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ज़िंदगानी

जयपुर एयरपोर्ट पर AI से मिलेगा खोया सामान, देश में पहला 'लॉस्ट एंड फाउंड'

गणपत सिंह मांडोली गणपत सिंह मांडोली 47

जयपुर एयरपोर्ट (Jaipur Airport) पर अब यात्रियों को खोए या छूटे हुए सामान के लिए परेशान नहीं होना पड़ेगा। AI (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) की मदद से 'लॉस्ट एंड फाउंड' (Lost and Found) सिस्टम शुरू किया गया है, जो देश में सबसे पहले जयपुर में लागू हुआ है। यह यात्रियों को आसानी से अपना सामान ढूंढने में मदद करेगा।

HIGHLIGHTS

  1. 1 जयपुर एयरपोर्ट पर देश का पहला AI-पावर्ड 'लॉस्ट एंड फाउंड' सिस्टम शुरू। यात्री अब अडानी वन ऐप या एयरपोर्ट वेबसाइट से खोए सामान की स्थिति जान सकेंगे। यह सेवा 24 घंटे उपलब्ध है और दोनों टर्मिनलों पर दी जा रही है। जयपुर एयरपोर्ट को इस नवाचार के लिए गोल्ड अवॉर्ड से सम्मानित किया गया।
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Jaipur Airport and AI

जयपुर: जयपुर एयरपोर्ट (Jaipur Airport) पर अब यात्रियों को खोए या छूटे हुए सामान के लिए परेशान नहीं होना पड़ेगा। AI (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) की मदद से 'लॉस्ट एंड फाउंड' (Lost and Found) सिस्टम शुरू किया गया है, जो देश में सबसे पहले जयपुर में लागू हुआ है। यह यात्रियों को आसानी से अपना सामान ढूंढने में मदद करेगा।

जयपुर इंटरनेशनल एयरपोर्ट लिमिटेड (JIAL) ने यात्रियों के खोए हुए सामान को ढूंढने और उन्हें वापस लौटाने की प्रक्रिया को सरल बनाने के लिए एक पूरी तरह से ऑटोमेटेड 'लॉस्ट एंड फाउंड' सिस्टम की शुरुआत की है। यह अत्याधुनिक प्रणाली देश में पहली बार जयपुर एयरपोर्ट पर शुरू की गई है, जो यात्रियों के लिए एक बड़ी राहत है।

इस नई तकनीक के माध्यम से पिछले तीन महीनों में लगभग 85 प्रतिशत से अधिक खोया हुआ सामान उसके असली मालिकों तक सुरक्षित पहुंचाया जा चुका है। आज से इस तकनीक के उपयोग की आधिकारिक घोषणा की गई है, जिससे इसकी पहुंच और प्रभाव बढ़ेगा।

देश का पहला AI-पावर्ड 'लॉस्ट एंड फाउंड' सिस्टम

यह 'लॉस्ट एंड फाउंड' सिस्टम आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) द्वारा संचालित कैमरों का उपयोग करता है। जैसे ही कोई सामान एयरपोर्ट परिसर में मिलता है, कैमरा तुरंत उसकी तस्वीर लेता है और सामान का विस्तृत विवरण दर्ज करता है।

इसमें सामान की जगह, तारीख और समय जैसी महत्वपूर्ण जानकारी स्वचालित रूप से सिस्टम में दर्ज हो जाती है। यह प्रक्रिया सामान की पहचान और उसके रख-रखाव को बेहद कुशल बनाती है।

कैसे काम करता है यह सिस्टम?

सिस्टम में दर्ज की गई जानकारी को एक केंद्रीय डेटाबेस में संग्रहित किया जाता है। यह डेटाबेस खोए हुए सामान की पहचान और उसके मालिक तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

यह तकनीक सुनिश्चित करती है कि कोई भी खोया हुआ सामान बिना रिकॉर्ड के न रहे और उसे जल्द से जल्द उसके मालिक तक पहुंचाया जा सके।

यात्रियों के लिए ऑन-द-गो सुविधा

यात्रियों के लिए यह सुविधा पूरी तरह से 'ऑन-द-गो' है, जिसका अर्थ है कि वे कहीं से भी इसका उपयोग कर सकते हैं। अब कोई भी यात्री अडानी वन ऐप या जयपुर एयरपोर्ट की आधिकारिक वेबसाइट के माध्यम से अपने खोए हुए सामान की वर्तमान स्थिति जान सकता है।

यह सुविधा यात्रियों को अनावश्यक यात्रा या पूछताछ से बचाती है, जिससे उनका समय और ऊर्जा बचती है। खोए हुए सामान के सुरक्षित रख-रखाव के लिए अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप पद्धति को अपनाया गया है।

इससे सामान को व्यवस्थित तरीके से रखा जाता है और उसे वापस करने में लगने वाला समय काफी कम हो जाता है। जयपुर एयरपोर्ट पर यात्रियों की सुविधाओं का विस्तार करते हुए इस तकनीक को शुरू किया गया है।

24 घंटे उपलब्ध सेवा और सम्मान

जयपुर एयरपोर्ट पर यह 'लॉस्ट एंड फाउंड' सेवा 24 घंटे उपलब्ध है, जो इसे और भी अधिक उपयोगी बनाती है। इसके साथ ही, जयपुर देश का ऐसा पहला एयरपोर्ट बन गया है, जहां दोनों टर्मिनलों पर यह सुविधा 24x7 प्रदान की जा रही है।

इस नवाचार और गुणवत्ता के लिए जयपुर इंटरनेशनल एयरपोर्ट को हाल ही में क्वालिटी सर्कल फोरम ऑफ इंडिया (QCFI) की ओर से प्रतिष्ठित गोल्ड अवॉर्ड से भी सम्मानित किया गया है। यह सम्मान एयरपोर्ट द्वारा प्रदान की जा रही उत्कृष्ट सेवाओं का प्रमाण है।

भविष्य की योजनाएं और प्रतिबद्धता

एयरपोर्ट प्रवक्ता ने बताया कि देश में सबसे पहले जयपुर एयरपोर्ट ने 'लॉस्ट एंड फाउंड' सिस्टम शुरू किया है। यह डिजिटल बदलाव यात्रियों को पारदर्शी, सुरक्षित और भरोसेमंद सेवाएं देने की प्रतिबद्धता का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है।

आने वाले समय में यात्रियों की सुविधा के लिए और भी AI-आधारित समाधान लागू किए जाएंगे। जयपुर एयरपोर्ट का लक्ष्य यात्रियों को विश्व स्तरीय अनुभव प्रदान करना है।

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