धर्म-कर्म में गहरी आस्था रखने वाले दिव्यांश की इस जीत में धार्मिक ग्रंथ गीता की सबसे महत्वपूर्ण भूमिका रही।
उनके अनुसार, उन्हें गीता पढ़ने से ही आत्मबल मिला और उन्होंने अपने आपको साबित कर दिखाया।
दिव्यांश के पिता अशोक पंवार जयपुर के SMS मेडिकल कॉलेज में वरिष्ठ नर्सिंग स्टाफ में कार्यरत हैं जबकि मां निर्मला देवी भी नर्स हैं।
दिव्यांश के माता-पिता अपने बेटे की इस उलब्धि से बेहद खुश है। उन्होंने बताया कि जब भी दिव्यांश प्रैक्टिस के दौरान दुखी होता था तो उसके कोच दीपक कुमार दुबे उसे गीता पढ़ने के लिए कहते थे।
हमेशा अपने साथ रखता है गीता
इसके लिए उन्होंने दिव्यांश को एक पॉकेट गीता पढ़ने के लिए दी थी जिसे वह हमेशा साथ रखता है।
शूटिंग और प्रैक्टिस के दौरान जब भी समय मिलता है तब दिव्यांश गीता जरूर पढ़ता है।
दिव्यांश के पिता ने बताया कि वो शूटिंग करते समय अपनी जेब में हमेशा गीता रखता है।
दिव्यांश को इससे हर समय हिम्मत और आत्मविश्वास मिलता है।
इसी के साथ वह कंपीटीशन से हमेशा घर फोन करता है और दादी, मां और पिताजी से आशीर्वाद लेता है।
जयपुर में शुरुआती ट्रेनिंग करने वाले दिव्यांश को दिल्ली के कर्णी सिंह शूटिंग रेंज में कोच दीपक कुमार दुबे ने ही ट्रेनिंग दी है।
उन्होंने ही दिव्यांश को गीता पढ़ने का ज्ञान भी दिया जिसकी बदौलत उसका आत्मबल बढ़ने लगा और वह कामयाब होता गया।
पबजी गेम की लत छुड़ाने के लिए पकड़ाई गन
दिव्यांश के पिता ने एक मीडिया से इंटरव्यू के दौरान खुलासा करते हुए कहा कि दिव्यांश को पबजी गेम खेलने की लत लगी हुई थी।
जिससे सभी घर वाले बहुत परेशान थे। ऐसे में उसकी ये लत छुड़ाने के लिए दिव्यांश की बड़ी बहन मानवी ने उसे जगतपुरा शूटिंग रेंज भेजना शुरू कर दिया और उन्हें एक गन पकड़ा दी गई।
शुरुआत में वे अपनी बड़ी बहन की गन से अभ्यास करते थे, जो खुद एक निशानेबाज हैं।
ओलिंपिक गोल्ड मेडलिस्ट अभिनव बिंद्रा को आदर्श मानने वाला दिव्यांश जूनियर वर्ल्ड शूटिंग चैम्पियनशिप और जूनियर वर्ल्ड कप में दो स्वर्ण पदक समेत तीन मेडल जीत चुका हैं। दिव्यांश 12 साल की उम्र से शूटिंग का अभ्यास कर रहे हैं।