ट्रैक्टर रैली का बाड़मेर कूच
प्रशासन की रोकने की कोशिशें
किसानों की ट्रैक्टर रैली जैसे ही गुड़ामालानी से बाड़मेर की ओर निकली, प्रशासन ने उन्हें रोकने के कई प्रयास किए। निंबड़ी फांटा के पास गुड़ामालानी एसडीएम केशव कुमार, डिप्टी सुखराम विश्नोई और पुलिस प्रशासन ने पहली बार रैली को रोका। यहां समझाइश की कोशिश की गई, लेकिन किसानों ने मना कर दिया और रैली आगे बढ़ गई।
विश्नोई की ढाणी के पास एसडीएम और पुलिस प्रशासन ने दूसरी बार समझाइश की कोशिश की, जो विफल रही। बाड़मेर पहुंचने से पहले लोहारवा में तीसरी बार रैली को रोकने का प्रयास किया गया। धोरीमन्ना में प्रशासन ने चौथी बार रैली को रोका, जहां बड़ी संख्या में पुलिस बल तैनात था।
इन सभी प्रयासों के बावजूद किसान अपनी मांगों पर अड़े रहे और बाड़मेर कलेक्ट्रेट पहुंचने के लिए दृढ़ संकल्पित थे। रैली में देशभक्ति और किसानों से जुड़े गीत बजाए जा रहे थे, जिससे किसानों का उत्साह बना रहा।
किसान नेताओं की भूमिका
इस रैली में किसान नेता थान सिंह डोली और प्रधान बिजलाराम सहित कई अन्य किसान नेता मौजूद थे। थान सिंह डोली ने ट्रैक्टर पर बैठकर डीजे पर नाचते हुए किसानों का उत्साहवर्धन किया और कहा, "आज हम सरकार को, प्रशासन को झुकाएंगे। हम हनुमान बेनीवाल के सिपाही हैं, आपकी लाठी में इतनी ताकत नहीं कि हमें रोक सको। हम हमारा हक लेकर रहेंगे।"
गुड़ामालानी में प्रधान बिजलाराम ने किसानों को संबोधित करते हुए कहा, "कसम खा कर कहता हूं, बिकेंगे नहीं, परेशान हुए हैं, कोई बात नहीं। जो हक में होगा वहीं फैसला लेकर आएंगे।" उन्होंने किसानों को आश्वासन दिया कि प्रतिनिधिमंडल प्रशासन से बातचीत के बाद ही आगे का फैसला लेगा।
प्रशासन और किसानों के बीच वार्ता
बातचीत का दौर
किसानों की रैली को रोकने के बाद प्रशासन ने उनसे बातचीत शुरू की। लोहारवा पेट्रोल पंप पर एडीएम राजेंद्र सिंह राजावत, एडिशनल एसपी नितेश आर्य, गुड़ामालानी उपखंड अधिकारी केशव कुमार मीणा, गुड़ामालानी डीएसपी सुखराम विश्नोई और गुड़ामालानी थाना अधिकारी सुरेंद्र कुमार, धोरीमना थाना अधिकारी दीप सिंह सहित कई अधिकारी मौजूद थे।
प्रदर्शनकारियों की तरफ से किसान प्रतिनिधि पक्ष से थान सिंह डोली, प्रधान बिजलाराम, रालोपा ब्लॉक अध्यक्ष ताजाराम सियाग, प्रहलादराम सियोल, नाथाराम सारण और हरदाराम कलबी ने बातचीत की। शुरुआती बातचीत विफल रही, क्योंकि किसान कलेक्टर या एसपी को बुलाने पर अड़े थे। थान सिंह डोली ने कलेक्टर मैडम को बुलाकर बात करवाने की मांग की, और जब प्रशासन ने उनके न होने की बात कही तो एसपी को बुलाने को कहा।
देर रात तक किसान प्रतिनिधिमंडल की अधिकारियों से वार्ता चली। यह बातचीत करीब 4 घंटे तक चली, जिसमें किसानों की विभिन्न मांगों पर गहन विचार-विमर्श किया गया।
सहमति और प्रदर्शन का स्थगन
करीब 4 घंटे चली लंबी वार्ता के बाद प्रशासन और किसानों के बीच सहमति बन गई। इस सहमति के बाद बाड़मेर कलेक्ट्रेट घेराव का कार्यक्रम स्थगित कर दिया गया। एसडीएम केशव मीणा ने किसानों को आश्वासन दिया कि 15 दिसंबर तक आदान-अनुदान उनके खातों में आ जाएगा। इस आश्वासन के बाद किसानों ने अपना बाड़मेर कूच टाल दिया और प्रदर्शन समाप्त करने का फैसला किया। बाहर बैठे किसान जो लगातार नारेबाजी कर रहे थे, उन्हें भी इस फैसले से अवगत कराया गया।
किसानों की प्रमुख मांगें
फसल मुआवजा और बीमा क्लेम
किसानों की सबसे बड़ी मांग साल 2022 से 2024 तक के तीन सालों के लंबित आदान-अनुदान की थी। किसानों का कहना था कि प्रशासन बार-बार आश्वासन दे रहा है, लेकिन यह अनुदान अभी तक नहीं मिला है। इसके अलावा, फसल बीमा क्लेम को लेकर भी किसानों में भारी नाराजगी थी। हजारों करोड़ों रुपए किसानों ने प्रीमियम के रूप में दिए हैं, लेकिन उन्हें उचित बीमा क्लेम नहीं मिला है। किसानों का आरोप था कि बीमा कंपनियां सही रिपोर्टिंग और सर्वे नहीं करती हैं, और प्रशासन बीमा कंपनी के दबाव में काम कर रहा है।
अन्य मुद्दे और समस्याएं
किसानों ने कई अन्य मुद्दों को भी उठाया। उन्होंने बताया कि गुड़ामालानी कृषि विज्ञान केंद्र के लिए साल 2012 में 125 बीघा जमीन का आवंटन किया गया था, जिस पर भूमाफिया ने प्रशासन से मिलीभगत करके कब्जा कर लिया है। किसानों का आरोप था कि उन्हें सरकारी योजनाओं का फायदा नहीं मिल पा रहा है। बिजली की समस्या, सुअरों की समस्या और अन्य तमाम समस्याओं को लेकर प्रशासन से सुनवाई नहीं होने के कारण वे बड़े स्तर पर इकट्ठा हुए थे।
किसानों ने यह भी मुद्दा उठाया कि उन्हें लोकतांत्रिक तरीके से आवाज उठाने का स्थल भी उपलब्ध नहीं है। उन्होंने बताया कि जिस स्थान का वे करीब 45 सालों से अपनी आवाज उठाने के लिए उपयोग करते रहे हैं, प्रशासन ने मिलीभगत करके उस स्थान को भी दबा दिया है, जिससे किसान की आवाज बंद हो जाए।
आगे की राह
हालांकि, प्रशासन और किसानों के बीच सहमति बन गई है और प्रदर्शन स्थगित कर दिया गया है, लेकिन किसानों की नजरें अब 15 दिसंबर की तारीख पर टिकी हैं। उन्हें उम्मीद है कि प्रशासन द्वारा दिए गए आश्वासन के अनुसार आदान-अनुदान उनके खातों में आ जाएगा। यदि ऐसा नहीं होता है, तो किसान भविष्य में फिर से आंदोलन का रुख कर सकते हैं। यह आंदोलन बाड़मेर के किसानों की एकजुटता और उनके अधिकारों के प्रति जागरूकता को दर्शाता है।