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धुन प्रोजेक्ट विकसित भारत 2047 और सतत विकास की दिशा में मील का पत्थर: पूर्व आईएएस राजेन्द्र सिंह शेखावत

प्रदीप बीदावत प्रदीप बीदावत 50

पूर्व आईएएस राजेन्द्र सिंह शेखावत ने जयपुर में आयोजित सेमिनार में धुन प्रोजेक्ट को सतत विकास और जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों का समाधान बताया।

HIGHLIGHTS

  1. 1 पूर्व आईएएस राजेन्द्र सिंह शेखावत ने धुन प्रोजेक्ट को सतत विकास का प्रभावी मॉडल बताया। जयपुर के भवानी निकेतन महाविद्यालय में आयोजित राष्ट्रीय सेमिनार में दी गई विशेष प्रस्तुति। यूनाइटेड ग्लोबल पीस फाउंडेशन के चेयरमैन मेघराज सिंह रॉयल के नेतृत्व की सराहना की गई। परियोजना को भारत के नेट जीरो लक्ष्य और जलवायु अनुकूल विकास के लिए महत्वपूर्ण माना गया।
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जयपुर स्थित भवानी निकेतन महिला पीजी महाविद्यालय में आयोजित एक राष्ट्रीय स्तर के सेमिनार में प्रोजेक्ट धुन का प्रस्तुतिकरण करते पूर्व आईएएस राजेन्द्रसिंह शेखावत

जयपुर | पूर्व आईएएस अधिकारी राजेन्द्र सिंह शेखावत ने यूनाइटेड ग्लोबल पीस फाउंडेशन के धुन प्रोजेक्ट को विकसित भारत 2047 और सतत विकास लक्ष्यों की दिशा में एक ऐतिहासिक मील का पत्थर करार दिया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह परियोजना न केवल पर्यावरण संरक्षण तक सीमित है बल्कि यह जलवायु परिवर्तन जैसी वैश्विक चुनौतियों का एक व्यवहारिक और स्थायी समाधान भी पेश करती है। यह विचार उन्होंने जयपुर स्थित भवानी निकेतन महिला पीजी महाविद्यालय में आयोजित एक राष्ट्रीय स्तर के सेमिनार में साझा किए। उन्होंने कहा कि यह प्रोजेक्ट समाज को व्यवहारिक विकास के मार्ग पर ले जाने वाला एक सशक्त मॉडल है। उन्होंने बताया कि जो बंजर मिट्टी थी खारे पानी वाली। वहां अब इतना पानी है कि हम जयपुर को सप्लाई कर सकते हैं।

सतत विकास और धुन प्रोजेक्ट का महत्व

सेमिनार के दौरान अपने विशेष प्रेजेंटेशन में शेखावत ने कहा कि धुन प्रोजेक्ट समाज को एक नए और दीर्घकालिक विकास के मार्ग पर ले जाने में पूरी तरह सक्षम है। यह मॉडल न केवल भारत की पारिस्थितिकी को सुरक्षित करने का प्रयास करता है बल्कि भविष्य की पीढ़ियों के लिए एक बेहतर और सुरक्षित दुनिया बनाने की दिशा में भी काम करता है। उन्होंने यूनाइटेड ग्लोबल पीस फाउंडेशन की कार्यप्रणाली और उनके सामाजिक सरोकारों की जमकर प्रशंसा की। फाउंडेशन का लक्ष्य सामाजिक समरसता और प्रकृति के बीच संतुलन बनाना है।

फाउंडेशन के प्रयासों को परिणामोन्मुखी बताते हुए उन्होंने कहा कि जमीनी स्तर पर सकारात्मक बदलाव लाने के लिए ऐसी संस्थाओं की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण हो जाती है। उन्होंने विशेष रूप से इस बात पर जोर दिया कि शिक्षा और पर्यावरण को आपस में जोड़कर ही हम एक सशक्त और समृद्ध राष्ट्र का निर्माण कर सकते हैं। यह प्रोजेक्ट उसी दिशा में एक ठोस कदम है जो युवाओं को जागरूक करता है और उन्हें भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयार करता है। सामाजिक चेतना के बिना कोई भी बड़ा बदलाव संभव नहीं है।

नेतृत्व और नवाचार की सराहना

पूर्व आईएएस अधिकारी ने अपने संबोधन में यूनाइटेड ग्लोबल पीस फाउंडेशन के चेयरमैन मेघराज सिंह रॉयल के दूरदर्शी नेतृत्व की सराहना की। उन्होंने कहा कि उनके मार्गदर्शन में फाउंडेशन शिक्षा पर्यावरण शांति और सतत विकास जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर असाधारण कार्य कर रहा है। इसके साथ ही उन्होंने धुन प्रोजेक्ट के प्रणेता मानवेन्द्र सिंह शेखावत के विजन का विशेष उल्लेख करते हुए इसे आधुनिक तकनीक और सामाजिक चेतना का अद्भुत संगम बताया। उनके अनुसार यह प्रोजेक्ट नवाचार का उत्कृष्ट उदाहरण है।

उन्होंने आगे कहा कि मानवेन्द्र सिंह शेखावत की यह पहल आधुनिक नवाचारों का उपयोग करके पारंपरिक मूल्यों को सहेजने का काम कर रही है। यह परियोजना स्पष्ट रूप से दिखाती है कि कैसे तकनीकी प्रगति और प्रकृति के बीच एक आदर्श संतुलन बिठाया जा सकता है। इस तरह के नवाचार ही भारत को वैश्विक मंच पर एक नई पहचान दिलाने में सहायक सिद्ध होंगे। धुन प्रोजेक्ट की सफलता इस बात पर निर्भर करती है कि इसे समाज के हर वर्ग तक कैसे पहुंचाया जाता है।

विकसित भारत 2047 का लक्ष्य और भविष्य

शेखावत ने धुन प्रोजेक्ट को भारत के नेट जीरो लक्ष्य और जलवायु अनुकूल विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण कड़ी बताया। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि यह पहल समावेशी प्रगति को बढ़ावा देगी और आने वाले दशकों में भारत की वैश्विक स्थिति को और अधिक मजबूत करेगी। यह प्रोजेक्ट समुदायों और संस्थानों को एक साथ लाकर एक ऐसी नई सोच विकसित कर रहा है जो विकास की पारंपरिक परिभाषा को बदलने का माद्दा रखती है।

राष्ट्रीय सेमिनार में उपस्थित शिक्षाविदों और विशेषज्ञों ने भी इस प्रस्तुति को काफी प्रेरणादायक माना। उन्होंने माना कि धुन प्रोजेक्ट भविष्य की जरूरतों के अनुसार एक दूरदर्शी योजना है जो न केवल स्थानीय बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी गहरा प्रभाव डालेगी। सेमिनार के अंत में उपस्थित प्रतिभागियों ने फाउंडेशन के कार्यों की सराहना करते हुए इसके विस्तार की आवश्यकता पर बल दिया। इस आयोजन ने सतत विकास के प्रति नई उम्मीदें जगाई हैं।

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