बन रहा है। जयपुर (Jaipur) के एसएमएस अस्पताल (SMS Hospital) में रोजाना 15 से अधिक मरीज लकवा के साथ पहुंच रहे हैं। डॉक्टरों ने इसे 'साइलेंट किलर' बताया है और लापरवाही न बरतने की सलाह दी है।

अनियंत्रित बीपी: एक साइलेंट किलर

डॉक्टरों के अनुसार, अनियंत्रित उच्च रक्तचाप लकवा का एक प्रमुख कारण है। लंबे समय तक बीपी को नियंत्रित न रखने से स्ट्रोक का खतरा बढ़ जाता है।

यह 'साइलेंट किलर' है क्योंकि कई बार मरीजों में बीपी के लक्षण नहीं दिखते और यह जानलेवा साबित होता है। बीपी की अनदेखी करना, समय पर दवा नहीं लेना और बिना डॉक्टर की सलाह के इलाज लेने जैसी लापरवाही का खामियाजा मरीजों को भुगतना पड़ रहा है।

लकवा (स्ट्रोक) के प्रमुख लक्षण

लकवा के लक्षणों को पहचानना और तुरंत डॉक्टरी सहायता लेना महत्वपूर्ण है। निम्नलिखित लक्षणों पर विशेष ध्यान देना चाहिए:

  • सिर में तेज दर्द, कमजोरी या सीने में दर्द या भारीपन महसूस होना।
  • धुंधला नजर आना या सांस लेने, समझने एवं बोलने में दिक्कत होना।
  • अचानक शरीर के एक तरफ (चेहरे, हाथ या पैर) कमजोरी या सुन्न होना।
  • बोलने-समझने में कठिनाई महसूस होना।

डॉक्टरों के अनुसार, पैरालिसिस के लक्षण नजर आते ही तीन घंटे के भीतर डॉक्टर से इलाज लेना चाहिए।

उच्च रक्तचाप से धमनियों को नुकसान

उच्च रक्तचाप से शरीर की धमनियों को गंभीर नुकसान होता है, जिससे खून का थक्का जमने की संभावना बढ़ जाती है। धमनियों के कमजोर होने से पुराना उच्च रक्तचाप खून की वाहिकाओं की दीवारों को कमजोर कर देता है।

इनके फटने से हेमरेजिक स्ट्रोक की संभावना रहती है। हाई बीपी के कारण धमनियां संकरी या कठोर होने से वसा के जमने से एथेरोस्क्लेरोसिस होता है।

यह वसा के थक्के टूटकर दिमाग तक पहुंचने पर खून का प्रवाह रोक देते हैं, जिससे इस्केमिक स्ट्रोक होता है।

बदलती जीवनशैली और ठंड का प्रभाव

बदलती जीवन शैली, खानपान और ठंड के मौसम में खून गाढ़ा हो जाने के कारण अनकंट्रोल बीपी से लोगों को लकवा मार रहा है। यह एक चिंताजनक प्रवृत्ति है।

बीपी के मरीजों को नियमित रूप से अपनी जांच करानी चाहिए और डॉक्टर की सलाह का पालन करना चाहिए।

राजस्थान में डेंगू का बढ़ता खतरा

एक तरफ जहां अनियंत्रित बीपी एक गंभीर स्वास्थ्य चुनौती बना हुआ है, वहीं दूसरी ओर एजिप्टाई मच्छर के काटने से फैलने वाले डेंगू रोग को रोकने के इंतजाम नाकाफी साबित हो रहे हैं। इस साल राजस्थान देश के टॉप-10 राज्यों में शामिल हो गया है।

देश में प्रदेश नौंवे स्थान पर है। चिकित्सा विभाग की ओर से जारी आंकड़ों में प्रदेश में अब तक एक भी मौत दर्ज नहीं है, हालांकि इस वर्ष अब तक 4087 डेंगू के मरीज मिले हैं।

देशभर में डेंगू की स्थिति

इस साल देश में अब तक 1 लाख 13 हजार 440 डेंगू के केस सामने आए हैं, जिनमें से 94 मरीजों की मौत हो चुकी है। सबसे ज्यादा 49 मौतें केरल में हुई हैं।

देश में पहले नंबर पर तमिलनाडु (20866), दूसरे पर महाराष्ट्र (13333) और तीसरे नंबर पर केरल (10239) है।

सावधानियां और बचाव

उच्च रक्तचाप और डेंगू दोनों से बचाव के लिए सावधानी बरतना अत्यंत आवश्यक है। नियमित स्वास्थ्य जांच, संतुलित आहार, और सक्रिय जीवनशैली अपनाना महत्वपूर्ण है।

डेंगू से बचाव के लिए मच्छरों के प्रजनन को रोकना और व्यक्तिगत सुरक्षा उपाय अपनाना जरूरी है। किसी भी असामान्य लक्षण पर तुरंत चिकित्सक से परामर्श लें।

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