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खुद को अतिथि बताते चोर का यह पत्र पुलिस की पोल खोलने के लिए पर्याप्त है

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सात हजार रुपए चोरी हुए हैं, लेकिन पत्र पढ़ने के बाद दुकान मालिक किसी तरह का मुकदमा नहीं चाहता। थाना प्रभारी का कहना है कि रिपोर्ट नहीं दी गई है। फिर भी पुलिस इस चोर की तलाश कर रही है।

HIGHLIGHTS

  1. 1 सात हजार रुपए चोरी हुए हैं, लेकिन पत्र पढ़ने के बाद दुकान मालिक किसी तरह का मुकदमा नहीं चाहता। थाना प्रभारी का कहना है कि रिपोर्ट नहीं दी गई है। फिर भी पुलिस इस चोर की तलाश कर रही है।
chor letter in jaisalmer rajasthan thief
chor ka latter jaisalmer

जैसलमेर । जैसलमेर के भणियाणा में एक चोर मिठाई की दुकान में घुसा। मिठाई खाई और गुल्लक ले उड़ा। चोर ने एक माफीनामा छोड़ा है, जिसमें उसने खुद की मजबूरी बताई है।

यही नहीं उस चोर ने साफ लिखा है यदि आप राजस्थान पुलिस को बता भी देंगे तो वह कुछ नहीं कर पाएगी। दुकानदार से ही रुपए ऐंठेंगी।

चोर का यह पत्र सरकारी योजनाओं और आमजन में विश्वास दोनों की पोल भी खोलता है। क्योंकि यहां सात हजार रुपए की चोरी हुई है। परन्तु दुकानदार को चोर का पत्र पढ़कर यह ज्यादा विश्वास है कि राजस्थान पुलिस इस मामले में कुछ नहीं कर पाएगी।

चोर ने इस दो पेज के पत्र में लिखा है कि उसने दुकान की तीन ईंट तोड़ी। उसमें घुसा क्योंकि वह भूखा था। थोड़ी सी मिठाई खाई है। क्योंकि आप गरीब हैं। उसके थोड़ी चोट लगी है और वह गुल्लक लेकर जा रहा है।

दुकानदार गोमाराम का कहना है कि वह कोई कार्यवाही नहीं चाहता। उसने चोर का पत्र वायरल किया है। पत्र में यह भी लिखा है कि आप गरीब है इसलिए दिलासा देने के लिए यह पत्र लिख रहा हूं।

उसने माफीनामें में इस सेवा के लिए दुकानदार का आभार भी जताया है। उसने बताया है कि उसने सिर्फ दो पीस सफेद मिठाई और दो आगरे के पेठे खाए। सेव अर्थात नमकीन उसे नहीं मिली।

सात हजार रुपए चोरी हुए हैं, लेकिन पत्र पढ़ने के बाद दुकान मालिक किसी तरह का मुकदमा नहीं चाहता। थाना प्रभारी का कहना है कि रिपोर्ट नहीं दी गई है। फिर भी पुलिस इस चोर की तलाश कर रही है।

चोर ने मात्राएं सही लिखी है
चोर ठीक—ठाक पढ़ा लिखा लगता है,क्योंकि इस पत्र में मात्राओं का पूरा ध्यान रखा है। जल्दबाजी लिखे गए इस पत्र में चोर ने पैराग्राफ और फुलस्टॉप, कॉमा आदि को साइडलाइन रखा है। परन्तु भाषा का प्रवाह गजब का है।

चोर ने यह लिखा पत्र में
"नमस्कार साहब मैं एक नेक दिल इंसान हूं। मैं आपकी दुकान में चोरी करने नहीं अपितु अपनी ख्वाहिश पूरी करने लिए दुकान में घुसा हूं। हां मैं आपकी दुकान के ऊपर से तीन ईंट हटाकर अंदर घुसा,वो भी खाने के लिए। "मैंने कल से खाना नहीं खाया है, मैं भूखा हूं"। सिर्फ इसलिए मैं आपकी दुकान में पैसे लेने नहीं बल्कि भूख मिटाने के लिए आया हूं।

मुझे मालूम है कि आप गरीब है इसलिए दिलासा दिलाने लिए यह अर्जी लिख रहा हूं और हां मेरे थोड़ी चोरी करते हुए पैर में चोट आई है। इसलिए इसका भी भुगतान आपको करना पड़ेगा। इसलिए मैं आपके पैसे का गुल्लक लेकर गया हूं।

मैंने आपकी दुकान में ज्यादा कुछ नहीं खाया, सिर्फ दो पीस सफेद मिठाई के और दो पीस आगरे का पेठा खाया है। जबकि आपकी दुकान में रखी सेव मुझे नहीं मिली।

मैं एक आखरी बात कहना चाहता हूं कि आप पुलिस को मत बुलाना। वो मेरा कुछ नहीं बिगाड़ पाएगी उल्टा आपसे ही पैसा लेगी। मैं पूरी जिंदगी आपका आभारी रहूंगा आपने जो मेरी इतनी सेवा की।
तुम्हारा "अतिथि"।

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