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जालोर: गणपतसिंह हत्याकांड का खुलासा नहीं, पीड़ित परिवार भूख हड़ताल पर

गणपत सिंह मांडोली गणपत सिंह मांडोली 66

जालोर (Jalore) के मांडोली (Mandoli) में डेढ़ साल पहले हुए गणपतसिंह (Ganpatsingh) हत्याकांड का खुलासा न होने से नाराज़ पीड़ित परिवार भूख हड़ताल पर बैठ गया है। मृतक की पत्नी भारती कंवर (Bharti Kanwar) अपने बच्चों के साथ कलेक्ट्रेट के बाहर प्रदर्शन कर रही हैं।

HIGHLIGHTS

  1. 1 डेढ़ वर्ष पूर्व हुए गणपतसिंह हत्याकांड का खुलासा नहीं। पीड़ित परिवार जालोर कलेक्ट्रेट के बाहर भूख हड़ताल पर बैठा। मृतक की पत्नी भारती कंवर ने पुलिस जांच पर सवाल उठाए। परिवार ने जल्द से जल्द न्याय की मांग की।
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गणपतसिंह हत्याकांड: परिवार भूख हड़ताल पर

जालोर: जालोर (Jalore) के मांडोली (Mandoli) में डेढ़ साल पहले हुए गणपतसिंह (Ganpatsingh) हत्याकांड का खुलासा न होने से नाराज़ पीड़ित परिवार भूख हड़ताल पर बैठ गया है। मृतक की पत्नी भारती कंवर (Bharti Kanwar) अपने बच्चों के साथ कलेक्ट्रेट के बाहर प्रदर्शन कर रही हैं।

यह मामला जालोर जिले के मांडोली गांव का है, जहां डेढ़ वर्ष पूर्व गणपतसिंह की निर्मम हत्या कर दी गई थी। इस जघन्य अपराध के बाद से ही परिवार न्याय की आस लगाए बैठा है, लेकिन पुलिस की ढीली कार्यप्रणाली के कारण अब तक हत्यारों का कोई सुराग नहीं मिल पाया है।

सोमवार को पीड़ित परिवार का धैर्य जवाब दे गया। मृतक गणपतसिंह की पत्नी भारती कंवर अपनी मासूम बच्चों, सास और जेठानी के साथ जालोर जिला कलेक्ट्रेट कार्यालय के बाहर अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर बैठ गईं। उनका यह कदम प्रशासन और पुलिस पर दबाव बनाने के लिए है, ताकि मामले में जल्द से जल्द कार्रवाई हो सके।

डेढ़ साल बाद भी न्याय का इंतजार

भारती कंवर का आरोप है कि घटना को डेढ़ साल से अधिक का समय बीत चुका है, लेकिन जालोर पुलिस हत्यारों को पकड़ने और हत्याकांड का पर्दाफाश करने में पूरी तरह विफल रही है। उन्होंने बताया कि इस दौरान उन्होंने कई बार पुलिस अधीक्षक (एसपी) और जिला कलेक्टर को ज्ञापन सौंपकर मामले की गंभीरता की ओर ध्यान आकर्षित कराया, लेकिन हर बार उन्हें केवल आश्वासन ही मिले।

परिवार का कहना है कि पुलिस ने जांच के नाम पर केवल खानापूर्ति की है। तफ्तीश में कोई ठोस प्रगति नहीं हुई है, जिसके कारण उन्हें अब न्याय मिलने की उम्मीद भी धूमिल होती जा रही है। इस निराशा और हताशा ने उन्हें यह कड़ा कदम उठाने पर मजबूर कर दिया है।

पुलिस पर लापरवाही के गंभीर आरोप

पीड़ित परिवार ने पुलिस पर जांच में गंभीर लापरवाही बरतने का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि अगर पुलिस शुरू से ही सक्रियता दिखाती, तो शायद अब तक हत्यारे सलाखों के पीछे होते। लेकिन पुलिस की उदासीनता के कारण अपराधी खुले घूम रहे हैं और परिवार को हर पल डर के साए में जीना पड़ रहा है।

भारती कंवर ने भावुक होते हुए कहा कि उनके पति की हत्या के बाद से उनके बच्चों का भविष्य अधर में लटक गया है। वे हर दिन अपने पिता के हत्यारों को सजा मिलने का इंतजार करते हैं। परिवार की आर्थिक स्थिति भी इस घटना के बाद से काफी खराब हो गई है, क्योंकि गणपतसिंह ही घर के एकमात्र कमाने वाले सदस्य थे।

प्रशासन से तत्काल कार्रवाई की मांग

भूख हड़ताल पर बैठे परिवार ने जालोर प्रशासन से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है। उनकी मुख्य मांग है कि गणपतसिंह हत्याकांड का जल्द से जल्द खुलासा किया जाए और दोषियों को गिरफ्तार कर कठोरतम सजा दी जाए। परिवार का कहना है कि जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं होतीं, तब तक वे अपनी भूख हड़ताल जारी रखेंगे।

स्थानीय सामाजिक संगठनों और ग्रामीणों ने भी पीड़ित परिवार का समर्थन किया है। उन्होंने प्रशासन से अपील की है कि वे इस गंभीर मामले को प्राथमिकता दें और पीड़ित परिवार को न्याय दिलाने के लिए सभी आवश्यक कदम उठाएं। उनका मानना है कि इस तरह के मामलों में देरी से जनता का कानून व्यवस्था पर से विश्वास उठ जाता है।

जालोर में इस घटना को लेकर तनाव का माहौल है। लोग पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल उठा रहे हैं। देखना होगा कि प्रशासन और पुलिस इस भूख हड़ताल को समाप्त करने और पीड़ित परिवार को न्याय दिलाने के लिए क्या कदम उठाते हैं। यह मामला अब केवल एक परिवार का नहीं, बल्कि पूरे समाज में न्याय की उम्मीद का प्रतीक बन गया है।

पुलिस अधिकारियों की ओर से अभी तक इस मामले पर कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है। हालांकि, माना जा रहा है कि इस भूख हड़ताल के बाद प्रशासन पर दबाव बढ़ेगा और जांच में तेजी लाई जा सकती है। परिवार को उम्मीद है कि उनकी यह मुहिम रंग लाएगी और उन्हें आखिरकार न्याय मिल पाएगा।

यह घटना एक बार फिर पुलिस की जांच प्रणाली और जनता के प्रति उसकी जवाबदेही पर सवाल खड़े करती है। पीड़ित परिवार की यह भूख हड़ताल न्याय की लंबी लड़ाई का एक और दुखद उदाहरण है, जहां एक परिवार को अपने प्रियजन के हत्यारों को सजा दिलाने के लिए इस हद तक जाना पड़ रहा है।

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