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सफलता की कहानी

सपनों को उड़ान देने के लिए तपस्वी बन गई राजस्थान की ये बेटी, पहुंच गई इस मुकाम पर

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राजस्थान की इस बेटी का सपना था  IAS ऑफिसर बनने का। जिसे पूरा करने के लिए उन्होंने अपने सभी सुखों का त्याग कर दिया। बीकानेर के काकड़ा गांव में जन्म लेने वाली परी के लिए इस मुकाम तक पहुंचना काफी चुनौती पूर्ण रहा। 

HIGHLIGHTS

  1. 1 राजस्थान की इस बेटी का सपना था  IAS ऑफिसर बनने का। जिसे पूरा करने के लिए उन्होंने अपने सभी सुखों का त्याग कर दिया। बीकानेर के काकड़ा गांव में जन्म लेने वाली परी के लिए इस मुकाम तक पहुंचना काफी चुनौती पूर्ण रहा। 
ias pari bishnoi success story
IAS Pari Bishnoi

जयपुर | कहते हैं ना जब महिला कुछ करने का ठान लेती है तो उसे पूरा करने के लिए कुछ भी कर गुजरती है। ऐसा ही कुछ कर दिखाया है राजस्थान की एक बेटी ने।

राजस्थान के बीकानेर जिले की बेटी परी बिश्नोई ने अपने सपनों को उड़ान देने के लिए खुद को एक तपस्वी की भांति ढाल लिया और अपने मुकाम को हासिल किया।

राजस्थान की इस बेटी का सपना था  IAS ऑफिसर बनने का। जिसे पूरा करने के लिए उन्होंने अपने सभी सुखों का त्याग कर दिया।

बीकानेर के काकड़ा गांव में जन्म लेने वाली परी के लिए इस मुकाम तक पहुंचना काफी चुनौती पूर्ण रहा। 

ग्रेजुएशन करने के बाद UPSC परीक्षा की तैयारी में जुटी परी ने 2019 में तीसरी बार में यूपीएसी एग्जाम पास किया और उन्हें 30वां स्थान हासिल हुआ। फिलहाल वह गंगटोक की एसडीएम के तौर पर पोस्टेड हैं।

सपनों को उड़ान देने के लिए परी ने किस कदर से खुद को एक तपस्वी की तरह बनाया, इसका खुलासा उनकी मां ने एक इंटरव्यू में किया था।

परी की मां भी जीआरपी में पुलिस अधिकारी हैं। उन्होंने अपनी बेटी के परिश्रम की कहानी बताते हुए कहा था कि उनकी बेटी ने  UPSC की तैयारी के दौरान खुद को लोगों से अलग कर लिया था। जिस तरह से एक तपस्वी सभी चीजों का त्याग कर देता है।

बस उसे रात-दिन सिर्फ अपनी पढ़ाई के अलावा और कुछ नहीं दिखता था। बेटी ने मोबाइल फोन तक का इस्तेमाल भी बंद कर दिया था।

उसने अपने सारे सोशल मीडिया अकाउंट डिलीट कर दिए थे और बिल्कुल तपस्वी वाला जीवन अपना लिया था। बेटी की इसी तपस्या ने उसे आईएएस ऑफिसर बनाया।

दादा ने की गांव वालों की सेवा
परी जहां आज प्रशासनिक सेवा में लगी हैं वहीं उनके दादा  गोपीराम बिश्नोई भी अपने गांव वालों की भलाई के लिए हमेशा जुटे रहे। परी के दादा गांव काकड़ा के चार बार सरपंच रह चुके हैं और उनकी सामाजिक समस्याओं को सुलझाने के लिए कई कार्य किए। इसी के साथ परी के पिता मनीराम बिश्नोई एक वकील हैं।

परी बिश्नोई अपने बचपन से ही पढ़ाई के प्रति बड़ी गंभीर थी। उन्होंने अजमेर के सेंट मैरी कॉन्वेंट स्कूल से अपनी स्कूली पढ़ाई पूरी करने के बाद दिल्ली यूनिवर्सिटी के इंद्रप्रस्थ कॉलेज फॉर वुमेन से ग्रेजुएशन पूरी की।

इसके बाद परी ने एमडीएस यूनिवर्सिटी, अजमेर से पॉलिटिकल साइंस में पोस्ट ग्रेजुएशन किया। 

अपने पढ़ाई के दौरान लोगों से खुद को अलग करने वाली परी के अब सोशल मीडिया पर जबरदस्त फैंस फॉलोइंग हैं। इंस्टाग्राम पर ही उनके 99 हजार से ज्यादा फॉलोअर्स हैं। 

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