एडवोकेट मनोज पटेल, जो सिकंदरा के निवासी हैं, ने बताया कि उनके भतीजे प्रवीण सिंह (27) की शादी गुरुवार को भरतपुर के बयाना में हो रही है। प्रवीण की शादी करौली जिले के बड़ा गांव खटाना की रेखा (24) से तय हुई है।
प्रवीण लखनऊ (उत्तर प्रदेश) के पीजीआई में नर्सिंग ऑफिसर के रूप में अपनी सेवाएं दे रहे हैं। उनके पिता हेमंत देहरादून के हिमालयन हॉस्पिटल में नर्सिंगकर्मी हैं।
प्रवीण का परिवार और भाई
मनोज पटेल ने जानकारी दी कि प्रवीण तीन भाइयों में सबसे बड़े हैं। उनके छोटे भाई सौरव (25) दिल्ली एम्स में नर्सिंग ऑफिसर हैं।
तीसरे भाई मयंक इंजीनियर हैं। प्रवीण के दादा बनय सिंह भी सरपंच रह चुके हैं और एक वरिष्ठ वकील भी हैं।
छह मामा और नाना ने भरा मायरा
प्रवीण के नाना रंजन पटेल करौली जिले के नांगल दुर्गसी ताली खेरा गांव के रहने वाले हैं। प्रवीण के छह मामा हैं जिन्होंने मिलकर यह विशाल भात भरा है।
इनमें से दो मामा, वेदराम और सुग्रीव, अहमदाबाद में रहते हैं और उनका वहां ट्रांसपोर्ट का व्यवसाय है। तीसरे मामा भीम सिंह नांगल दुर्गसी के सरपंच हैं।
चौथे मामा बनय सिंह सरकारी टीचर हैं, जबकि बाकी दो मामा गांव में ही खेतीबाड़ी का काम संभालते हैं।
क्या होता है 'मायरा' या 'भात'?
राजस्थानी संस्कृति में 'मायरा' या 'भात' एक महत्वपूर्ण रस्म है। यह बहन के बच्चों की शादी होने पर ननिहाल पक्ष की ओर से भरा जाता है।
इस रस्म के तहत ननिहाल पक्ष, बहन के बच्चों के लिए कपड़े, गहने, रुपए और अन्य आवश्यक सामान भेंट करता है। इसमें बहन के ससुराल पक्ष के लोगों के लिए भी कपड़े और जेवरात शामिल होते हैं।
सांस्कृतिक महत्व और परंपरा
बुजुर्गों का मानना है कि 'मायरा' या 'भात' को राजस्थानी संस्कृति में बहन-बेटी के घर में आयोजित होने वाले सबसे बड़े समारोह पर आर्थिक संबल देने से जोड़ा गया है। यह एक तरह से परिवार के प्रति समर्थन और प्रेम का प्रतीक है।
भले ही कानून ने आज बेटों और बेटियों को माता-पिता की जायदाद में बराबरी का हिस्सा दिया है, फिर भी अधिकतर बहनें स्वेच्छा से इस पर अपना दावा नहीं करती हैं।
उनके इसी त्याग की भरपाई भाइयों द्वारा 'मायरे' में दी गई भेंट से भी करना बताया गया है, जो इस परंपरा को और भी खास बनाता है।