जोधपुर | वाल्मीकि समुदाय से आने वाले सन्तराम का परिवार जोधपुर के हनवंत राजपूत छात्रावास में बीती तीन पीढ़ी से श्रमसाधना कर रहा है। आज उनके घर पर विवाह का मांगलिक अवसर आया तो युवाओं ने अनूठा उदाहरण पेश करके साम्प्रदायिक और जातीय विद्वेष फैलाने वालों को करारा जवाब दिया है।

हनवंत राजपूत छात्रावास मे तीन पीढ़ियों से सेवा दे रहे संतराम की पुत्री पिंकी जावा के विवाह का अवसर था। छात्रावास के विद्यार्थियों ने अपने व्यक्तिगत खर्च से पांच लाख इक्यावन हजार रुपए एकत्र किए और मायरा भरा। मायरा राजस्थान की अनूठी परम्परा है, जो भाई और बहिन के रिश्ते का एक उर्जामयी आधारशिला की प्रतिष्ठा करता है।

