ग्रहण मध्य : रात 01:26 बजे
ग्रहण की कुल अवधि : 3 घंटे 28 मिनट
सूतक काल के दौरान भोजन, जल और पवित्र कार्य निषिद्ध माने जाते हैं।
गर्भवती महिलाओं के लिए विशेष सावधानी
गर्भवती महिलाएँ इस ग्रहण को न देखें। बच्चों और बुजुर्गों को यदि औषधि लेनी पड़े तो ग्रहणकाल में दवा लेने की अनुमति है।
ज्योतिषीय प्रभाव
यह ग्रहण कर्क, कन्या और मीन राशि के जातकों के लिए कष्टप्रद रहेगा। इन जातकों को मानसिक अशांति, स्वास्थ्य संबंधी कष्ट और कार्यक्षेत्र में बाधाओं का सामना करना पड़ सकता है।
धार्मिक उपाय और मंत्र
ग्रहण काल में एक स्थान पर बैठकर भगवान शिव और देवी-देवताओं का स्मरण करना कल्याणकारी रहेगा। विशेष रूप से ‘ॐ नमः शिवाय’ मंत्र का जप अत्यंत फलदायी सिद्ध होगा।
भौगोलिक असर
ग्रहण काल में प्राकृतिक घटनाएँ तीव्र हो सकती हैं। भूकंप, बादल फटना, बाढ़ और अत्यधिक वर्षा जैसी स्थितियाँ बन सकती हैं। भारत में उत्तर भारत, पश्चिम बंगाल, उड़ीसा, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र और पूर्वी राजस्थान पर इसका प्रभाव रहेगा। विदेशों में जापान, मिडिल ईस्ट, अमेरिका और साउथ अफ्रीका तक इसका असर होगा।
दान और पुण्य
ग्रहण समाप्ति के बाद शांति और कल्याण के लिए चावल, सफेद वस्त्र, पानी, शक्कर और घी का दान करना चाहिए।
✍️ डॉ. चंद्रेश घनश्याम जोशी (Ph.D. ज्योतिष)
संपादक – नर्मदा तिथि पंचांग
कालंद्री, जिला सिरोही (राजस्थान)