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भारत

ऑस्ट्रेलिया में काफिरों को मारा, हिंदू बच्चे कर रहे सुसाइड

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जयपुर (Jaipur) में देवकीनंदन ठाकुर (Devkinandan Thakur) ने ऑस्ट्रेलिया (Australia) घटना पर विशेष धर्म को घेरा। हिंदू बच्चों में आत्मबल की कमी व आत्महत्या पर चिंता जताई।

HIGHLIGHTS

  1. 1 देवकीनंदन ठाकुर ने ऑस्ट्रेलिया घटना पर विशेष धर्म पर तंज कसा। उन्होंने हिंदू बच्चों में आत्मबल की कमी और बढ़ती आत्महत्याओं पर चिंता जताई। बच्चों को शस्त्र और शास्त्र दोनों का ज्ञान देने पर जोर दिया। कथा में 'नो तिलक-नो एंट्री' व्यवस्था लागू की गई, तिलक को सनातनियों की पहचान बताया।
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JAIPUR |  देवकीनंदन ठाकुर (Devkinandan Thakur) ने ऑस्ट्रेलिया (Australia) घटना पर विशेष धर्म को घेरा। हिंदू बच्चों में आत्मबल की कमी व आत्महत्या पर चिंता जताई।

विश्व शांति सेवा समिति जयपुर द्वारा सात दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा का शुभारंभ हो गया है। कथावाचक देवकीनंदन ठाकुर ने मानसरोवर स्थित वीटी रोड मेला ग्राउंड में कथा का वाचन किया।

उन्होंने कहा कि राजस्थान के लोग वृंदावन नहीं जा पाते तो गोविंददेवजी के दर्शन करके प्रिय-प्रियतम की कृपा प्राप्त करते हैं। गुप्त वृंदावन में आने का अवसर उन्हें बड़े सालों बाद मिला है।

ऑस्ट्रेलिया घटना पर विशेष धर्म पर तंज

देवकीनंदन ठाकुर ने कथा के दौरान एक विशेष धर्म पर तंज कसा। उन्होंने हाल ही में ऑस्ट्रेलिया में समुद्र तट पर हुई गोलीबारी की घटना का जिक्र किया।

उन्होंने बताया कि वहां यहूदी अपना फेस्टिवल मना रहे थे और कोई कृष्ण जन्मभूमि की बात नहीं हो रही थी। उस समुद्र तट पर 'जय श्री राम' के नारे भी नहीं लग रहे थे।

कोई गीता का पाठ नहीं कर रहा था और न ही सनातन बोर्ड की मांग की जा रही थी। वहां कोई भी हिंदू मौजूद नहीं था।

इसके बावजूद, काफिरों को मारने के लिए एक विशेष धर्म के व्यक्ति समुद्र तट पर गए। उनकी दृष्टि में हम सभी सनातनी काफिर हैं।

बच्चों को बनाएं सशक्त: शस्त्र और शास्त्र का ज्ञान

सनातनियों को सोचने और समझने की आवश्यकता है। हमें अपने बच्चों को महाराणा प्रताप की तरह योद्धा और बलवान बनाना होगा।

मीराबाई की तरह भक्त भी बनाना है, साथ ही ज्ञान में भी निपुण करना होगा। अपनी सुरक्षा के लिए उन्हें सशक्त बनाना अत्यंत आवश्यक है।

इसलिए हमारे बच्चों को शस्त्र और शास्त्र दोनों की आवश्यकता पड़ेगी ही पड़ेगी। यह समय की मांग है।

सनातनी बच्चों में आत्मबल की कमी और डिप्रेशन

देवकीनंदन ठाकुर ने सनातनी बच्चों में आत्मबल की कमी पर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि बच्चे जल्दी डिप्रेशन में चले जाते हैं।

उनके दिमाग में उल्टी-सीधी बातें घर कर जाती हैं और वे उल्टे-सीधे कदम उठा लेते हैं, जिससे आत्महत्या जैसे दुखद परिणाम सामने आते हैं।

उन्होंने अभिभावकों से बच्चों के साथ सत्संग में आने का आग्रह किया। इससे बच्चों को अपने धर्म को जानने का मौका मिलेगा।

आज के युवा बच्चों को परिवार संभालना भी नहीं आता है। कथा पंडाल किसी यूनिवर्सिटी से कम नहीं है, यह हमारी सांस्कृतिक यूनिवर्सिटी है।

अगर आप अपने बच्चों के साथ यहां आकर बैठेंगे, तो आपके परिवार में सुख और समृद्धि दोनों आएगी।

आज हमारा सनातनी समाज बच्चों को पैसे तो खूब दे रहा है, लेकिन संस्कार नाम का जीरो बैलेंस है।

चार अंग्रेजी के शब्द बोलकर बच्चे ऐसे समझते हैं, मानो वे अमेरिका के राष्ट्रपति ट्रंप हो गए हों।

तिलक: सनातनियों की अद्भुत पहचान

कथा में 'नो तिलक-नो एंट्री' की व्यवस्था लागू की गई थी। इस पर कथा की शुरुआत में ठाकुर ने कहा कि ज्यादातर लोग तिलक लगाकर बैठे हैं।

अगर किसी ने नहीं लगा रखा है, तो वह चोरी-छुपे कहीं बैठा होगा। एंट्री पर हमने दूत लगा रखे हैं, जो तिलक चेक करते हैं।

कथावाचक ने बताया कि तिलक हमारे भारतीयों और सनातनियों की अद्भुत संस्कृति है। यह हमारी सनातनियों की अद्भुत पहचान है।

यह सिर्फ पूजा-पाठ से संबंधित नहीं है, बल्कि इस तिलक को लगाने के बाद हमारा आज्ञा चक्र प्रकट होता है, जिसे हम तीसरी आंख कहते हैं।

यह हमारे ज्ञान का चक्षु है। हम लोगों ने अपने बच्चों को मंदबुद्धि खुद जानबूझकर किया है।

जब हम माथे के बीचों-बीच उंगली से दबाते हैं, तो हमारा आज्ञा चक्र खुलता है।

शायद पहली बार ऐसा आयोजन हुआ, जिसमें 'नो तिलक नो एंट्री' की व्यवस्था शुरू की गई। इसे शुरू करने के लिए यह स्थान भी उपयुक्त है।

पूरा राजस्थान भक्ति को मानता है, उसमें भी जयपुर, जहां साक्षात गोविंददेव विराजमान हैं।

श्रीमद्भागवत कथा का आयोजन

मानसरोवर स्थित वीटी रोड मेला ग्राउंड में श्रद्धालु श्रीमद्भागवत कथा सुनने के लिए बड़ी संख्या में पहुंचे।

कथा से एक दिन पहले रविवार को न्यू सांगानेर रोड से कथा स्थल तक भव्य कलश यात्रा निकाली गई थी।

कलश यात्रा में सैकड़ों महिलाएं माथे पर कलश लेकर शामिल हुईं, वहीं पुरुष श्रद्धालु भी बड़ी संख्या में यात्रा का हिस्सा बने।

कलश यात्रा पूरे धार्मिक माहौल के साथ कथा स्थल पर पहुंची, जिसके बाद कथा की तैयारियों को अंतिम रूप दिया गया।

यह कथा हर दिन दोपहर 2 बजे से शाम 5 बजे तक चलेगी। श्रद्धालुओं के लिए कथा का लाइव प्रसारण भी किया जाएगा।

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