हिमताराम बीते 4 मार्च 2026 को बिना बताए घर से कहीं चला गया था। जब वह देर रात तक वापस नहीं लौटा, तो परिजनों को चिंता हुई। उन्होंने अपने स्तर पर रिश्तेदारों और आसपास के गांवों में उसकी काफी तलाश की, लेकिन उसका कोई अता-पता नहीं चला। अंततः थक-हारकर परिजनों ने 8 मार्च को रामसीन पुलिस थाने में गुमशुदगी की शिकायत दर्ज कराई।
खेत में मिली लाश: रोंगटे खड़े कर देने वाला मंजर
मंगलवार, 10 मार्च को मृतक का भाई मगाराम गांव के ही कुछ अन्य युवकों के साथ हिमताराम की खोजबीन कर रहा था। इसी दौरान जब वे भेराराम प्रजापत के खेत में पहुंचे, तो वहां फसल के बीच उन्हें एक दुर्गंध महसूस हुई। पास जाकर देखने पर उन्हें हिमताराम का शव मिला, जो पूरी तरह से सड़ी-गली अवस्था में था। शव की हालत देखकर यह अंदाजा लगाया जा रहा है कि मौत कई दिन पहले हो चुकी थी।
गणपत सिंह हत्याकांड और बढ़ता आक्रोश
मांडोली गांव में यह घटना तब सामने आई है जब वहां गणपत सिंह हत्याकांड को लेकर पहले से ही माहौल गरमाया हुआ है। गणपत सिंह के परिजन और ग्रामीण हत्यारों की गिरफ्तारी की मांग को लेकर धरने पर बैठे हैं। ऐसे संवेदनशील समय में हिमताराम की संदिग्ध मौत ने पुलिस की चुनौतियों को दोगुना कर दिया है। ग्रामीणों का कहना है कि गांव में अपराध का ग्राफ बढ़ रहा है और पुलिस प्रशासन मूकदर्शक बना हुआ है।
पुलिस जांच और परिजनों की मांग
रामसीन थाना पुलिस ने शव को अपने कब्जे में लेकर जांच शुरू कर दी है। मृतक के भाई मगाराम ने पुलिस को लिखित रिपोर्ट सौंपकर निष्पक्ष जांच और उचित कार्रवाई की मांग की है। पुलिस ने फिलहाल मर्ग दर्ज किया है और शव का पोस्टमार्टम करवाया जा रहा है। थानाधिकारी का कहना है कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही स्पष्ट हो पाएगा कि यह आत्महत्या है या हत्या। गांव में शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिस बल तैनात किया गया है।
निष्कर्ष
मांडोली गांव में एक के बाद एक हो रही इन घटनाओं ने स्थानीय प्रशासन की नींद उड़ा दी है। जहां एक तरफ गणपत सिंह हत्याकांड की गुत्थी अब तक अनसुलझी है, वहीं हिमताराम की मौत ने कई नए सवाल खड़े कर दिए हैं। अब देखना यह है कि पुलिस इन मामलों में कितनी जल्दी कार्रवाई कर दोषियों को सजा दिला पाती है और गांव में फिर से शांति बहाल कर पाती है।