जब परिवादी ने दूसरी किस्त जारी करने के लिए संपर्क किया, तो सहायक बैंक प्रबंधक अतुल सिंह ने एक लाख रुपये की रिश्वत की मांग की। इस अनुचित मांग से परेशान होकर परिवादी ने एसीबी चौकी कोटा में शिकायत दर्ज कराई।
एसीबी ने ऐसे बिछाया जाल
एसीबी ने 9 अक्टूबर को शिकायत का सत्यापन किया, जिसमें रिश्वत मांगने की पुष्टि हुई। इसके बाद, एसीबी ने आरोपी को पकड़ने के लिए एक सुनियोजित ट्रैप का जाल बिछाया।
हालांकि, आरोपी अतुल सिंह को कार्रवाई की भनक लग गई और वह छुट्टी लेकर चला गया। कुछ समय बाद, उसने फिर से परिवादी से संपर्क किया और रिश्वत देने के लिए दबाव बनाना शुरू किया।
लगातार दबाव के बाद, आरोपी 1 लाख रुपये की बजाय 40 हजार रुपये की रिश्वत लेने पर सहमत हो गया। एसीबी डीएसपी अनीस अहमद के नेतृत्व में एक विशेष टीम ने मंगलवार को ट्रैप कार्रवाई को अंजाम दिया।
आरोपी अतुल सिंह रिश्वत लेने के लिए सीधे परिवादी के घर पहुंचा। जैसे ही उसने परिवादी से 40 हजार रुपये की रिश्वत ली, एसीबी टीम ने पहले से मिले इशारे पर उसे रंगे हाथों गिरफ्तार कर लिया।
न्यायिक रिमांड पर भेजा गया आरोपी
गिरफ्तारी के बाद, आरोपी सहायक बैंक मैनेजर अतुल सिंह को एसीबी कोर्ट में पेश किया गया। कोर्ट ने मामले की गंभीरता को देखते हुए आरोपी को न्यायिक अभिरक्षा में जेल भेजने के आदेश दिए।
भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो कोटा के एडिशनल एसपी विजय स्वर्णकार ने मीडिया को बताया कि कोर्ट ने आरोपी अतुल सिंह को 12 दिन की रिमांड पर भेजा है। इस दौरान मामले की आगे की जांच की जाएगी।
एसीबी ने आरोपी के अयाना स्थित आवास पर भी तलाशी अभियान चलाया। हालांकि, तलाशी में कोई बड़ी आपत्तिजनक वस्तु या बेहिसाब संपत्ति नहीं मिली।
भ्रष्टाचार के खिलाफ एसीबी की प्रतिबद्धता
यह मामला एक बार फिर दर्शाता है कि भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) राजस्थान में भ्रष्टाचार के खिलाफ लगातार सक्रिय है। सरकारी विभागों में पारदर्शिता और ईमानदारी सुनिश्चित करने के लिए ऐसी कार्रवाईयां अत्यंत महत्वपूर्ण हैं।
एसीबी की यह त्वरित और प्रभावी कार्रवाई आम जनता में विश्वास पैदा करती है कि भ्रष्टाचार के मामलों में कड़ी कार्रवाई की जाएगी। यह घटना उन अधिकारियों के लिए भी एक चेतावनी है जो अपनी शक्ति का दुरुपयोग कर रिश्वतखोरी में लिप्त होते हैं।