इस दौरान यूं तो राजस्थान में एंटी करप्शन ब्यूरो की जिम्मेदारी डीजी भगवान लाल सोनी के पास थी, लेकिन पब्लिक परसेप्शन में हर कार्रवाई के पीछे हीरो दिनेश एमएन ही रहे। इसकी वजह है दिनेश एमएन के प्रति जनता में बना भरोसा और करप्शन के खिलाफ बड़ी से बड़ी कार्यवाही करने की इस आईपीएस अधिकारी का जूनून।
मूलतः कर्नाटक निवासी दिनेश एमएन 1995 बैच के ऐसे अधिकारी हैं, जिनके काम करने के अंदाज़ के हर जगह लोग कायल रहे। जहाँ भी पोस्टिंग रही, गुंडे और गुनहगार दिनेश एमएन के निशाने पर रहे। कहीं अपराधियों ने शराफत ओढ़ने में भलाई समझी तो कहीं जिले छोड़कर ही चल दिए। ट्रेनिंग और उसके बाद फील्ड में तैनाती के दौरान इस अधिकारी ने सिंघम स्टाइल में बदमाशों की ऐसी धुनाई की कि अपराधी इलाके ही बदलने में भलाई समझने लगे।
1998 में दौसा में एएसपी रहे तो बदमाशों को दुरुस्त करते दिखाई पड़े फिर राजधानी जयपुर में गांधी नगर सर्किल के एएसपी रहे तो राजस्थान विश्वविद्यालय में पनपी गुंडागर्दी को अतीत का किस्सा बना दिया। यहाँ तक कि एक बड़े समाचार पत्र ने केबल माफिया खड़ा किया तो कार्रवाई करने उस अखबार के दफ्तर में ही कार्रवाई करने जा पहुंचे।
बतौर एसपी दिनेश एमएन को दस्यु प्रभावित जिले करौली की जिम्मेदारी दी गयी। सन 2000 से 2002 तक करौली के पुलिस अधीक्षक के रूप में चंबलों के बियाबान बीहड़ में डकैतों के खिलाफ अभियान चलाया और कई गिरोहों का खात्मा कर दिया।

गुजरात और मध्यप्रदेश में उभरे माफिया ने गुजरात से सटे उदयपुर संभाग में अपना पड़ाव डाला तो दिनेश एमएन उदयपुर के एसपी बनाए गए। अपराध के खिलाफ दिनेश एमएन की इस जंग में व्यवधान तब आया जब 2005 में उदयपुर जिले के एसपी बने दिनेश एमएन फेक एनकाउंटर के आरोप में जेल चले गये।
दरअसल उदयपुर एसपी रहते हुए ही दिनेश एमएन विवाद में तब आये जब राजस्थान और गुजरात पुलिस के ज्वॉइंट ऑपरेशन में सोहराबुद्दीन एक एनकाउंटर में मारा गया।
सोहराबुद्दीन एनकाउंटर पर सवाल उठे तो मामले की जांच सीबीआई को सौंप दी गयी। इस प्रकरण में दिनेश एमएन समेत राजस्थान और गुजरात के कई पुलिस अफसरों को फेक एनकाउंटर के आरोप में जेल जाना पड़ा। जेल से छूटते ही दिनेश एमएन को प्रमोशन और पोस्टिंग दी गयी तो कामकाज के जरिये इस अधिकारी ने एक बार फिर साबित कर दिया कि जेल से वह टूटे नहीं, बल्कि और ज्यादा जज्बे के साथ सेवा में आये हैं।
जेल से छूटने और बाइज्जत बारी होने के बाद दिनेश एमएन को एंटीकरप्शन ब्यूरो में आईजी के पद पर तैनात किया गया। एंटी करप्शन ब्यूरो में तैनाती के साथ ही दिनेश एमएन ने करप्शन के खिलाफ ऐसा अभियान छेड़ा कि रिश्वतखोरों का दिन का चैन और रातों की नींद हराम हो गई। इसी दौरान सरकार के सबसे ताकतवर नौकरशाह अशोक सिंघवी को गिरफ्तार कर लिया गया।
दिनेश एमएन के नेतृत्व में एंटी करप्शन ब्यूरो ने ताकतवर आईएएस और अतिरिक्त मुख्य सचिव-खान विभाग अशोक सिंघवी को 2 करोड़ 50 लाख रुपए की रिश्वत के साथ गिरफ्तार कर लिया। एंटीकरप्शन ब्यूरो द्वारा की गयी.
इस कार्रवाई से नौकरशाही में हड़कंप मच गया। इस बीच गैंगस्टर आनंदपाल सिंह ने राजस्थान में अपराध दर अपराध के पुलिस को चुनौती दी तो दिनेश एमएन को एसओजी में आईजी पद पर पोस्टिंग दे यह बड़ा टास्क थमाया गया।
पुलिस पर हमला कर फरार हुए आनंदपाल के खिलाफ 2017 में दिनेश एमएन के नेतृत्व में एक स्पेशल टीम ने ऑपरेशन शुरू किया और जून 2017 में एक एनकाउंटर में आनंदपाल मारा गया। एसओजी में कई बड़ी कार्रवाइयों के बाद वर्ष 2019 में दिनेश एमएन को फिर एंटी करप्शन ब्यूरो में पोस्टिंग मिली तो आए दिन करप्शन के खिलाफ कार्यवाही शुरू हो गयी।
इस दौरान रंगे हाथ पकड़े गए अधिकारीयों में राजस्थान के आईएएस, आईपीएस, आरएएस आरपीएस ही नहीं, केंद्र सरकार द्वारा नारकोटिक्स विभाग में तैनात अफसरों को भी रिश्वत के मामलों में गिरफ्तार करके जेल भेज दिया गया। एंटीकरप्शन द्वारा दिनेश एमएन के नेतृत्व में कार्रवाई का ये सिलसिला लगातार जारी रहा।

इस बीच उनके तबादले के बाद भी भ्रष्टाचार के खिलाफ अभियान जारी रहेगा, लेकिन लोगों को लगता है कि उसमे उतनी आक्रामकता शायद ही हो, जितनी दिनेश एमएन के नेतृत्व में रही।
करप्शन के खिलाफ जंग के बीच राजस्थान पुलिस के इस हीरो को एडीजी -क्राइम का जिम्मा देने के पीछे दो बड़े कारण हैं। पहला-चार साल से उनकी एक ही जगह लगातार पोस्टिंग। दूसरा -राजस्थान के अलग-अलग इलाकों में अपराधियों के बीच छिड़ी गैंगवार।
चुनावी फिजा में अब जबकि राजस्थान की अशोक गहलोत सरकार अपने लोक लुभावन बजट को भुनाने की जुगत में है, बिगड़ी कानून व्यवस्था सरकार का जायका ख़राब कर रही है। जाहिर है ,इसे सुधारने को लेकर अगर कोई चेहरा सरकार को सूझ रहा है तो वह दिनेश एमएन हैं। लेकिन सवाल यह है कि आपराधिक गिरोहों पर ही लगाम लगानी है तो फिर उन्हें स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप की जिम्मेदारी क्यों नहीं दी गयी ?
क्या ताबड़तोड़ कार्यवाही से घबराये नौकरशाहों ने ही दिनेश एमएन के एंटीकरप्शन ब्यूरो से बाहर भेजे जाने की इबारत लिखी है? सवाल इसलिए भी क्योंकि सरकार करप्शन के ज्यादातर मामलों में रंगे हाथ कार्रवाई के बावजूद अभियोजन स्वीकृति नहीं दे रही। यहाँ तक की विधानसभा में इस मुद्दे पर उठे सवालों के भी गोलमोल जवाब दे रही है।