जयपुर। भरतपुर बाबा साहेब अम्बेडकर की मूर्ति की प्रस्तावित स्थापना को लेकर सांप्रदायिक तनाव और हिंसा जैसी स्थिति की चपेट में आ गया है। 12 अप्रैल की रात स्थिति और बिगड़ गई, जब दो जातियों के बीच झड़पें हुईं और दंगे जैसी स्थिति बन गई।
आगजनी, पथराव और सड़क जाम केबीच पुलिस को स्थिति को नियंत्रित करने के लिए संघर्ष करना पड़ा। प्रदर्शनकारियों ने पीछे हटने से इनकार कर दिया, यहां तक कि पुलिस ने अनियंत्रित भीड़ को तितर-बितर करने के लिए आंसू गैस के गोले दागे। कई पुलिसकर्मी हिंसा के बीच फंस गए और घंटों तक स्थिति तनावपूर्ण बनी रही।
इस शर्मनाक घटनाक्रम ने एक बार फिर से कुम्हेर कांड ताजा किया है। जो 1992 के जून में हुआ था। इसमें कई लोगों को सजा तो हुई है, लेकिन लोगों के जख्म अभी भरे भी नहीं कि एक बार फिर से इन दंगों ने नमक छिड़कने का काम किया है।
समस्या की जड़ जाट समुदाय और कांग्रेस विधायक जोगेंद्र सिंह अवाना की परस्पर विरोधी मांगों में है। सिंह ने एक चौराहे पर बाबा साहेब अंबेडकर की मूर्ति स्थापित करने के अपने इरादे की घोषणा की थी, जिसका जाट समाज ने विरोध जताया। उन्होंने भरतपुर के संस्थापक महाराजा सूरजमल की मूर्ति स्थापित करने की मांग की।