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जूली का दावा: बीजेपी राज में हर राजस्थानी पर एक लाख कर्ज

प्रदीप बीदावत प्रदीप बीदावत 50

नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली (Tikaram Juli) ने बीजेपी (BJP) सरकार के दो साल के कार्यकाल पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने दावा किया कि 70% वादे अधूरे हैं और हर राजस्थानी (Rajasthani) पर एक लाख रुपये का कर्ज है। जूली ने मुख्यमंत्री (Chief Minister) को बहस के लिए समय और स्थान तय करने की चुनौती दी।

HIGHLIGHTS

  1. 1 बीजेपी सरकार के दो साल के कार्यकाल पर टीकाराम जूली ने उठाए सवाल। दावा: हर राजस्थानी पर एक लाख रुपये का कर्ज बढ़ा। मुख्यमंत्री को अधूरे वादों पर बहस के लिए चुनौती दी। सरकारी स्कूलों में छात्रों की संख्या घटी और नौकरियों के वादे अधूरे।
juli ka dava bjp raj mein har rajasthani par ek lakh karz
जूली: बीजेपी राज में हर राजस्थानी पर 1 लाख कर्ज

जयपुर: नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली (Tikaram Juli) ने बीजेपी (BJP) सरकार के दो साल के कार्यकाल पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने दावा किया कि 70% वादे अधूरे हैं और हर राजस्थानी (Rajasthani) पर एक लाख रुपये का कर्ज है। जूली ने मुख्यमंत्री (Chief Minister) को बहस के लिए समय और स्थान तय करने की चुनौती दी।

नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने बीजेपी सरकार के दो साल के कार्यकाल पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि सरकार के 70 प्रतिशत वादे पूरे करने का दावा सिर्फ हवा-हवाई है।

जूली ने मुख्यमंत्री को अधूरे वादों पर बहस के लिए चुनौती दी। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री समय और स्थान तय करें, वह बहस के लिए तैयार हैं।

राजस्थान पर बढ़ा भारी कर्ज

जूली ने आरोप लगाया कि बीजेपी सरकार बनने के बाद राजस्थान पर 1.55 लाख करोड़ रुपये का कर्ज बढ़ गया है। उन्होंने चेतावनी दी कि यह कर्ज आगे और बढ़ेगा।

उनके अनुसार, इस बढ़ोतरी के कारण अब हर राजस्थानी पर एक लाख रुपये का कर्ज हो गया है। जूली जयपुर स्थित अपने आवास पर मीडिया से बातचीत कर रहे थे।

अधूरी बजट घोषणाएं और वादे

टीकाराम जूली ने सरकार की बजट घोषणाओं पर भी सवाल उठाए। उन्होंने बताया कि बीजेपी सरकार ने दो बजट में कुल 1727 घोषणाएं की थीं।

इनमें से केवल 754 बजट घोषणाएं ही पूरी हुई हैं। 1256 बजट घोषणाएं अभी भी अधूरी हैं, जिन पर काम पूरा नहीं हुआ है।

जूली ने यह भी बताया कि 760 बजट घोषणाएं ऐसी हैं, जिन पर अभी तक कोई काम शुरू ही नहीं हुआ है।

शिक्षा और रोजगार के मोर्चे पर विफलता

सरकारी स्कूलों में नामांकन में गिरावट

जूली ने शिक्षा क्षेत्र में भी सरकार की विफलता बताई। उन्होंने कहा कि बीजेपी राज में सरकारी स्कूलों में छात्रों का नामांकन घटा है।

साल 2023-24 में सरकारी स्कूलों में 1.67 करोड़ छात्र थे। यह संख्या 2024-25 में घटकर 1.62 करोड़ रह गई है, जिससे 5 लाख विद्यार्थियों की कमी आई है।

नौकरियों के वादे अधूरे

सरकार ने चार लाख नौकरियां देने का वादा किया था। हालांकि, दो साल में केवल 95 हजार नौकरियां ही दी जा सकी हैं।

जूली ने दावा किया कि ये नौकरियां भी उनके कार्यकाल के दौरान शुरू हुई प्रक्रियाओं का हिस्सा थीं।

एमओयू और किसानों के मुद्दे

नेता प्रतिपक्ष ने सरकार के 35 लाख करोड़ रुपये के एमओयू (MoU) के दावों पर भी सवाल उठाए। सरकार का दावा है कि 8 लाख करोड़ रुपये के एमओयू जमीन पर उतार दिए गए हैं।

जूली ने कहा कि सरकार को खुद इसकी जानकारी नहीं है। विधानसभा में सवाल पूछने पर भी कोई जवाब नहीं मिलता है।

आरटीआई (RTI) के माध्यम से भी इन एमओयू की जानकारी नहीं दी जा रही है।

किसानों की आय दोगुनी करने का वादा

किसानों की आय दोगुनी करने का वादा भी अधूरा रहा। 2025 तक सभी घरों में नल से जल देने और 25 लाख कनेक्शन देने का वादा था।

लेकिन अब तक सिर्फ 9 लाख कनेक्शन ही दिए गए हैं। एमएसपी (MSP) पर खरीद दोगुनी करने का वादा भी पूरा नहीं हुआ।

बाजरे की एमएसपी पर खरीद का दावा भी झूठा साबित हुआ है।

अन्य अधूरे वादे और नीतियां

जूली ने तबादला नीति पर भी सरकार को घेरा। तबादला नीति की घोषणा की गई थी, लेकिन आज तक कोई नीति नहीं बनी है।

छात्रों को यूनिफॉर्म के लिए 1200 रुपये देने का वादा भी झूठा निकला। एससी-एसटी (SC-ST) के विद्यार्थियों को केवल 600 रुपये दिए जा रहे हैं।

ओबीसी (OBC) और सामान्य वर्ग के छात्रों को इस योजना से बाहर कर दिया गया है। पशुओं का बीमा भी अधूरा है।

जूली ने बताया कि उनके समय में 80 लाख पशु पंजीकृत थे, जबकि इस सरकार ने केवल 20 लाख पशुओं का ही बीमा किया है।

शिक्षा विभाग में एक लाख पद भरने का वादा किया गया था, लेकिन आज भी हजारों पद खाली पड़े हैं।

पेट्रोल-डीजल सस्ता करने का वादा

नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि गुजरात और हरियाणा की तर्ज पर पेट्रोल-डीजल सस्ता करने का वादा भी पूरा नहीं हुआ।

आईआईटी (IIT) और एम्स (AIIMS) की तर्ज पर नए संस्थान खोलने का वादा किया गया था, लेकिन सरकार ने केवल नाम बदले हैं।

किसानों की जमीन नीलामी पर रोक लगाने के लिए भी कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है।

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