इससे पहले, सोमवार को प्रधानमंत्री मोदी का इथियोपिया के नेशनल पैलेस में प्रधानमंत्री अबी अहमद अली ने औपचारिक स्वागत किया। इस दौरान दोनों नेताओं ने महत्वपूर्ण द्विपक्षीय बैठक की, जिसमें विभिन्न क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर चर्चा हुई।
बैठक के दौरान, प्रधानमंत्री मोदी ने इथियोपिया आकर अपनी असीम खुशी व्यक्त की। उन्होंने कहा कि यह दौरा दोनों देशों के बीच संबंधों को नई ऊंचाइयों पर ले जाएगा।
पीएम अली का असाधारण और व्यक्तिगत स्वागत
इथियोपिया के प्रधानमंत्री अबी अहमद अली ने सोमवार को अदीस अबाबा एयरपोर्ट पर खुद प्रधानमंत्री मोदी का स्वागत किया। यह एक असाधारण और व्यक्तिगत इशारा था, जो दोनों नेताओं के बीच गहरे सौहार्द को दर्शाता है।
एयरपोर्ट पर ही दोनों नेताओं ने अनौपचारिक बातचीत की और पीएम अहमद अली ने मोदी को पारंपरिक इथियोपियाई कॉफी भी पिलाई। यह मेहमाननवाजी का एक विशेष प्रतीक था।
इसके बाद, पीएम अहमद अली खुद अपनी कार चलाकर प्रधानमंत्री मोदी को होटल तक ले गए। रास्ते में उन्होंने मोदी को इथियोपिया के साइंस म्यूजियम और मैत्री पार्क भी दिखाया, जिससे मोदी को देश की संस्कृति और प्रगति को समझने का अवसर मिला।
भारत-इथियोपिया संबंधों में नई मजबूती और पीएम अली की प्रशंसा
द्विपक्षीय बैठक के दौरान, इथियोपियाई प्रधानमंत्री अहमद अली ने प्रधानमंत्री मोदी की दूरदर्शी सोच की जमकर सराहना की। उन्होंने विशेष रूप से इस बात पर जोर दिया कि प्रधानमंत्री मोदी हमेशा यह कहते हैं कि अफ्रीका के साथ साझेदारी उसकी वास्तविक जरूरतों के हिसाब से होनी चाहिए।
अहमद अली ने कहा कि वर्तमान समय में भारत और इथियोपिया के बीच एक नई और मजबूत साझेदारी की अत्यंत आवश्यकता है। उन्होंने दोनों देशों के बीच सहयोग के नए आयामों पर प्रकाश डाला।
उन्होंने यह भी बताया कि इथियोपिया में विदेशी निवेश तेजी से बढ़ रहा है और इस क्षेत्र में भारत सबसे बड़ा निवेशक बनकर उभरा है। यह इथियोपियाई अर्थव्यवस्था के लिए भारतीय कंपनियों के महत्व को दर्शाता है।
वर्तमान में, इथियोपिया में 615 से अधिक भारतीय कंपनियां विभिन्न क्षेत्रों में निवेश कर रही हैं, जो रोजगार सृजन और आर्थिक विकास में महत्वपूर्ण योगदान दे रही हैं।
छात्रवृत्ति में वृद्धि और आतंकवाद के खिलाफ एकजुटता
बैठक में प्रधानमंत्री मोदी ने इथियोपिया के छात्रों के लिए भारतीय छात्रवृत्ति की संख्या को दोगुना करने का महत्वपूर्ण ऐलान किया। यह शिक्षा और मानव संसाधन विकास के क्षेत्र में भारत की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
इसके अतिरिक्त, प्रधानमंत्री मोदी ने पहलगाम आतंकी हमले पर इथियोपिया द्वारा व्यक्त की गई संवेदनाओं और आतंकवाद के खिलाफ भारत के समर्थन के लिए धन्यवाद दिया। यह आतंकवाद के विरुद्ध वैश्विक लड़ाई में दोनों देशों की एकजुटता को रेखांकित करता है।
दोनों देशों ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के क्षेत्र में नए कार्यक्रम शुरू करने और छात्रवृत्ति को दोगुना करने का भी निर्णय लिया है। यह तकनीकी सहयोग और शिक्षा के आदान-प्रदान को बढ़ावा देगा।
भारत: इथियोपिया का दूसरा सबसे बड़ा व्यापारिक भागीदार
भारत, इथियोपिया का दूसरा सबसे बड़ा व्यापारिक भागीदार है, जो दोनों देशों के बीच मजबूत आर्थिक संबंधों को दर्शाता है। वित्तीय वर्ष 2023-24 में दोनों देशों के बीच कुल 5175 करोड़ रुपये का द्विपक्षीय व्यापार दर्ज किया गया।
इस व्यापारिक आदान-प्रदान के दौरान, भारत ने इथियोपिया को 4433 करोड़ रुपये का निर्यात किया, जबकि इथियोपिया ने भारत को 742 करोड़ रुपये मूल्य का सामान निर्यात किया। यह व्यापार संतुलन भारत के पक्ष में है, लेकिन दोनों देशों के बीच वस्तुओं का महत्वपूर्ण आदान-प्रदान होता है।
प्रमुख आयात और निर्यात वस्तुएं
इथियोपिया भारत से मुख्य रूप से लोहा, स्टील, दवाएं, फार्मास्युटिकल्स उत्पाद, मशीनरी और विभिन्न उपकरण आयात करता है। ये वस्तुएं इथियोपिया के औद्योगिक और स्वास्थ्य क्षेत्रों के लिए महत्वपूर्ण हैं।
वहीं, भारत इथियोपिया से दालें, कीमती पत्थर, विभिन्न प्रकार की सब्जियां और बीज, चमड़ा उत्पाद तथा मसाले आयात करता है। ये उत्पाद भारतीय बाजारों में अपनी विशेष पहचान रखते हैं।
ऐतिहासिक व्यापारिक और राजनयिक संबंध
भारत और इथियोपिया के बीच व्यापारिक रिश्तों की जड़ें काफी गहरी हैं, जिनकी शुरुआत 1940 के दशक में ही हो गई थी। यह दर्शाता है कि भारत की आजादी से पहले ही दोनों देशों के बीच कारोबार फल-फूल रहा था।
वर्ष 1950 में राजनयिक संबंध स्थापित होने के बाद, दोनों देशों के बीच औपचारिक व्यापारिक गतिविधियां और मजबूत हुईं। इन दशकों में, दोनों देशों ने आपसी विश्वास और सम्मान के आधार पर अपने संबंधों को विकसित किया है।
प्रधानमंत्री मोदी का यह दौरा, जो उन्होंने जॉर्डन से इथियोपिया पहुंचकर किया, दोनों देशों के बीच संबंधों को एक नई ऊर्जा और दिशा प्रदान करने में सफल रहा है। यह दौरा न केवल द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करेगा, बल्कि अफ्रीका के साथ भारत की व्यापक साझेदारी को भी बल देगा।