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यहां भगवान गणेश मानव रूप में भक्तों को देते हैं दर्शन, श्रद्धालु मूषकराज के कान में कहते हैं मन की बात

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राजस्थान में विध्नहर्ता भगवान श्री गणेश का एक ऐसा मंदिर है जहां भगवान गणेश मानव रूप में भक्तों को दर्शन देते है। इस मंदिर में भगवान के बाल रूप की पूजा होती हैं। 

HIGHLIGHTS

  1. 1 राजस्थान में विध्नहर्ता भगवान श्री गणेश का एक ऐसा मंदिर है जहां भगवान गणेश मानव रूप में भक्तों को दर्शन देते है। इस मंदिर में भगवान के बाल रूप की पूजा होती हैं। 
garh ganesh temple where devotees take in human form to lord ganesh
Lord Ganesh

जयपुर | सर्वप्रथम पूज्य भगवान श्री गणेश जी के मंदिर तो आपने खूब देखें होंगे और पूजा अर्चना भी करते आ रहे होंगे, लेकिन मानव रूप में उनकी प्रतिमा कभी नहीं देखी होगी। 

राजस्थान में विध्नहर्ता भगवान श्री गणेश का एक ऐसा मंदिर है जहां भगवान गणेश मानव रूप में भक्तों को दर्शन देते है। इस मंदिर में भगवान के बाल रूप की पूजा होती हैं। 

आपको ये बात सुनने में भले ही अजीब लगे, लेकिन ये सच है। राजधानी जयपुर में स्थित गढ़ गणेश मंदिर दुनिया का एक मात्र ऐसा मंदिर है जहां श्री गणेश बिना सूंड के मानव रूप में विराजमान है। 

जयपुर की गेटोर रोड़ पर नाहरगढ़ पहाड़ी के ऊपर स्थित ये मंदिर  बिना सूंड वाले गणेश जी का मंदिर है। 

गणेश जी के बाल रूप को देखकर यहां आने वाला हर भक्त मंत्रमुग्ध हो जाता है। मंदिर परिसर में फोटोग्राफी की सख्त मनाही है। यहां किसी भी प्रकार से फोटो लेना मना है। 

मंदिर तक जाने वाले रास्ते में एक शिव मंदिर भी है जिसमें पूरा शिव परिवार विराजमान है। 
 
रियासतकाल में बना ये मंदिर गढ़ (पहाड़) पर बना हुआ है। इसलिए इसका नाम गढ़ गणेश मंदिर पड़ा। 

पहाड़ी पर स्थित मंदिर तक पहुंचे के लिए कुल 365 सीढियां चढ़नी पड़ती है। हालांकि, इसके बराबर से ही घाटी में घुमावदार रास्ता भी मंदिर तक जाता है। 

मंदिर की सीढियों को भी साल के दिनों को आधार मानकर 365 सीढियां बनाई गई थी। 

भगवान गणपति के आशीर्वाद से जयपुर की नींव रखी गई

भगवान गणेश जी का ये मंदिर करीब 290 साल पुराना है। भगवान गणपति जी के आशीर्वाद से ही जयपुर की नींव रखी गई थी।

यहां गणेशजी के दो विग्रह हैं। जिनमें पहला विग्रह आंकडे की जड़ का और दूसरा अश्वमेघ यज्ञ की भस्म से बना हुआ है।

इतिहासकारों के अनुसार, नाहरगढ़ की पहाड़ी पर जयपुर के तत्कालीन महाराजा सवाई जयसिंह ने अश्वमेघ यज्ञ करवा कर गणेश जी के बाल्य स्वरूप की इस प्रतिमा की विधिवत स्थापना करवाई थी। 

बारिश के दिनों में मंदिर की छटा में चारचांद लग जाते हैं। पहाड़ों पर चारों ओर हरियाली के बीच में स्थित गढ़ गणेश मंदिर में सवामणि और गोठ का दौर चलता है। 

मंदिर से पूरे जयपुर शहर का विहंगम नजारा दिखाई देता है। 

मूषकराज के कान में इच्छाएं बताते हैं श्रद्धालु

गढ़ गणेश मंदिर परिसर में पाषाण के बने दो मूषक भी स्थापित है भक्त उनके कान में अपनी इच्छाएं बताते हैं और मूषकराज उनकी इच्छाओं को बाल गणेश जी तक पहुंचाते है। 

भक्तों का विश्वास है कि गढ़ गणेश से मांगी जाने वाली हर मनोकामना पूरी होती है।

साल के 365 दिनों के आधार बनाई गई थी सीढियां

पहाड़ी पर स्थित मंदिर तक पहुंचे के लिए कुल 365 सीढियां है। जो साल के दिन को आधार मानकर बनाई गई थी। 

इसी के साथ मंदिर में ही एक बड़ा पानी का टंका भी बना हुआ है। फिलहाल इस टांके को ढक रखा है। 

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