झालावाड़ के पीपलोदी गांव में सरकारी स्कूल की बिल्डिंग गिरने से 7 मासूम बच्चों की मौत और 30 से अधिक गंभीर घायल बच्चों की खबर, किसी प्राकृतिक आपदा का नतीजा नहीं है। यह दुर्घटना नहीं, बल्कि एक सरकारी लापरवाही का साक्षात मलबा है, जिसमें न सिर्फ ईंटें और दीवारें गिरीं, बल्कि एक पूरी व्यवस्था की संवेदनहीनता उजागर हो गई।
सरकार की चुप्पी से बड़ा कोई हादसा नहीं
हर बार की तरह इस बार भी शिक्षा मंत्री का बयान आया — "इलाज सरकार के खर्चे पर होगा" और "जांच के आदेश दे दिए गए हैं"। लेकिन ये घिसे-पिटे वाक्य अब प्रतीक्षा कक्ष में पड़ी लाशों के बीच खोखले और शर्मनाक लगते हैं। सवाल उठता है — क्या ये बच्चे सरकार के लिए सिर्फ आंकड़े थे?
झालावाड़ जिले के मनोहर थाना क्षेत्र में विद्यालय की छत गिरने से हुई जनहानि अत्यंत दुःखद है।
मेरी संवेदनाएं शोक संतप्त परिजनों के साथ है। घटना की गंभीरता को देखते हुए शासन सचिव, शिक्षा को तत्काल घटनास्थल के लिए रवाना कर दिया गया है।
प्रभु दिवंगत आत्माओं को शांति तथा शोकाकुल…