पुलिस ने घर की तलाशी के दौरान एमडी ड्रग्स के अलावा कई अन्य संदिग्ध सामग्री भी बरामद की। इसमें एक डिजिटल वजन मशीन, प्लास्टिक जिप बैग और पैकिंग में इस्तेमाल होने वाली सामग्री शामिल थी।
पुलिस को आशंका है कि यह मकान लंबे समय से ड्रग्स सप्लाई के ठिकाने के तौर पर इस्तेमाल हो रहा था। यह दर्शाता है कि यह एक संगठित गिरोह का हिस्सा था।
सांचौर से चलता था ड्रग्स नेटवर्क
जांच में सामने आया है कि इस पूरे ड्रग्स नेटवर्क का मास्टरमाइंड राजेश्वरी का ममेरा भाई सुभाष गोदारा है, जो सांचौर के कांटोल गांव का निवासी है। सुभाष ने ही कमलेश और राजेश्वरी को एमडी ड्रग्स गुजरात ले जाने और बेचने का लालच दिया था।
कमलेश पिछले 4 साल से अहमदाबाद में काम कर रहा था, जबकि राजेश्वरी शादी के बाद एक साल से उसके साथ रह रही थी। पिछले पांच महीनों में राजेश्वरी चार से पांच बार राजस्थान से अहमदाबाद ड्रग्स लेकर आई और स्थानीय पैडलर्स को सप्लाई करती थी।
लखनऊ से आती थी ड्रग्स
पुलिस की जांच में यह भी खुलासा हुआ है कि मुख्य आरोपी सुभाष गोदारा कई अन्य लोगों को भी ड्रग्स सप्लाई करता है। वह यह ड्रग्स उत्तर प्रदेश के लखनऊ से लेकर आता था। पहले इसे राजस्थान और फिर गुजरात पहुंचाया जाता था।
राजेश्वरी ने बी.एड तक की पढ़ाई की है और दंपती का कोई पिछला आपराधिक रिकॉर्ड नहीं मिला है। राजेश्वरी अपने ममेरे भाई के कहने पर ही इस धंधे में शामिल हुई थी। रिश्तेदार होने के कारण सुभाष उसे बिना पैसे के ड्रग्स देता था, और बेचने के बाद उसे भुगतान किया जाता था।
मुख्य आरोपी फरार, तलाश जारी
फिलहाल, इस मामले का मुख्य आरोपी सुभाष गोदारा फरार है। पुलिस ने उसकी तलाश के लिए एक विशेष टीम का गठन किया है। क्राइम ब्रांच के अधिकारियों के अनुसार, प्रारंभिक जांच से पता चला है कि यह ड्रग्स नेटवर्क उत्तर प्रदेश, राजस्थान और गुजरात तक फैला हुआ है।
ड्रग्स की सोर्सिंग लखनऊ से होती थी, जिसे पहले राजस्थान के सांचौर लाया जाता था। वहां से इसे अहमदाबाद और गुजरात के अन्य सप्लायरों तक पहुंचाया जाता था। क्राइम ब्रांच ने गिरफ्तार दंपती के खिलाफ एनडीपीएस एक्ट के तहत मामला दर्ज कर आगे की कार्रवाई शुरू कर दी है।