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ज़िंदगानी

शरद पूर्णिमा पर बाबा श्याम का दिव्य श्वेत श्रृंगार, रात 12 बजे लगेगा खीर का भोग

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राजस्थान के सीकर जिले में खाटूश्याम में शरद पूर्णिमा बड़े उत्साह से मनाई जा रही है। बाबा श्याम का श्वेत फूलों और परिधानों से दिव्य श्रृंगार किया गया है, और रात 12 बजे खीर का भोग लगेगा।

HIGHLIGHTS

  1. 1 खाटूश्याम में शरद पूर्णिमा का पर्व बड़े उत्साह से मनाया जा रहा है। बाबा श्याम का श्वेत फूलों और परिधानों से दिव्य श्रृंगार किया गया है। रात 12 बजे चंद्रमा की रोशनी में रखी खीर का विशेष भोग लगाया जाएगा। शरद पूर्णिमा पर साल में एक बार ही होता है बाबा का श्वेत श्रृंगार।
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khatushyam temple

राजस्थान के सीकर जिले में स्थित प्रसिद्ध तीर्थ स्थल खाटूश्याम में आज यानी सोमवार को शरद पूर्णिमा का पावन पर्व बड़े ही उत्साह और भक्तिभाव के साथ मनाया जा रहा है। इस विशेष अवसर पर बाबा श्याम का अद्वितीय और मनमोहक श्वेत श्रृंगार किया गया है, जिसके दर्शन के लिए हजारों की संख्या में भक्त उमड़ पड़े हैं।

श्वेत फूलों और परिधानों से हुआ दिव्य श्रृंगार

शरद पूर्णिमा के उपलक्ष्य में, बाबा श्याम का श्रृंगार पूरी तरह से श्वेत (सफेद) थीम पर आधारित है। उन्हें सफेद फूलों की विशेष मालाओं और शुभ्र (सफेद) परिधानों से सजाया गया है। यह श्वेत श्रृंगार चांदनी रात में बाबा के स्वरूप को और भी दिव्य और आकर्षक बना रहा है। इसके अलावा, बाबा श्याम को चांदी और रत्न जड़ित श्वेत मुकुट भी पहनाया गया है, जो उनकी शोभा में चार चांद लगा रहा है। मंदिर का पूरा गर्भ गृह भी श्वेत रंग में रंगा हुआ है, जिससे एक अलौकिक वातावरण बन गया है। यह विशेष श्वेत श्रृंगार साल में केवल एक बार शरद पूर्णिमा के अवसर पर ही किया जाता है।

रात 12 बजे लगेगा खीर का विशेष भोग

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, शरद पूर्णिमा की रात चंद्रमा अपनी सोलह कलाओं से परिपूर्ण होता है और उसकी किरणें अमृत बरसाती हैं। इसी विशेष और पवित्र रात्रि को, ठीक रात 12 बजे बाबा श्याम को खीर का विशेष भोग लगाया जाएगा। यह खीर चंद्रमा की रोशनी में रखी जाती है, जिसे बाद में भक्तजन प्रसाद के रूप में ग्रहण करेंगे। भक्तों का मानना है कि इस खीर को ग्रहण करने से आरोग्य और सुख-समृद्धि प्राप्त होती है।

कौन हैं बाबा खाटूश्याम?

हारे के सहारे बाबा श्याम को भगवान कृष्ण का अवतार माना जाता है। महाभारत युद्ध के दौरान भीम के पौत्र बर्बरीक कौरवों की तरफ से युद्ध में शामिल होने जा रहे थे। बर्बरीक के पास तीन ऐसे तीर थे, जो पूरे युद्ध का रुख पलट सकते थे। इसी को लेकर भगवान कृष्ण ब्राह्मण के रूप में आए और उनसे उनका शीश दान में मांग लिया। बर्बरीक ने भी बिना किसी संकोच के भगवान कृष्ण को अपना शीश दान में दे दिया। तब भगवान कृष्ण ने प्रसन्न होकर बर्बरीक को आशीर्वाद दिया कि 'बर्बरीक, तुम्हें कलयुग में श्याम के नाम से पूजा जाएगा, तुम्हें लोग मेरे नाम से पुकारेंगे और तुम अपने भक्तों के हारे का सहारा बनोगे।' इसी कारण आज भी बाबा श्याम को हारे का सहारा कहा जाता है और लाखों भक्त उनकी शरण में आते हैं।

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