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गुरुदेव के आदेश पर गौ भक्त दलपत पुरोहित ने तोड़ा अन्न त्याग का व्रत

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गुरुदेव ने आशीर्वाद देते हुए कहा कि वह दिन बहुत जल्दी आएगा जब हिंदुस्तान में गौ माता के उत्थान के लिए कठोर से कठोर कानून बनेंगे।" उन्होंने यह भी कहा कि "अगर तुम आज अन्न ग्रहण नहीं करोगे तो मैं खुद भी अन्न छोड़ दूंगा।

HIGHLIGHTS

  1. 1 संत ना होते जगत में तो जल जाता संसार
  2. 2 गुरुदेव ने आशीर्वाद देते हुए कहा कि "वह दिन बहुत जल्दी आएगा जब हिंदुस्तान में गौ माता के उत्थान के लिए कठोर से कठोर कानून बनेंगे। उन्होंने यह भी कहा कि "अगर तुम आज अन्न ग्रहण नहीं करोगे तो मैं खुद भी अन्न छोड़ दूंगा।
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मंडवारिया (Sirohi) : गौ भक्त और समाजसेवी दलपत पुरोहित मंडवारिया ने करीब छह माह से गौ माता के उत्थान के लिए अन्न त्याग का कठोर संकल्प रखा था। गुरुदेव 1008 संत रामानंद महाराज के आदेश पर उन्होंने नवरात्रि पूर्णिमा पर अपना व्रत तोड़ा।

दलपत पुरोहित ने संकल्प लिया था कि जब तक गौ माता के उत्थान के लिए कोई ठोस कानून नहीं बन जाता, तब तक वे अन्न ग्रहण नहीं करेंगे। इस संकल्प के साथ वे बिना अन्न ग्रहण किए हुए ही अपनी भागदौड़ भरी जिंदगी जी रहे थे।

एक कुशल व्यवसाई और राजनेता होने के साथ-साथ वे गौ माता और संतों की सेवा भी निरंतर करते रहे। बिना अन्न ग्रहण किए उन्होंने विदेश यात्राएं भी कीं और राजनीति में भी सक्रिय भूमिका निभाई।

यह बात जब गुरुदेव 1008 संत रामानंद जी महाराज को पता चली तो उन्होंने दलपत पुरोहित को नर्मदा तट स्थित अपने आश्रम पर बुलाया। गुरुदेव ने दलपत पुरोहित को स्नेह और करुणा भाव से समझाते हुए कहा कि "तुम्हारी उम्र अभी कम है और तुम्हारे जीवन में लक्ष्य बहुत बड़े हैं। तुम्हें समाज उत्थान के साथ-साथ गौ माता के लिए भी कई कार्य करने हैं। गौ माता के उत्थान के लिए सभी संत समाज भी संकल्पबद्ध है।"

गुरुदेव ने आशीर्वाद देते हुए कहा कि "वह दिन बहुत जल्दी आएगा जब हिंदुस्तान में गौ माता के उत्थान के लिए कठोर से कठोर कानून बनेंगे।" उन्होंने यह भी कहा कि "अगर तुम आज अन्न ग्रहण नहीं करोगे तो मैं खुद भी अन्न छोड़ दूंगा।"

गुरुदेव के कठोर निर्णय के सामने दलपत पुरोहित मंडवारिया को झुकना पड़ा और उन्होंने गुरुदेव के हाथों से मूंग पानी पीकर अपना व्रत तोड़ दिया। समाजबंधुओं का कहना है कि दलपत पुरोहित ने जो संकल्प शक्ति और गुरुदेव के प्रति समर्पण भाव दिखाया है, वह सभी के लिए अनुकरणीय है। हमें भी गौ माता की सेवा और उनके उत्थान के लिए कार्य करने के लिए प्रेरित होना चाहिए।

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