
अब आरोपियों द्वारा इस्तेमाल किए गए हथियार कहां हैं सीबीआई ने हथियारों को ढूंढने के दौरान दो और लोगों को गिरफ़्तार किया था | 26 मई 2019 को सीबीआई ने सनातन धर्म से जुड़े एक वकील संजीव पुनालेकर और उसके सहयोगी विक्रम भावे को मुंबई से गिरफ़्तार किया | CBI का आरोप था कि पुनालेकर ने शरद कालस्कर को दाभोलकर हत्या मामले में इस्तेमाल की गई पिस्तौल को ठिकाने लगाने की सलाह दी थी | इसके बाद कालस्कर ने चार पिस्तौल ठाणे में एक खाड़ी में फेंक दी | भावे ने शूटरों के लिए इलाक़े की रेकी(reiki) की थी | पुनालेकर को सीबीआई हिरासत में पूछताछ के बाद 5 जुलाई 2019 को जमानत पर रिहा कर दिया गया |
सीबीआई ने विदेशी एजेंसियों की मदद से खाड़ी में फेंकी गई पिस्तौल को ढूंढने की कोशिश की | साढ़े सात करोड़ रुपये इसमें खर्च किए गए | आखिरकार, 5 मार्च 2020 को सीबीआई ने दावा किया कि पिस्तौल बरामद कर लिया गया है | उस पिस्तौल को फॉरेंसिक और बैलिस्टिक जांच(Forensic and ballistic investigation) के लिए भेजा गया | लेकिन अभी तक रिपोर्ट आधिकारिक तौर पर जारी नहीं की गई | बैलिस्टिक एक्सपर्ट(ballistic expert) के हवाले से कहा गया कि बरामद की गई पिस्तौल वो पिस्तौल नहीं है जिससे दाभोलकर की हत्या की गई थी |
9 साल लग गए आरोप तय करने में
पांचों अभियुक्तों के ख़िलाफ़ आरोपों को अंतिम रूप देने में नौ साल लग गए | क़रीब 9 साल बाद 15 सितंबर 2021 को पुणे स्पेशल कोर्ट(Pune Special Court) ने दाभोलकर हत्या मामले में सभी पांच अभियुक्तों पर आरोप तय कर दिए | डॉ. वीरेंद्र सिंह तावड़े, सचिन अंदुरे, शरद कालस्कर और विक्रम भावे पर हत्या, साजिश और शस्त्र अधिनियम से संबंधित धाराओं में यूएपीए(UAPA) के तहत आरोप लगाए गए थे |
इसके अलावा, संजीव पुनालेकर को सबूत नष्ट करने और गलत जानकारी देने के लिए आईपीसी(IPC) की धारा 201 के तहत आरोप का सामना करना पड़ा | हालांकि, पांचों अभियुक्तों ने कोर्ट में अपराध कबूल करने से इनकार कर दिया था | सभी पांच अभियुक्तों पर 2021 में मुकदमा शुरू हुआ | इस मुकदमे के दौरान कुल 20 गवाहों से पूछताछ की गई | क़रीब 11 साल बाद इस मामले में फैसला आना है |